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Wednesday, 16 August 2017

वीडियो कैमरा – आईरिस (Iris)

सही एक्सपोजर सेट करने के लिए मैनुअल आईरिस का उपयोग कैसे करें

आईरिस (Iris) : आईरिस को हम एक ऐसे दरवाजे (Adjustable Aperture) के रूप में समझ सकते हैं , जो लेंस के माध्यम से कैमरा के अन्दर आने वाली रोशनी की मात्रा को नियंत्रित करता है (जिसको हम एक्सपोज़र (Exposure) भी कहते हैं). 

वीडियो कैमरा का आईरिस मूल रूप से एक फोटो कैमरा के आईरिस के समान काम करता है – जिसमे आप जितना आईरिस खोलते हैं उतना अधिक प्रकाश आता है और तस्वीर उज्ज्वल (Brighter) दिखती है अंतर यह है कि वीडियो कैमरे में जैसे-जैसे आईरिस को बदलेंगे वैसे-वैसे व्यूफाइंडर में तस्वीर की चमक (Brightness) बदलेगी. 

1. व्यावसायिक कैमरे में आईरिस रिंग लेंस हुड पर होता है, जिसको बंद करने के लिये घड़ी की दिशा में घुमाएँ और खोलने के लिये घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाएं. चित्र क्रमांक - 9(a) में देखें.
2. उपभोक्ता स्तर के कैमरे आमतौर पर डायल या बटन का एक सेट का उपयोग करते हैं आपको मेनू से मैनुअल आईरिस का चयन करना होगा (विवरण के लिए मैनुअल देखें).

चित्र क्रमांक - 9(a) 

सही एक्सपोज़र क्या है ?

अपने मैनुअल आईरिस का उपयोग करने से पहले, आपको यह जानना होगा कि आपके व्यूफ़ाइंडर में सही एक्सपोजर कैसा दिखता है (ध्यान दें: अगर आपके कैमरे में व्यूफ़ाइंडर सेटिंग्स को एडजस्ट करने का विकल्प है, तो आपको पहले यह करना होगा). एक अच्छी शुरूआत के लिये अपने कैमरे को ऑटो-आईरिस पर सेट करें फिर इवन लाइटिंग में शॉट को फ्रेम करें. अब ध्यान दें की आईरिस में तस्वीर कितनी उज्ज्वल है, फिर मैनुअल पर आईरिस को सेट करें। अधिकांश कैमरे ऑटो-फ़ंक्शन द्वारा निर्धारित उसी एक्सपोजर को बनाए रखेंगे.

हमेशा अपने आईरिस को सेट करें ताकि विषय ठीक से उजागर हो। इसका मतलब यह है कि चित्र में विषय को छोड़कर अन्य भाग में बहुत उजाला या बहुत अंधेरा हो सकता है, लेकिन विषय आम तौर पर अधिक महत्वपूर्ण है वो बिलकुल सही दिखना चाहिए.

व्यावसायिक कैमरों में एक अतिरिक्त सुविधा होती है जिसे ज़ेबरा स्ट्राईब्स (Zebra Stribes) कहा जाता है जो आपको ओवर एक्सपोज़र बताने में सहायता कर सकता है. इसके अलावा एन.डी. फ़िल्टर (Natural Density - ND Filter) से भी अधिक एक्सपोज़र का नियंत्रित किया जा सकता है. चित्र क्रमांक - 9(b) में देखें.


चित्र क्रमांक - 9(b)


एक्सपोज़र सही करने का एकमात्र तरीका अभ्यास है विभिन्न प्रकाश की स्थितियों में शॉट रिकॉर्ड करें, फिर उन शॉट्स को दोबारा चला के देखें तब पता चलेगा की शॉट में एक्सपोज़र सही है या नहीं । याद रखें, अगर आप मैनुअल आईरिस पर काम कर रहे हैं और आप एक्सपोज़र के बारे में निश्चित नहीं हैं, तो ऑटो आईरिस पर फ्लिक करें और देखें कि कैमरा क्या सोचता है, फिर मैनुअल आईरिस पर वापस जाएं। ऐसा करने से धीरे-धीरे आप मैनुअल आईरिस पर अधिक विश्वास करने लग जायेंगे.

Wednesday, 26 April 2017

वीडियो कैमरा - फंक्शन (Functions)

अधिकांश घरेलू कैमकोडर (Camcorder) स्वचालित रूप से काम करते हैं. आपको बस इतना करना है कि उन्हें चालू करें, दिशा दें और रिकॉर्ड बटन दबा दें. ज्यादातर स्थितियों में यह ठीक है, लेकिन स्वचालित कैमरों में कुछ सीमाएं भी हैं. अगर आप अपने कैमरा वर्क में सुधार लाना चाहते हैं, तो आपको अपने कैमरे का नियंत्रण में रखना सीखना होगा. इसका अर्थ अधिक से अधिक मैनुअल फ़ंक्शंस (Manual functions) का उपयोग करना है। वास्तव में, पेशेवर कैमरे के पास बहुत कम स्वचालित फ़ंक्शन होते हैं, और पेशेवर कैमरा ऑपरेटर्स कभी-कभी ऑटो फोकस या ऑटो-आईरिस (Auto Iris) का उपयोग करते हैं।

ऐसे में अधिकतर लोग पूछते हैं कि "क्यों नहीं”? मेरा ऑटो फोकस ठीक काम करता है, और मेरे चित्र ठीक दिखते हैं।" इसके दो जवाब हैं:

1. यद्यपि ऑटो-फंक्शंस आमतौर पर अच्छा काम करते हैं, पर कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिसमे वे सही परिणाम नहीं दे पाते हैं.
2. आपका कैमरा नहीं जान सकता कि आप क्या चाहते हैं सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए या एक कोई विशेष इफ़ेक्ट दिखाने के लिए अक्सर ऑटो फंक्शन की जगह मैनुअल फंक्शन पर काम करना आवश्यक होता है.

जैसे-जैसे आप कैमरे के फंक्शन के बारे में और अधिक जानेंगे वैसे-वैसे आप मैनुअल फ़ंक्शंस के बेहतर परिणाम की सराहना करना शुरू कर देंगे. 
सबसे जायदा उपयोग होने वाले कैमरा फंक्शन को निचे संक्षेप में समझाया गया है (इसका पूरा विवरण आगे के पोस्ट में दिया गया है) –

               
                                                      चित्र क्रमांक - 4(a)                                        
                                                                       प्रोफेशनल कैमकोडर (Professional Camcorder)                                                              
    
                           चित्र क्रमांक - 4(b) 
                                                                 उपभोक्ता स्तरीय कैमकोडर  (Consumer Level Camcorder)                                                                       
ज़ूम (Zoom) – यह वह फ़ंक्शन है, जो विषय को आपके दृष्टिकोण के करीब ले आता है, या उससे दूर ले जाता है। यह बिलकुल कैमरे को विषय के करीब या अधिक दूर ले जाने के समान है. पेशेवर कैमरे में आमतौर पर मैनुअल फोकस रिंग लेंस के सामने  होती है (दृश्य 4(a) में देखें)

ध्यान दें कि जब ज़ूम इन करते हैं, उस दौरान तब चित्र (फ्रेम-Frame) को स्थिर रखना अधिक कठिन होता है. ऐसे में आप कैमरे को विषय के करीब ले जा सकते हैं और फिर ज़ूम आउट कर सकते हैं जिससे फ्रेमिंग वही रहेगी. लंबे ज़ूम के लिए आपको ट्राईपोड का उपयोग करना चाहिए. 

ज़ूमिंग फ़ंक्शन से हर कोई प्यार करता है यह आसान है और आप इसके साथ बहुत कुछ कर सकते हैं, यही कारण है कि यह इतना अधिक उपयोग किया जाता है. पर हम आपको यही कहेंगे कि, ज़ूम का उपयोग कम से कम करें. यह मॉडरेशन में अच्छी तरह से काम करता है लेकिन दर्शकों के लिए बहुत अधिक ज़ूमिंग बोरिंग हो जाता है। 

फोकस (Focus) - ऑटो फ़ोकस सिर्फ नौसिखियों के लिए है. फोटोग्राफी को छोड़कर, एक प्रोफेशनल वीडियो कैमरा ऑपरेटर की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑटो फोकस बिलकुल सही नहीं है. बहुत से लोगों को मैनुअल फोकस मुश्किल लगता है, लेकिन यदि आप अच्छा कैमरावर्क सीखना चाहते हैं, तो फ़ोकस नियंत्रण आवश्यक है। 
पेशेवर कैमरे में आमतौर पर मैनुअल फोकस रिंग लेंस के सामने  होती है (दृश्य 4(a) में देखें)। करीब फ़ोकस के लिए रिंग को घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएं और दूर के फोकस के लिए घडी की विपरीत दिशा (anti-clockwise)  में घुमाएँ. सबसे अच्छा फोकस प्राप्त करने के लिए, जिस विषय को आप शूट करना चाहते हैं जितना करीब हो सके उस विषय को ज़ूम इन करें और फोकस रिंग को जब तक एडजस्ट करें जब तक विषय पूरा फोकस में नहीं आ जाता और फिर अपने फ्रेम पर वापस ज़ूम आउट करें.

आईरिस (Iris) – यह एक तरह से कैमरे के लेंस पर लगा एक दरवाज़ा है (aperture) जिससे कितनी संख्या में प्रकाश (amount of light) अन्दर आएगा यह तय होता है (इसको exposure भी कहते हैं). आप इसको जितना जायदा खोलेंगे तस्वीर उतनी जायदा उज्जवल (brighter) होगी.

कैमरे में आईरिस रिंग लेंस हुड पर होती है (चित्र क्रमांक - 4(c) में देखें) जिसे बंद करने के लिए उसे घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएँ और खोलने के लिए घडी की विपरीत दिशा (anti-clockwise)  में घुमाएँ. उपभोक्ता स्तर के कैमरे में आमतौर पर डायल या बटन का एक सेट उपयोग में लाया जाता है. आईरिस को नियंत्रण में रखने के लिए रूल ऑफ़ थम्ब (rule of thumb) है – मुख्य विषय को ध्यान में रखकर अपना  एक्सपोज़र सेट करें. इससे तस्वीर के बाकी भाग कुछ उज्जवल या डार्क हो सकते हैं पर इससे विषय बिलकुल साफ़ दिखाई देगा. 


चित्र क्रमांक - 4(c)

वाइट बैलेंस (White Balance) – वाइट बैलेंस का मतलब कलर संतुलन (color balance) से है. यह एक ऐसा फंक्शन है जो कैमरा को सफ़ेद रंग की पहचान कराके बाकी सभी रंगों की सही जानकारी देता है. क्योंकि अगर कैमरे को यह पता चल गया की सफ़ेद रंग क्या होता है तो वह बाकी रंगों की भी सही पहचान कर सकता है.

यह फ़ंक्शन आमतौर पर उपभोक्ता स्तरीय कैमरों में स्वचालित रूप से काम करता है जबकि कई बार ऑपरेटर को इसके अस्तित्व के बारे में जानकारी भी नहीं होती. यह ज्यादातर स्थितियों में अच्छी तरह से काम करता है, पर कुछ परिस्थितियों में ऑटो वाइट बैलेंस सही काम नहीं कर पाता. इन स्थितियों में रंग गलत या अप्राकृतिक लगेंगे.

वाइट बैलेंस करने के लिए, कैमरे को (उसी लाइटिंग में जिस लाइटिंग में शूट करना है) एक सफ़ेद कागज (नॉन रीफलेक्टिव) पर केन्द्रित (फुल ज़ूम-इन) करके फ्रेम बनायें. अब एक्सपोज़र और फोकस सेट करें उसके बाद वाइट बैलेंस के बटन को दबाएँ. व्यूफाइंडर में सूचक होता है जो आपको बताता है कि वाइट बैलेंस पूरा हो गया है. वाइट बैलेंस को नियमित रूप से करना चाहिए, खासकर तब जब प्रकाश की स्थिति (Lighting condition) में परिवर्तन होता है (जैसे इंडोर से आउटडोर में शूट करने जाते हैं)

ऑडियो (Audio) – वैसे सभी उपभोक्ता स्तरीय कैमरे में माइक्रोफोन पहले से होता है, आमतौर पर यह सही काम करता है और यह जनरल रिकॉर्डिंग करने के लिए अच्छा होता है. 
पर वास्तव में बेहतर ऑडियो परिणाम पाना थोडा मुश्किल विषय है या यह कहें ये अपने आप में एक सम्पूर्ण विषय है. हम इसमें बहुत कुछ नहीं करेंगे – बस आपको यह जानना जरुरी है कि ऑडियो बहुत महत्वपूर्ण है और इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।  

यदि आप अच्छे ऑडियो परिणाम चाहते हैं, तो अपने कैमरे के "माइक्रो इनपुट" सॉकेट में एक बाहरी माइक्रोफ़ोन को प्लग करने का प्रयास करें (यदि इसमें ये है तो)। ऐसा करने के आपको पास दो कारण हैं:

1. आप एक एसा माइक उपयोग कर सकते हैं जो कैमरे के अंतर्निहित माइक (Internal Mic) की तुलना में आप के काम के प्रकार के लिए अधिक अनुकूल है.
2. आपको परिस्थिति और कैमरे एंगल के अनुसार अलग-अलग जगह पर माइक की आवश्यकता हो सकती है. उदाहरण के लिए, जब हम एक भाषण को कवर करते हैं, तो माइक हमें एक लंबी ऑडियो लीड के साथ पोडियम के ऊपर या आस पास चाहिए हो सकता है.

जिस स्तर (Audio Level) पर आपका ऑडियो रिकॉर्ड हुआ है वह महत्वपूर्ण है। अधिकांश कैमरों में "ऑटो-गेन कंट्रोल" होता है, जो स्वचालित रूप से ऑडियो स्तर को समायोजित (adjust) करता है. उपभोक्ता स्तर के कैमरों में यह आमतौर पर इसी तरह से सेट होता है, और यह अधिकांश स्थितियों में अच्छी तरह से काम करता है. पर अगर आपके पास मैन्युअल ऑडियो लेवल नियंत्रण का विकल्प है, तो इसका उपयोग करना बेहतर होगा. 

अगर हो सके तो बैकग्राउंड (एम्बिएंट – Ambient) को कम या जायदा पर रिकॉर्ड करें, इससे प्रोडक्शन के कार्य में लचीलापन आता है और कभी कभी कुछ शॉट्स के बाद अचानक एम्बिएंट साउंड की आवश्यकता एक इफ़ेक्ट के रूप में पड़ सकती है. 

लोग क्या कह रहे हैं, इसे सुनें और फिर वीडियो बनाएं। किसी को बात करते-करते में शॉट्स शुरू करने और खत्म करने की कोशिश न करें - वीडियो पूरा होने के बाद अगर ऑडियो कटा हुए मिले तो इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता है.

शूटिंग करते समय बैकग्राउंड संगीत का बहुत सावधान रखें - इसका परिणाम यह हो सकता है की जब-जब  शॉट बदलेगा बैकग्राउंड म्यूजिक भी बदलेगा, वो बिलकुल ऐसा लगेगा जैसे कि हम कोई खराब रिकॉर्डिंग को सुन रहे हों.

एक और बात ... हवा के शोर (wind noise) से सावधान रहें यहां तक कि थोड़ी सी भी हवा आपके ऑडियो को बर्बाद कर सकती है. कई कैमरों में "लो-कट फिल्टर" होता है, जिसे कभी-कभी "एयर नॉइज़ फिल्टर" या कुछ इसी तरह के रूप में संदर्भित किया जाता है. ये मदद करते हैं, लेकिन हवा के शोर को रोकना ही बेहतर समाधान है जिसके लिए आप किसी विंडस्क्रीन का उपयोग कर सकते हैं, या खुद इस तरह की कोई चीज़ बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

शटर (Shutter) - शुरुआती स्तर पर आपको वास्तव में शटर का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसका उल्लेख जरुरी है। इसमें कई अनुप्रयोग (Applications) हैं, जिसका उपयोग विशेष रूप से खेल या फास्ट-एक्शन फुटेज के लिए होता है. इसका मुख्य लाभ यह है कि तेज फ्रेम अच्छे में भी मोशन साफ़ दिखाई पड़ते हैं (जो स्लो मोशन रीपलेस -Replays के लिए जरुरी है). 

शटर का उपयोग एक्सपोज़र को नियंत्रण करने के लिए भी किया जा सकता है. जब तक आपको यह ना पता हो कि शटर प्रभावी ढंग से कैसे उपयोग करें, उसे बंद रखें.

इफेक्ट्स (Effects) - कई उपभोक्ता कैमरों में पहले से डिजिटल इफेक्ट्स चयन करने का विकल्प होते हैं जैसे डिजिटल, मिक्सिंग, स्ट्रोब, आदि.

वीडियो में इतनी सारी चीजें होती हैं जिसे समझना मुश्किल होता है ऐसे में  मॉडरेशन कुंजी है: यदि आपके पास उचित कारण है, तो इसका उपयोग करें, वरना ना करें.

आपको यहाँ यह पता होना चाहिए की कैमरे से किये गये लगभग सभी इफ़ेक्ट, एडिटिंग सॉफ्टवेयर में बेहतर तरीके से किये जा सकते हैं इसलिए हो सके तो हमेशा अपने फुटेज को "शुष्क" यानि (बिना इफ़ेक्ट) के शूट करें और बाद में इफ़ेक्ट जोड़ें.