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Friday, 8 September 2017

वीडियो कैमरा – वाइट बैलेंस (White Balance)

सही कलर सेट करने के लिए वाइट बैलेंस कैसे करें

वाइट बैलेंस का मूल रूप से अर्थ कलर बैलेंस ही है. यह एक ऐसा फंक्शन है जो कैमरे को "ट्रू वाइट" का संदर्भ देता है - यह कैमरे को बताता है कि सफेद रंग किस तरह दिखता है, जिसके बाद ही कैमरा इसे सही ढंग से रिकॉर्ड कर पाता है. चूंकि सफेद रंग अन्य सभी रंगों का योग है, इसलिए कैमरा को एक बार सफ़ेद रंग की पहचान हो जाए तो कैमरा बाकी सभी रंगों को सही ढंग से प्रदर्शित/रिकॉर्ड कर सकेगा.

गलत वाइट बैलेंस नारंगी या नीले रंग के चित्रों के रूप में दिखाए देते हैं, जैसा कि निम्नलिखित उदाहरणों के द्वारा दिखाया गया है: चित्र क्रमांक - 12 (a) में देखें.

चित्र क्रमांक - 12 (a)

अधिकांश उपभोक्ता स्तरीय कैमकोर्डर में "ऑटो-व्हाइट बैलेंस" सुविधा होती है, इसमें कैमरा ऑपरेटर से किसी तरह का इनपुट लिए बिना कैमरा खुद ही वाइट बैलेंस कर लेता है। वास्तव में, बहुत कम होम-वीडियो उपयोगकर्ता इसकी मौजूदगी से अवगत हैं। दुर्भाग्य से, ऑटो-व्हाइट बैलेंस विशेष रूप से विश्वसनीय नहीं है और आमतौर पर यह फ़ंक्शन मैनुअल रूप से करने पर ही बेहतर रिजल्ट देता है.

मैनुअल व्हाइट बैलेंस कब और कैसे करें
आपको प्रत्येक शूटिंग की शुरुआत में इस प्रक्रिया को करना चाहिए और साथ ही जब भी प्रकाश की स्थिति बदलती है तब भी इसको करना आवश्यक है. जब आप घर के अंदर से शूट करने के बाद बाहर शूट के लिए निकलते हैं तब भी दोबारा वाइट बैलेंस करना चाहिए साथ ही एक कमरे से दुसरे कमरे में जाते समय भी अलग-अलग प्रकार की रोशनी होती है ऐसे में भी वाइट बैलेंस करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सुबह-सुबह और देर शाम के दौरान, डेलाइट अपना रंग जल्दी-जल्दी और महत्वपूर्ण रूप से बदलता है (हालांकि आपकी आंखें ध्यान नहीं देती हैं, पर आपका कैमरा देता है)। 

इन सभी लाइट की स्थिति बदले पर नियमित रूप से वाइट बैलेंस करें-

आपको मैनुअल वाइट बैलेंस फंक्शन वाले एक कैमरा की आवश्यकता होगी जिस पर एक "वाइट बैलेंस" बटन या स्विच होना आवश्यक है.

1. अगर आपके कैमरे में फिल्टर व्हील है (या यदि आप ऐड-ऑन फिल्टर का उपयोग करते हैं), तो सुनिश्चित करें कि आप प्रकाश की स्थिति के अनुसार सही फिल्टर का उपयोग कर रहे हैं.
2. अपने कैमरे को एक शुद्ध सफेद विषय या कागज़ पर इंगित करके उस पर इस तरह ज़ूम इन करें, ताकि आपको व्यूफाइंडर में सिर्फ सफेद रंग ही दिखाई दे. इस बात पर अलग-अलग राय हो सकती है कि फ्रेम में कितना सफेद रंग होना चाहिए - लेकिन हमने पाया है कि लगभग 50-80% फ़्रेम वाइट होना भी सही है (सोनी के अनुसार फ्रेम की चौड़ाई का 80% वाइट होना सही है). विषय नॉन रेफ्लेक्टिव होना चाहिए.
3. अब एक्स्पोसर सेट करें और फिर फोकस करें.
4. वाइट बैलेंस का बटन दबाकर या स्विच उठाकर उसे सक्रिय करें। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कैमरे में कुछ सेकंड लग सकते हैं, जिसके बाद आपको व्यूफाइंडर में इसके पूरा होने का एक मेसेज (या आइकन) प्राप्त होगा.

उम्मीद है कि यह आपको बताएगा कि वाइट बैलेंस सफल हुआ है - इस मामले में, कैमरा मौजूदा कलर बैलेंस को जब तक बनाए रखेगा जब तक फिर से वाइट बैलेंस की प्रक्रिया ना की जाये या प्रकाश की स्थिति ना बदले.

यदि व्यूफाइंडर में यह संदेश आता है कि वाइट बैलेंस विफल हो गया है, तो आपको यह पता लगाना होगा कि ऐसा क्यों हुआ. इसका एक कारण "कलर टेम्परेचर का बहुत अधिक" (जिस स्थिति में फ़िल्टर बदल जाता है) होना भी हो सकता है या आईरिस में कम या अधिक करने से भी हो सकता है.

Wednesday, 26 April 2017

वीडियो कैमरा - फंक्शन (Functions)

अधिकांश घरेलू कैमकोडर (Camcorder) स्वचालित रूप से काम करते हैं. आपको बस इतना करना है कि उन्हें चालू करें, दिशा दें और रिकॉर्ड बटन दबा दें. ज्यादातर स्थितियों में यह ठीक है, लेकिन स्वचालित कैमरों में कुछ सीमाएं भी हैं. अगर आप अपने कैमरा वर्क में सुधार लाना चाहते हैं, तो आपको अपने कैमरे का नियंत्रण में रखना सीखना होगा. इसका अर्थ अधिक से अधिक मैनुअल फ़ंक्शंस (Manual functions) का उपयोग करना है। वास्तव में, पेशेवर कैमरे के पास बहुत कम स्वचालित फ़ंक्शन होते हैं, और पेशेवर कैमरा ऑपरेटर्स कभी-कभी ऑटो फोकस या ऑटो-आईरिस (Auto Iris) का उपयोग करते हैं।

ऐसे में अधिकतर लोग पूछते हैं कि "क्यों नहीं”? मेरा ऑटो फोकस ठीक काम करता है, और मेरे चित्र ठीक दिखते हैं।" इसके दो जवाब हैं:

1. यद्यपि ऑटो-फंक्शंस आमतौर पर अच्छा काम करते हैं, पर कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिसमे वे सही परिणाम नहीं दे पाते हैं.
2. आपका कैमरा नहीं जान सकता कि आप क्या चाहते हैं सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए या एक कोई विशेष इफ़ेक्ट दिखाने के लिए अक्सर ऑटो फंक्शन की जगह मैनुअल फंक्शन पर काम करना आवश्यक होता है.

जैसे-जैसे आप कैमरे के फंक्शन के बारे में और अधिक जानेंगे वैसे-वैसे आप मैनुअल फ़ंक्शंस के बेहतर परिणाम की सराहना करना शुरू कर देंगे. 
सबसे जायदा उपयोग होने वाले कैमरा फंक्शन को निचे संक्षेप में समझाया गया है (इसका पूरा विवरण आगे के पोस्ट में दिया गया है) –

               
                                                      चित्र क्रमांक - 4(a)                                        
                                                                       प्रोफेशनल कैमकोडर (Professional Camcorder)                                                              
    
                           चित्र क्रमांक - 4(b) 
                                                                 उपभोक्ता स्तरीय कैमकोडर  (Consumer Level Camcorder)                                                                       
ज़ूम (Zoom) – यह वह फ़ंक्शन है, जो विषय को आपके दृष्टिकोण के करीब ले आता है, या उससे दूर ले जाता है। यह बिलकुल कैमरे को विषय के करीब या अधिक दूर ले जाने के समान है. पेशेवर कैमरे में आमतौर पर मैनुअल फोकस रिंग लेंस के सामने  होती है (दृश्य 4(a) में देखें)

ध्यान दें कि जब ज़ूम इन करते हैं, उस दौरान तब चित्र (फ्रेम-Frame) को स्थिर रखना अधिक कठिन होता है. ऐसे में आप कैमरे को विषय के करीब ले जा सकते हैं और फिर ज़ूम आउट कर सकते हैं जिससे फ्रेमिंग वही रहेगी. लंबे ज़ूम के लिए आपको ट्राईपोड का उपयोग करना चाहिए. 

ज़ूमिंग फ़ंक्शन से हर कोई प्यार करता है यह आसान है और आप इसके साथ बहुत कुछ कर सकते हैं, यही कारण है कि यह इतना अधिक उपयोग किया जाता है. पर हम आपको यही कहेंगे कि, ज़ूम का उपयोग कम से कम करें. यह मॉडरेशन में अच्छी तरह से काम करता है लेकिन दर्शकों के लिए बहुत अधिक ज़ूमिंग बोरिंग हो जाता है। 

फोकस (Focus) - ऑटो फ़ोकस सिर्फ नौसिखियों के लिए है. फोटोग्राफी को छोड़कर, एक प्रोफेशनल वीडियो कैमरा ऑपरेटर की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑटो फोकस बिलकुल सही नहीं है. बहुत से लोगों को मैनुअल फोकस मुश्किल लगता है, लेकिन यदि आप अच्छा कैमरावर्क सीखना चाहते हैं, तो फ़ोकस नियंत्रण आवश्यक है। 
पेशेवर कैमरे में आमतौर पर मैनुअल फोकस रिंग लेंस के सामने  होती है (दृश्य 4(a) में देखें)। करीब फ़ोकस के लिए रिंग को घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएं और दूर के फोकस के लिए घडी की विपरीत दिशा (anti-clockwise)  में घुमाएँ. सबसे अच्छा फोकस प्राप्त करने के लिए, जिस विषय को आप शूट करना चाहते हैं जितना करीब हो सके उस विषय को ज़ूम इन करें और फोकस रिंग को जब तक एडजस्ट करें जब तक विषय पूरा फोकस में नहीं आ जाता और फिर अपने फ्रेम पर वापस ज़ूम आउट करें.

आईरिस (Iris) – यह एक तरह से कैमरे के लेंस पर लगा एक दरवाज़ा है (aperture) जिससे कितनी संख्या में प्रकाश (amount of light) अन्दर आएगा यह तय होता है (इसको exposure भी कहते हैं). आप इसको जितना जायदा खोलेंगे तस्वीर उतनी जायदा उज्जवल (brighter) होगी.

कैमरे में आईरिस रिंग लेंस हुड पर होती है (चित्र क्रमांक - 4(c) में देखें) जिसे बंद करने के लिए उसे घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएँ और खोलने के लिए घडी की विपरीत दिशा (anti-clockwise)  में घुमाएँ. उपभोक्ता स्तर के कैमरे में आमतौर पर डायल या बटन का एक सेट उपयोग में लाया जाता है. आईरिस को नियंत्रण में रखने के लिए रूल ऑफ़ थम्ब (rule of thumb) है – मुख्य विषय को ध्यान में रखकर अपना  एक्सपोज़र सेट करें. इससे तस्वीर के बाकी भाग कुछ उज्जवल या डार्क हो सकते हैं पर इससे विषय बिलकुल साफ़ दिखाई देगा. 


चित्र क्रमांक - 4(c)

वाइट बैलेंस (White Balance) – वाइट बैलेंस का मतलब कलर संतुलन (color balance) से है. यह एक ऐसा फंक्शन है जो कैमरा को सफ़ेद रंग की पहचान कराके बाकी सभी रंगों की सही जानकारी देता है. क्योंकि अगर कैमरे को यह पता चल गया की सफ़ेद रंग क्या होता है तो वह बाकी रंगों की भी सही पहचान कर सकता है.

यह फ़ंक्शन आमतौर पर उपभोक्ता स्तरीय कैमरों में स्वचालित रूप से काम करता है जबकि कई बार ऑपरेटर को इसके अस्तित्व के बारे में जानकारी भी नहीं होती. यह ज्यादातर स्थितियों में अच्छी तरह से काम करता है, पर कुछ परिस्थितियों में ऑटो वाइट बैलेंस सही काम नहीं कर पाता. इन स्थितियों में रंग गलत या अप्राकृतिक लगेंगे.

वाइट बैलेंस करने के लिए, कैमरे को (उसी लाइटिंग में जिस लाइटिंग में शूट करना है) एक सफ़ेद कागज (नॉन रीफलेक्टिव) पर केन्द्रित (फुल ज़ूम-इन) करके फ्रेम बनायें. अब एक्सपोज़र और फोकस सेट करें उसके बाद वाइट बैलेंस के बटन को दबाएँ. व्यूफाइंडर में सूचक होता है जो आपको बताता है कि वाइट बैलेंस पूरा हो गया है. वाइट बैलेंस को नियमित रूप से करना चाहिए, खासकर तब जब प्रकाश की स्थिति (Lighting condition) में परिवर्तन होता है (जैसे इंडोर से आउटडोर में शूट करने जाते हैं)

ऑडियो (Audio) – वैसे सभी उपभोक्ता स्तरीय कैमरे में माइक्रोफोन पहले से होता है, आमतौर पर यह सही काम करता है और यह जनरल रिकॉर्डिंग करने के लिए अच्छा होता है. 
पर वास्तव में बेहतर ऑडियो परिणाम पाना थोडा मुश्किल विषय है या यह कहें ये अपने आप में एक सम्पूर्ण विषय है. हम इसमें बहुत कुछ नहीं करेंगे – बस आपको यह जानना जरुरी है कि ऑडियो बहुत महत्वपूर्ण है और इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।  

यदि आप अच्छे ऑडियो परिणाम चाहते हैं, तो अपने कैमरे के "माइक्रो इनपुट" सॉकेट में एक बाहरी माइक्रोफ़ोन को प्लग करने का प्रयास करें (यदि इसमें ये है तो)। ऐसा करने के आपको पास दो कारण हैं:

1. आप एक एसा माइक उपयोग कर सकते हैं जो कैमरे के अंतर्निहित माइक (Internal Mic) की तुलना में आप के काम के प्रकार के लिए अधिक अनुकूल है.
2. आपको परिस्थिति और कैमरे एंगल के अनुसार अलग-अलग जगह पर माइक की आवश्यकता हो सकती है. उदाहरण के लिए, जब हम एक भाषण को कवर करते हैं, तो माइक हमें एक लंबी ऑडियो लीड के साथ पोडियम के ऊपर या आस पास चाहिए हो सकता है.

जिस स्तर (Audio Level) पर आपका ऑडियो रिकॉर्ड हुआ है वह महत्वपूर्ण है। अधिकांश कैमरों में "ऑटो-गेन कंट्रोल" होता है, जो स्वचालित रूप से ऑडियो स्तर को समायोजित (adjust) करता है. उपभोक्ता स्तर के कैमरों में यह आमतौर पर इसी तरह से सेट होता है, और यह अधिकांश स्थितियों में अच्छी तरह से काम करता है. पर अगर आपके पास मैन्युअल ऑडियो लेवल नियंत्रण का विकल्प है, तो इसका उपयोग करना बेहतर होगा. 

अगर हो सके तो बैकग्राउंड (एम्बिएंट – Ambient) को कम या जायदा पर रिकॉर्ड करें, इससे प्रोडक्शन के कार्य में लचीलापन आता है और कभी कभी कुछ शॉट्स के बाद अचानक एम्बिएंट साउंड की आवश्यकता एक इफ़ेक्ट के रूप में पड़ सकती है. 

लोग क्या कह रहे हैं, इसे सुनें और फिर वीडियो बनाएं। किसी को बात करते-करते में शॉट्स शुरू करने और खत्म करने की कोशिश न करें - वीडियो पूरा होने के बाद अगर ऑडियो कटा हुए मिले तो इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता है.

शूटिंग करते समय बैकग्राउंड संगीत का बहुत सावधान रखें - इसका परिणाम यह हो सकता है की जब-जब  शॉट बदलेगा बैकग्राउंड म्यूजिक भी बदलेगा, वो बिलकुल ऐसा लगेगा जैसे कि हम कोई खराब रिकॉर्डिंग को सुन रहे हों.

एक और बात ... हवा के शोर (wind noise) से सावधान रहें यहां तक कि थोड़ी सी भी हवा आपके ऑडियो को बर्बाद कर सकती है. कई कैमरों में "लो-कट फिल्टर" होता है, जिसे कभी-कभी "एयर नॉइज़ फिल्टर" या कुछ इसी तरह के रूप में संदर्भित किया जाता है. ये मदद करते हैं, लेकिन हवा के शोर को रोकना ही बेहतर समाधान है जिसके लिए आप किसी विंडस्क्रीन का उपयोग कर सकते हैं, या खुद इस तरह की कोई चीज़ बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

शटर (Shutter) - शुरुआती स्तर पर आपको वास्तव में शटर का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसका उल्लेख जरुरी है। इसमें कई अनुप्रयोग (Applications) हैं, जिसका उपयोग विशेष रूप से खेल या फास्ट-एक्शन फुटेज के लिए होता है. इसका मुख्य लाभ यह है कि तेज फ्रेम अच्छे में भी मोशन साफ़ दिखाई पड़ते हैं (जो स्लो मोशन रीपलेस -Replays के लिए जरुरी है). 

शटर का उपयोग एक्सपोज़र को नियंत्रण करने के लिए भी किया जा सकता है. जब तक आपको यह ना पता हो कि शटर प्रभावी ढंग से कैसे उपयोग करें, उसे बंद रखें.

इफेक्ट्स (Effects) - कई उपभोक्ता कैमरों में पहले से डिजिटल इफेक्ट्स चयन करने का विकल्प होते हैं जैसे डिजिटल, मिक्सिंग, स्ट्रोब, आदि.

वीडियो में इतनी सारी चीजें होती हैं जिसे समझना मुश्किल होता है ऐसे में  मॉडरेशन कुंजी है: यदि आपके पास उचित कारण है, तो इसका उपयोग करें, वरना ना करें.

आपको यहाँ यह पता होना चाहिए की कैमरे से किये गये लगभग सभी इफ़ेक्ट, एडिटिंग सॉफ्टवेयर में बेहतर तरीके से किये जा सकते हैं इसलिए हो सके तो हमेशा अपने फुटेज को "शुष्क" यानि (बिना इफ़ेक्ट) के शूट करें और बाद में इफ़ेक्ट जोड़ें.

Friday, 21 April 2017

वीडियो कैमरा: शब्दावली (Terminology)

शॉट (Shot): सभी वीडियो अलग-अलग प्रकार के शॉट्स से बने होते हैं. एक शॉट मूल रूप से तब होता है जब आप कैमरे पर रिकॉर्डिंग बटन दबाते हैं और जब उस रिकॉर्डिंग को रोकते हैं यह एक शॉट कहलाता है. ये बिलकुल वैसा है जैसे हम एक फोटो एलबम बनाने के लिए कई व्यक्तिगत तस्वीरों को इकठ्ठा करते हैं, इसी तरह शॉट्स भी एक वीडियो बनाने के लिए इकट्ठा किये जाते हैं ।

फ्रेमिंग और रचना (Framing & Composition): फ्रेम वह तस्वीर है जिसे आप व्यूफाइंडर पर (या मॉनिटर पर) देखते हैं। और संरचना (कम्पोजीशन) वह है जो एक तस्वीर फ्रेम के अंदर जो कुछ भी दिखता है उन सब विषयवस्तु के लेआउट को संदर्भित करता है - विषय क्या है, वह फ्रेम में कहाँ है, वह किस तरफ देख रहा है, पृष्ठभूमि (background), फॉरग्राउंड (foreground), प्रकाश (Lighting) आदि।

जब आप एक शॉट की फ्रेमिंग करते हैं, तो आप कैमरे की स्थिति और ज़ूम लेंस को समायोजित करते हैं, जब तक कि आपके शॉट में वांछित संरचना (desired composition) नहीं होती है।

वीडियो उद्योग में नियमों का एक सामान्य सेट है, जो बताता है कि विभिन्न प्रकार के कैमरा शॉट्स को कैसे फ़्रेम करें, जैसे नीचे दिए गए सचित्र में दिखाया गया है -

   
क्लोज अप शॉट CU (Closeup Shot)
विषय की एक विशेषता दर्शाता है
चित्र क्रमांक - 2(a) (P.C.- CM Gurjar)

वाइड शॉट WS (Wide Shot)
पुरे विषय को दिखता है
चित्र क्रमांक - 2(b)  (P.C.- CM Gurjar)
वैरी वाइड शॉट VWS (Very Wide shot)
  विषय के वातावरण को दिखता है
चित्र क्रमांक - 2(c)  (P.C.- CM Gurjar)
ट्रांजीशन (Transition): एक बड़ी कहानी को बताने के लिए एक सीक्वेंस में शॉट्स को जोड़ा (संपादित) जाता है । जिस तरह से किसी भी दो शॉट्स को एक साथ जोड़ जाता है, इसे ट्रांजीशन कहते हैं. आम तौर पर इसे कट (cut) ट्रांजीशन कहते हैं, जिसमें एक शॉट के तुरंत बाद दूसरा शॉट बदलता है. अधिक जटिल ट्रांजीशन में मिश्रण (mixing), वाइप (wipes), डीसोल्व (dissolve), फेड (fade) और डिजिटल इफ़ेक्ट (digital effects) शामिल हैं। एक मूविंग शॉट (जैसे पैन शॉट) को एक ट्रांजीशन के रूप में भी माना जा सकता है जिसमे एक शॉट से नए शॉट पर जाते हैं। कैमरा वर्क के काम में ट्रांजीशन बहुत महत्वपूर्ण है, आपको इस दौरान इसके बारे में लगातार सोचने की ज़रूरत है कि प्रत्येक शॉट अगले शॉट के पहले या उसके बाद में कैसे फिट होगा।
जायदा जानकारी के लिए विडियो ट्रांजीशन पर क्लिक करें.

इसके अलावा कुछ जरुरी शब्दावली हैं जिसके बारे में आगे पूरी जानकारी दी जाएगी :

पैन (PAN): दायें से बाएं और बाएं से दायें कैमरा घुमाना.

टिल्ट (TILT): ऊपर और नीचे कैमरा घुमाना.

ज़ूम (ZOOM):
इन-एंड-आउट कैमरा घुमाना (यानी करीब और दूर.

आईरिस (एक्सपोजर):
आईरिस वह होता है जो कैमरे में प्रकाश को प्रवेश देता है.

Iris (Exposure): जायदा आईरिस का मतलब जायदा प्रकाश और उज्जवल तस्वीर.

वाइट बैलेंस (White Balance) : व्हाइट बैलेंस करना यानी कि सबसे पहले आप कैमरा को बताते हैं कि एक्चुअल व्हाइट क्या है और फिर आपका कैमरा बाक़ी सारे एडस्टमेंट ख़ुद ही कर लेता है.

शटर (Shutter): शटर का उपयोग स्टील कैमरा में होता है.

ऑडियो (Audio):
ध्वनि जो विडियो के साथ जाने के लिए दर्ज की जाती है.