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Friday, 23 February 2018

वीडियो और टेलीविज़न प्रोडक्शन – विज़न मिक्सर (Vision Mixer)

विज़न मिक्सर (वीडियो स्विचर)
एक विज़न मिक्सर (उर्फ वीडियो स्विचर या प्रोडक्शन स्विचर) का उपयोग कई वीडियो स्रोतों को एक या अधिक मास्टर आउटपुट में मिश्रण करने के लिए किया जाता है. (A device used to mix multiple video sources into one or more master outputs). 

उदाहरण के तौर पर न्यूज़ चैनल में चलने वाले लाइव डिबेट प्रोग्राम के दौरान देखा जा सकता है जब एक साथ कई जगह से कई अलग-अलग लोग बैठकर डिबेट करते हैं और वीडियो स्विचर ऑपरेटर कमांड के अनुसार लगातार ऑन एयर स्क्रीन पर वीडियो बदलते रहता है.

विज़न मिक्सर का आकार और कीमत उसके इनपुट चैनल की संख्या के अनुसार तय होती है. इसके अलावा जिस विज़न मिक्सर में वीडियो के साथ-साथ ऑडियो इनपुट भी उपलब्ध हो उसे हम मास्टर स्विचर कहते हैं. चित्र क्रमांक 16(a) देखें.

चित्र क्रमांक 16(a)

विज़न मिक्सर क्या करता है?
विज़न मिक्सर का मुख्य उद्देश्य लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग या प्रसारण के लिए एक मास्टर आउटपुट बनाना है. आमतौर पर विजन मिक्सर का उपयोग लाइव इवेंट्स, या किसी ऐसे इवेंट को कवर करना है, जहां कई स्रोतों को वास्तविक समय में मिश्रित करने और स्विचिंग करने की आवश्यकता होती है. 

विजन मिक्सर का उपयोग स्विचिंग के दौरान विभिन्न विसुअल इफेक्ट्स डालने के लिए भी किया जा सकता है (जिसमे कि सरल कट, मिक्स और वाइप से लेकर एडवांस कम्पोजिट इफ़ेक्ट भी रहते हैं).

विज़न मिक्सर काम कैसे करता है?
विजन मिक्सर मूलतः ऑडियो मिक्सर के समान होते हैं. यह कई इनपुट स्रोत लेते हैं, कोई भी इच्छित इफ़ेक्ट लागू करते हैं, और एक या अधिक आउटपुट प्रदान करते हैं. 

अधिकांश विज़न मिक्सर प्रोग्राम बस और प्रीव्यू बस की थ्योरी पर काम करते हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास अपना मॉनिटर होता है. (विज़न मिक्सर पैनल पर, बस कई बटन की एक पंक्ति को कहा जाता है). पुराने वीडियो मिक्सर में दो समकक्ष बसें थीं (जिसे ए और बी बस कहा जाता है, ऐसे मिक्सर को ए / बी मिक्सर (A/B Mixer) के रूप में जाना जाता है). इन दो बस का कार्य कुछ इस प्रकार है -

प्रोग्राम बस – यह मुख्य आउटपुट फीड होती है (मतलब वह वीडियो जो रिकॉर्ड या ब्रॉडकास्ट किया जाना है) जो भी वीडियो सोर्स प्रोग्राम बस पर होता है उसे ऑनलाइन कहते हैं. (वह वीडियो जो आपको टीवी पर दीखता है).
प्रीव्यू बस – प्रीव्यू बस उस स्रोत का चयन करने और प्रीव्यू करने के लिए उपयोग किया जाता है जो ऑनलाइन किया जाने वाला है. 

इसके अलावा एक तीसरी बस जिसे कंपोजिटिंग के लिए उपयोग किया जाता है उसे की-बस (Key bus) कहते हैं. एक मिक्सर में एक से अधिक की-बस हो सकती है, लेकिन अक्सर वे केवल एक ही बटन-सेट शेयर करते हैं

विज़न मिक्सर की एक और मुख्य विशेषता ट्रांजीशन लीवर है, जिसे टी-बार या फ़ेडर बार भी कहा जाता है। एक ऑडियो फेडर के समान यह लीवर, दो बसों के बीच ट्रांजीशन के लिए उपयोग किया जाता है।
डिजिटल वीडियो मिक्सर में एक स्क्रीन होती है जिसमे सभी बटन और कण्ट्रोल या फाइनल आउटपुट को देख सकते हैं. चित्र क्रमांक 16(b) देखें.

चित्र क्रमांक 16(b)

वीडियो स्विचर ऑपरेटर का कार्य – 
वीडियो स्विचर ऑपरेटर निर्देशक या प्रोड्यूसर से अपने निर्देश लेता है। असल में, निर्देशक यह तय करता है कि कब कौनसी वीडियो फीड ओन एयर (on air) जायेगी और स्विचर को यह करने के लिए कहता है। निर्देशों का एक विशिष्ट सेट इस तरह से हो सकता है:

Directors Instruction: Meaning:
“1 next” Preview Camera 1 and prepare to put it online 
“Take” Cut Camera 1 online
“2 next” Preview Camera 2 and prepare to put it online 
“Take” Mix Camera 2 online
etc.

Friday, 22 December 2017

वीडियो और टेलीविज़न प्रोडक्शन – कैमरा कण्ट्रोल यूनिट (Camera Control Unit)


सीसीयू (कैमरा कंट्रोल यूनिट) - प्रत्येक स्टूडियो कैमरा के पास अपना स्वयं का सीसीयू (कैमरा कंट्रोल यूनिट) होता है. सीसीयू दो मुख्य कार्य करता है: सेटअप और नियंत्रण
सेटअप के दौरान प्रत्येक कैमरा को सही रंग प्रस्तुति के लिए एडजस्ट किया जाता है- सफेद संतुलन, जिसमे एक दृश्य के सबसे उजले भाग और अंधेरे वाले भाग के बीच उचित कंट्रास्ट समन्वयन किया जाता है ।

सीसीयू वीडियो / टेलीविज़न कैमरे के कार्यों के रिमोट कंट्रोल से जुड़े कई उपकरणों और कार्यों को संदर्भित करता है. इसमें आंशिक या पूर्ण कैमरा नियंत्रण शामिल हो सकते हैं. सीसीयू संचालन कई प्रकार के टेलीविजन उत्पादन में एक महत्वपूर्ण घटक है, विशेष रूप से मल्टी कैमरा प्रस्तुतियों में सीसीयू का संचालन करने वाला व्यक्ति सीसीयू ऑपरेटर या वीडियो ऑपरेटर (VO), विज़न नियंत्रक (VC) या (कुछ मामलों में) तकनीकी निदेशक (TD) के रूप में जाना जाता है.

कलर सिग्नल चेक करने के लिए सीसीयू ऑपरेटर के पास दो उपकरण होते हैं -

1. वेवफॉर्म मॉनिटर (Waveform Monitor) – इसको oscilloscope भी कहते हैं. यह ल्युमिनेंस (Luminance) यानी ब्राइटनेस की जानकारी देता है. 

2. वेक्टर स्कोप (Vector Scope)यह क्रोमिनेंस (Chrominance) यानि कलर की जानकारी देता है.

आंशिक सीसीयू कण्ट्रोल (Partial CCU Control) - टेलीविजन उत्पादन में कैमरे के कार्यों को नियंत्रित करने के लिए यह एक सामान्य विधि है। यह एक पेशेवर दृष्टिकोण है, जो अधिकतम नियंत्रण और गुणवत्ता के लिए अनुमति देता है।

अधिकांश कैमरा फ़ंक्शंस (फ़्रेमिंग, फ़ोकस, आदि) आम तौर पर एक कैमरा ऑपरेटर द्वारा नियंत्रित होते हैं, जबकि कुछ फ़ंक्शन (रंग संतुलन, शटर गति, आदि) सीसीयू ऑपरेटर द्वारा दूर से रिमोट द्वारा नियंत्रित होते हैं। इससे कैमरा ऑपरेटर तकनीकी मुद्दों से विचलित हुए बिना फ्रेम और कम्पोजीशन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उसी समय सीसीयू ऑपरेटर, जो तकनीकी मुद्दों में अधिक विशेषज्ञ है, चित्रों की गुणवत्ता और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर सकता है. मल्टी-कैमरा प्रोडक्शन में सीसीयू ऑपरेटर आमतौर पर एक से अधिक कैमरे के लिए जिम्मेदार होता है (2-3 कैमरे सामान्य हैं, लेकिन 10 तक संभव है)। जाहिर है एक बड़े प्रोडक्शन में कई सीसीयू ऑपरेटरों की आवश्यकता हो सकती है। उदाहरण के लिए, एक 20-कैमरे के प्रसारण में 5 सीसीयू ऑपरेटर हो सकते हैं, प्रत्येक को 4 कैमरों को नियंत्रित करना पड़ सकता है.

नीचे दी गई तस्वीर (चित्र क्रमांक 15 (a) देखें) सीसीयू ऑपरेटर के सामने डेस्क कार्यक्षेत्र में एम्बेडेड चार सीसीयू नियंत्रकों के एक बैंक को दिखाती है। ऑपरेटर के सामने प्रत्येक कैमरे से चित्र दिखाने वाले चार मॉनिटर हैं। ये नियंत्रण अपेक्षाकृत उन्नत हैं और सीसीयू ऑपरेटर को निम्नलिखित की अनुमति देते हैं:
  • आईरिस, शटर गति, ब्लैक लेवल, गेन, आदि को नियंत्रित करें 
  • रंग संतुलन (Color Balance) एडजस्ट करें 
  • तकनीकी मापदंडों की एक विस्तृत श्रृंखला को एडजस्ट और मॉनिटर करें 
  • कैमरा ऑपरेटर को सिग्नल भेजें 
चित्र क्रमांक 15 (a) 
पूर्ण रिमोट कैमरा नियंत्रण (Complete remote camera control) - उच्च-प्रदर्शन वाले रिमोट-नियंत्रित कैमरों के आगमन के बाद से, सीसीयू में भी कैमरा यूनिट उपलब्ध है जो सीसीयू ऑपरेटर द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित होते हैं. ऐसे नियंत्रकों में पैन / टिल्ट व, ज़ूम और फोकस नियंत्रणों के अलावा, ऊपर उल्लिखित किसी भी सुविधा शामिल हो सकती है। 

Saturday, 18 November 2017

वीडियो कैमरा – व्यूफाइंडर (Viewfinder)

कैमरे के व्यूफाइंडर को कैसे सेट अप और उपयोग करना है

यह पोस्ट काले और सफेद (Black and White) इलेक्ट्रॉनिक व्यूफाइंडर (ईवीएफ) से संबंधित है, हालांकि रंगीन व्यूफाइंडर (Color Viewfinder) मूल रूप से उसी तरह काम करते हैं। (चित्र क्रमांक 14(a) देखें). 

विभिन्न कैमरों में ईवीएफ को एडजस्ट करने के लिए कई विकल्प हैं। उपभोक्ता कैमकोर्डर (Consumer Camcorder) आमतौर पर फोकस / शार्पनेस एडजस्ट करने तक सीमित है, जबकि पेशेवर कैमरों में कई विकल्प हैं निम्नलिखित प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्य करें, उन कार्यों की अनदेखी करें जो आपके कैमरे पर उपलब्ध नहीं हैं। 

चित्र क्रमांक 14(a) 
व्यूफाइंडर के ब्राइटनेस और कंट्रास्ट सेट करने के लिए - 
1. कैमरा को कलर बार (Color Bar) विकल्प में स्विच करें.
2. व्यूफाइंडर की ब्राइटनेस और कंट्रास्ट को तब तक एडजस्ट करें जब तक कि स्मूथ ग्रेस्केल नहीं देखते हैं सफेद रंग से काले रंग तक । इसके अलावा आपको प्रत्येक कलर बार के बीच में एक विभाजन रेखा (dividing line) दिखाई देनी चाहिए।
3. अब कैमरा को वापस पिक्चर पर स्विच करें.
4. एक प्रोफेशनल मॉनिटर पर अपने एक्सपोजर की जांच करें, या तो कैमरे के आउटपुट से केबल को कनेक्ट करके या एक टेस्ट रिकॉर्ड करके.

इलेक्ट्रॉनिक व्यूफाइंडर पर कुछ नोट्स -
1. पेशेवर कैमकॉर्डर (Professional Camcorder) में आम तौर पर काले और सफेद EVFs का उपयोग करते हैं उपभोक्ता कैमकोर्डर के साथ रंगीन ईवीएफ अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं
2. ईवीएफ अधिकतर WYSIWYG (What you see is what you get) की तर्ज पर काम करता है । इसका मतलब यह है कि अगर व्यूफाइंडर में दिख रही इमेज की ब्राइटनेस बदलती है, तो रिकॉर्ड किए गए सिग्नल में भी ब्राइटनेस बदलती है. एक बार आपके व्यूफाइंडर को सही ढंग से सेट-अप करने के बाद, आप अपनी तस्वीर की गुणवत्ता को सिर्फ देखकर ही न्याय कर सकते हैं (यानी यह कि आपका एक्सपोजर सही है या नहीं, यह देखने के लिए एफ-स्टॉप सूचक का उपयोग करने की आवश्यक नहीं है)।
3. व्यूफाइंडर में दिखाई देने वाले संदेश आपको बहुमूल्य जानकारी देते हैं. इन सभी का मतलब क्या है यह समझने की कोशिश करें.
4. यदि आपका व्यूफाइंडर फॉगिंग कर रहा है, तो अपनी आंख को आई-पिस (Eye piece) से थोड़ा दूर रखें। साथ ही, आपके तरल पदार्थों के सेवन को सीमित करें - यह पसीने को कम करता है, जो कि फॉगिंग का मुख्य कारण होता है.
5. कई व्यूफाइंडर आइपीस को खोला या फ़्लिप किया जा सकता है, जिससे आप कैमरे से थोडा दूर खड़े हो सकते हैं। यह और जायदा उपयोगी हो सकता है जब अगर आपके पास कैमरा ट्राईपोड पर रखा हो, या अगर एक से अधिक व्यक्ति व्यूफाइंडर को देखना चाहते हैं. यह आंखों की थकान को कम करने में भी मदद कर सकता है।

ज़ेबरा स्ट्राइप्स – 
ज़ेबरा स्ट्राइप्स या ज़ेबरा, पेशेवर कैमरों की एक विशेषता है जो एक्सपोजर स्तरों (Exposure Level) का संकेत देते हैं। जब यह सक्रिय होता है, तब विकर्ण लाइन (Diagonal Line) चित्र के किसी भी हिस्से में प्रकट होती है जो ओवर-एक्सपोजर का सन्देश देती है. चित्र क्रमांक 14(b) में देखें.
ये लाइन्स केवल व्यूफाइंडर में दिखाई देती हैं- वे कैमरे से आउटपुट लेने पर या रिकॉर्ड करने पर दिखाई नहीं देतीं. 

चित्र क्रमांक 14(b) 
ज़ेबरा स्ट्रिप्स को सेट करने के लिए-
ज़ेबरा स्ट्राइप्स को चालू करने के लिए "ज़ेबरा स्ट्रिप्स" लेबल वाला स्विच को चालू कीजिये. 
अगर कैमरा में विभिन्न ज़ेबरा सेटिंग्स (जैसे 75% या 100%) के बीच बदलने का विकल्प है, तो आपको पता होना चाहिए कि आप किस सेटिंग का उपयोग कर रहे हैं, और उसके परिणाम क्या होंगे.



Thursday, 22 June 2017

वीडियो कैमरा – शूटिंग तकनीक (Shooting Technique)

अपनी और अपने कैमरे की सही स्थिति जानें - यदि आप ट्राईपोड का उपयोग कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह स्थिर और और तीनों तरफ से बराबर हो (जब तक आपके पास इसको टिल्ट (Tilt) करने का कोई कारण ना हो). यदि ट्राईपोड में स्पिरिट लेवल (Spirit Level) हो तो उसे बिलकुल मध्य में रखें. 

यदि आप कैमरे को पैन और/या टिल्ट करने जा रहे हैं, तो इतना जरुर सुनिश्चित करें कि पुरे मूवमेंट के दौरान आपकी पोजीशन आरामदायक हो. 

अगर ट्राईपोड के हेड (Tripod Head) में बाउल ना लगी हो (जो अधिकतर सस्ते ट्राईपोड में पाया जाता है) तो फ्रेमिंग बनाते समय उसका पैन लेवल (Pan Level) जरुर जांचें क्योंकि अगर एक ही दिशा में शूट करना है तो कोई जायदा फर्क नहीं पड़ता पर अगर कैमरे को दायें से बायें पैन करना हो तो उस स्तिथि में पैन लेवल सही होना जरुरी है वरना शॉट ख़राब हो जाएगा. चित्र क्रमांक - 6(a) में देखें.

यदि आप ट्राईपोड का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो आप अपने और अपने कैमरे को यथासंभव स्थिर कर सकते हैं। अपने हाथ और कोहनी को अपने शारीर के पास रखें. साँसों को काबू में रखें. स्थिर शॉट्स के लिए, अपने पैरों को कंधे की सीधी में रखें (यदि आप खड़े हैं तो), या किसी ठोस ऑब्जेक्ट (फर्नीचर, दीवार या कुछ भी) का सहारा लेने की कोशिश करें।


चित्र क्रमांक - 6(a)

शॉट को फ्रेम करें – उसके बाद कुछ चीजों को त्वरित चेक करें: वाइट बैलेंस, फोकस, आईरिस, फ्रेम (वर्टीकल और हॉरिजॉन्टल लाइन्स, बैकग्राउंड आदि).

अपने ऑडियो पर ध्यान दें - ऑडियो उतना ही महतवपूर्ण है जितना वीडियो, इसलिए इस पर भी उतना ही ध्यान दें.

अब रिकॉर्ड बटन दबाएँ. ध्यान रखें जब आप रिकॉर्डिंग कर रहे हों तो आप सिर्फ रिकॉर्डिंग कर रहे हों क्योंकि इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता की आपकी रिकॉर्डिंग पूरी हो जाए और उसके बाद आपको पता चले की कुछ भी रिकॉर्ड नहीं हुआ है चाहे कारण कुछ भी हो. कई कैमरों के पास "रोल-इन टाइम" टेप होता है, जिसका अर्थ है कि जब आप रिकॉर्ड बटन दबाते हैं और जब कैमरा रिकॉर्डिंग प्रारंभ होता है दोनों के बीच में थोड़ा डिले (Delay) होता है.

व्यूफाइंडर के डिस्प्ले में दिखने वाले सभी संकेतों को लगातार देखते रहें. डिस्प्ले में दिखने वाले सभी संकेत के मतलब को जानने की कोशिश करें - वे आपको बहुमूल्य जानकारी दे सकते हैं

दोनों आँखों का उपयोग करें एक प्रोफेशनल व्यक्ति का एक बड़ा कौशल होता है कि वह एक आंख का उपयोग व्यूफाइंडर देखने में करता है वहीं दूसरी आँख से आस-पास के वातावरण पर नज़र रखता है. इसे सीखने में थोडा समय लग सकता है पर शोल्डर शॉट लेते समय या चलते हुए शॉट लेते समय यह तकनीक काफी सहायक सिद्द होती है. 

पीछे की ओर चलना सीखें - किसी को अपनी पीठ के बीच में अपना हाथ रखकर मार्गदर्शन करने को कहें और फिर पीछे चलते हुए शूट करें, ये शॉट्स बहुत अच्छे लग सकते हैं. आपने कई बार न्यूज़ प्रेसेंटर को चलते हुए इंटरव्यू करते हुए देखा होगा उसमे कामेरापरसन इसी तकनीक का उपयोग करता है.

फ्रेम और ऑडियो के बारे में लगातार सोचें – शूटिंग के दौरान फ्रेम कम्पोजीशन और ऑडियो को लगातार चेक करते रहें. 

कैमरे को मूव करने से पहले "रिकॉर्ड या स्टॉप" बटन दबाएं – रिकॉर्डिंग समाप्त होने के एक या दो सेकंड बाद स्टॉप बटन दबाएँ और फिर कैमरा को मूव करें (जैसे की हम फोटोग्राफी में फोटो लेने के बाद करते हैं). 

कुछ और टिप्स जो आपकी शूटिंग में सहायक होगी

शूटिंग के दौरान डिप्लोमेटिक रहें – जिन लोगों को आप शूट कर रहे हैं उनके बारे में सोचें. याद रहे की अधिकाँश लोग कैमरे के सामने थोड़े नर्वस हो जाते हैं ऐसे में आप थोड़ा सख्त रहें पर साथ ही अन्य विकल्पों के बारे में भी सोचें. 

अच्छे शॉट के लिए कब शोर मचाना या गुस्सा होना सही है और कब नहीं ये फैसला लेना सीखना होगा. अगर कोई महतवपूर्ण शॉट है तो उसे बिलकुल सही तरीके से लेने में कुछ लोगों को असुविधा हो सकती है. पर शॉट के लिए अपना नुकसान करवा लेना गलत होगा, ऐसे में उसका विकल्प तलाशें. 

तिथि/समय स्टाम्प फीचर का उपयोग कब करें – यह फीचर लगातार उपयोग करना सही नहीं होगा, इससे शॉट लो क्वालिटी प्रतीत होता है. इसका उपयोग उतनी देर ही करें जितना जरुरी है बाकी समय इसको बंद रखें. आजकल के डिजिटल कैमरों में यह फीचर आसानी से उपयोग किया जा सकता है. 

प्रयोग करने के लिए तैयार रहें - उन कुछ चीजों के बारे में हमेशा सोचें जो आप करने की कोशिश करना चाहते हैं, फिर खली समय में वह चीज़ करने की कोशिश करें (यानी शादी की शूटिंग करते समय प्रयोग न करें) अधिकांश नई तकनीकों को आदत बनाने के लिए अभ्यास और प्रयोग की ज़रूरत होती है और अच्छे कैमरावर्क के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है। 

अगर आप अच्छा काम करना चाहते हैं तो आपको कुछ समय निवेश करना होगा.

Saturday, 22 April 2017

वीडियो कैमरा - योजना (Planning)

योजना (planning): यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है, और संभवत: निर्देशक के लिए सबसे मुश्किल काम है। यह वह कार्य जहां आपकी अधिकांश ऊर्जा आपको निर्देशित करती है। 

बड़े प्रोजेक्ट में कैमरा वर्क सिर्फ एक कौशल है- जिसका लक्ष्य आमतौर पर एक पूरा वीडियो, टीवी कार्यक्रम, या किसी तरह की प्रस्तुति का उत्पादन करने के लिए होता है. एक अच्छे कैमरा वर्क के लिए, आपके पास पूरी प्रक्रिया का स्पष्ट चित्र होना चाहिए या कम से कम एक स्पष्ट विचार होना चाहिए की जब यह वीडियो बन जाएगा तो कैसा दिखेगा और कैसा सुनाई देगा .

कोई एक चीज़ है जो पेशेवरों को शौकीनों से अलग करती है तो वह है शौक़ीन हमेशा “विषय और शूट” (point and shoot) करते हैं और पेशेवर हमेशा “योजना और शूट” (planning and shoot) करते हैं l जाहिर है कई बार ऐसी परिस्थिति होती है जब रिकॉर्डिंग से पहले तैयारी करने का समय नहीं मिलता है- कभी कभी कार्यवाही अप्रत्याशित होती है और आपको उसके लिए जाना होता है l इन मामलों में, जहाँ तक संभव हो आपको अपनी योजना के अनुसार चलना चाहिए – योजना सबकुछ है (Planning is everything).

सामान्य कैमरा वर्क के लिए आप योजना को दो भाग में विभाजित कर सकते हैं – “शूट प्लान” और “शॉट प्लान”.

शूट प्लान (Shoot Plan):
इस मामले में “शूट” शब्द एक शूटिंग सत्र को संदर्भित करता है. अगर आप रिकॉर्ड की गयी हर फुटेज को शूट का भाग समझते हैं और प्रत्येक शूट के लिए एक योजना बना रहे हैं, तो आप बेहतर संगठित फुटेज बनाने के रास्ते पर हैं।

सबसे पहले, प्रत्येक शूट के उद्देश्य के बारे में आप पूरी तरह से स्पष्ट होना चाहिए। सामान्यतः, आप जो कुछ भी करते हैं वह एक बड़ी योजना के लिए काम करने जैसा होना चाहिए. 
वास्तव में यह क्या है जो कई कारकों पर निर्भर करेगा-

यदि आप एक फीचर फिल्म बना रहे हैं, तो दीर्घकालिक योजना (long term planning) यह होनी चाहिए कि स्क्रिप्ट / स्टोरीबोर्ड के लिए आवश्यक सभी शॉट्स इकट्ठा करके रखें. 
अगर आप होम वीडियो बना रहे हैं, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक संग्रह बनाने की दीर्घकालिक योजना हो सकती है l 
यदि आप एक “ऑफ” प्रोजेक्ट (जैसे कि शादी का वीडियो) बना रहे हैं, तो भी आपको शूट के लिए दीर्घावधिक निहितार्थों (long term implications) को ध्यान में रखना होगा।

योजना का मतलब है कि एक ऐसा रवैया अपनाना जिसमे नियंत्रण आपके हाथ में हो. जब आप अपना वीडियो कैमरा निकालते हैं, तो यह सोचने के बजाय कि "यह वीडियो अच्छा लगेगा" और जो भी है उसे शूट करना शुरू कर दें, उससे पहले यह सोचें कि, "मैं यह वीडियो कैसे शूट करूँ जिससे यह वीडियो अच्छा लगे” ? फिर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वीडियो शूट करना शुरू करें (जरुरत पड़े तो डायरेक्शन भी करें).

शूट की अनुमानित लंबाई (approximate length) की योजना बनाएं: 
आपको कितना फुटेज शूट करने  करने की जरूरत है, और यह आपको लेने में कितना समय लगेगा? इसकी पूरी योजना शूट शुरू करने से पहले कर लें l इससे आपको उपकरण चुनने में भी मदद मिलती है. 

उपकरण की चेकलिस्ट रखें, जिसमें यह निम्न उपकरण शामिल हो सकते हैं : 
कैमरा, ट्राईपोड,  टेप (डिजिटल कार्ड), बैटरी, माइक्रोफोन, ऑडियो उपकरण, रोशनी के उपकरण, बिजली की आपूर्ति, लॉग शीट्स और अन्य पेपर वर्क.

सम्पादित करने की योजना (Planning to Edit): 
यह महत्वपूर्ण है, यदि आपको लगता है कि यह आपके लिए लागू नहीं होता है, तो आप गलत हैं. आपके द्वारा कैप्चर किए गए सभी शॉट्स को संपादन को ध्यान में रखकर शूट किये जाने चाहिए. 
संपादित करने के दो बुनियादी तरीके हैं: पोस्ट-प्रोडक्शन और इन-कैमरा

पोस्ट-प्रोडक्शन - संपादन का मतलब है कि आपके द्वारा रिकॉर्ड किए गए शॉट को किसी संपादन उपकरण का उपयोग करके उन्हें पुन: संयोजन (जोड़ा) किया जाना । पेशेवरों का काम करने का यही तरीका है – इस तरह से काम करने में शूटिंग के दौरान जायदा आसान हो जाती है और परिणाम भी बेहतर मिलते हैं .सरल पोस्ट संपादन करने के लिए, आपको केवल कैमरा, एक वीटीआर या कार्ड रीडर और कुछ कनेक्टिंग लीड्स जैसे फायरवायर केबल, की आवश्यकता है. आप शूटिंग योजना के अंतर्गत किसी भी क्रम में अपने शॉट्स एकत्र कर सकते हैं, और जितने चाहे उतने शॉट्स शूट कर सकते हैं l संपादन के दौरान आप अवांछित शॉट्स को हटा देते हैं और अच्छे शॉट्स को जैसे चाहे जोड़ सकते हैं l यह एक समय लेने वाला कार्य हो सकता है (खासकर यदि आपको संपादन का अधिक अनुभव नहीं है) लेकिन आमतौर पर इस प्रयास से अच्छे परिणाम मिलते हैं l  

इन-कैमरा – इन कैमरा संपादन का मतलब है कि जो भी आप शूट करते हैं वही आपको मिलता है – जहाँ कोई पोस्ट प्रोडक्शन ना हो l यहाँ मुख्य बिंदु यह है कि आप अभी भी संपादन कर रहे हैं , आप अब भी यह तय कर सकते हैं की कौन सा शॉट पहले जायेगा और कौन सा बाद में बस फर्क इतना है कि ये सारे फैसले आप तब लेते हैं जब आप शूट कर रहे होते हैं बजाय पोस्ट प्रोडक्शन के. यह आसान नहीं है और ना ही ये जरुरी है की हर बार ये सही होगा. 
इसमें नियोजन, दूरदर्शिता और अनुभव की आवश्यकता है

नोट: इसके अलावा एक अन्य ऐसी स्थिति है जिसका उल्लेख किया जाना चाहिए: लाइव मल्टी-कैमरा शूट l इसमें दो या उससे अधिक कैमरे विज़न मिक्सर से जुड़े होते हैं और डायरेक्टर उस कार्यक्रम का लाइव संपादन करवाता है (इसका उदहारण है लाइव क्रिकेट मैच) l इस मामले में, आप संपादन का काम कार्यक्रम के शूट के दौरान उसके वास्तविक समय में कर सकते हैं ।

शॉट प्लान (Shot Plan):
एक बार जब आप अपने शूटिंग सत्र की योजना बना लेते हैं, तो आप व्यक्तिगत शॉट्स की योजना बनाने के लिए तैयार हो जाते हैं । सबसे पहले, हर शॉट को लेने का कोई कारण तय कीजिये । अपने आप से पूछें "मैं इस शॉट के साथ क्या हासिल करने की कोशिश कर रहा हूं”.

क्या यह शॉट आवश्यक है? क्या मैंने पहले ऐसा शॉट लिया है जो अनिवार्यतः एक जैसा है? क्या मेरे दर्शक इस विषय को पसंद करेंगे ? 

एक बार जब आपको लगता है कि शॉट प्राप्त करने के लिए आपके पास एक अच्छा कारण है, तो इसे शूट करने के सर्वोत्तम तरीके के बारे में सोचें l उसके बाद विभिन्न एंगल, फ्रेमिंग के बारे में सोचें l अच्छी रचना को मास्टर स्टेज तक पहुँचाने में समय लगता है लेकिन लगातार अभ्यास के साथ आप वहां पहुंचेंगे।

अपने आप से यह पूछें कि आप इस शॉट के माध्यम से अपने दर्शकों को क्या जानकारी देना चाहते हैं, और यह सुनिश्चित कर लें कि आप शॉट को इस तरह से कैप्चर करें जिससे दर्शक इसे समझ जाएँ । प्रत्येक शॉट को लेने से पहले पूरा समय लें, खासकर तब जब वह शॉट महत्वपूर्ण है.
यदि आवश्यक हो (और यदि आप पोस्ट प्रोडक्शन में संपादन करने वाले हैं), तो शॉट के अलग-अलग एंगल से शूट करें ताकि आप बाद में सर्वश्रेष्ठ शॉट चुन सकें।

इसके अलावा, पोस्ट संपादन के लिए, प्रत्येक शॉट की शुरुआत और अंत में कम से कम 5 सेकंड के अतिरक्त विडियो शूट करें । यह संपादन उपकरणों के लिए आवश्यक है, और यह सुरक्षा बफर के रूप में भी कार्य करता है।