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Wednesday, 17 October 2018

वीडियो एडिटिंग: सिद्धांत (Principles)

वीडियो संपादन के बेसिक सिद्धांत 

वीडियो एडिटिंग वीडियो फुटेज को संपादित करने की प्रक्रिया है जिसमे विशेष प्रभाव जोड़ना, टेक्स्ट को जोड़ना, ध्वनि रिकॉर्डिंग जोड़ना इत्यादि शामिल हैं । यदि वीडियो संपादन मौजूद नहीं होता तो इसका मतलब यह होता कि किसी भी गलती के बिना, सही क्रम में, सबकुछ लाइव करने की आवश्यकता होती जो कि आज के आधुनिक युग में असंभव है । पिछले कई वर्षों में वीडियो संपादन बहुत बदल गया है क्योंकि टेक्नोलॉजी बदल गई है और जिसमे समग्र रूप से सुधार हुआ है, लेकिन आज भी संपादन के सिद्धांत बहुत समान हैं।

वीडियो एडिटिंग में कुछ सिद्धांत या नियम होते हैं जिससे दर्शकों को कहानी को बेहतर तरह से समझाने में मदद मिलती है. प्रत्येक तकनीक दर्शकों से एक विशिष्ट प्रतिक्रिया बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है. 
कुछ बेसिक सिद्धांत इस प्रकार हैं - 

1. निरंतरता (Continuity) – 
यह घटनाओं की निरंतरता में शॉट्स के अनुक्रम की व्यवस्था करने के लिए संदर्भित करता है. 
(This refers to arranging the sequence of shots into a progression of events.)

Continuity का एडिटिंग में मतलब एडिटिंग नियमों का पालन करते हुए वीडियो पर इस तरह से कट लगाना है जिससे वीडियो की निरंतरता और स्पष्टता बनी रहे । इसका उपयोग टेलीविजन और फिल्म दोनों में बहुत अधिक होता है, क्योंकि यह कहानी को सही क्रम से आगे बढाने में मदद करता है जिससे कहानी को समझना आसान हो जाता है। इसका उपयोग नहीं करने से कई बार भ्रम पैदा हो सकता है। कंटीनुइटी कई प्रकार की होती है जिसमे मुख्य होती है –

a. कंटीनुइटी ऑफ़ इनफार्मेशन 

b. कंटीनुइटी ऑफ़ शॉट्स 

c. कंटीनुइटी ऑफ़ मूवमेंट और एक्शन 

d. कंटीनुइटी ऑफ़ कलर 

e. कंटीनुइटी ऑफ़ साउंड 

जायदा जानकारी के लिए निचे दिये गए लिंक पर क्लिक कर वीडियो देख सकते हैं .
https://www.youtube.com/watch?v=U6B4COAnizc

2. रूल ऑफ़ 180 और 30 डिग्री (Rule of 180 and 30 degree) – 

180 डिग्री नियम एक मूल दिशानिर्देश है, जो एक ही दृश्य में दो पात्रों या तत्वों को एक-दूसरे के साथ हमेशा एक ही बाएं / दाएं रिश्ते का बनाये रखता है । इसमें शॉट्स इस प्रकार होने चाहिए जिससे दोनो पात्र एक दुसरे को देख कर बात कर रहे हैं या एक दुसरे के विपरीत खड़े हैं यह स्पष्ट समझ आना चाहिए. इसलिए प्रोडक्शन जितने भी कैमरा उपयोग हो रहे हैं वह इमेजिनरी लाइन (180 डिग्री पर बनाई हुई लाइन) के एक तरफ ही रहेंगे. यदि कैमरा दो विषयों को जोड़ने वाली इमेजिनरी एक्सिस से गुजरता है तो विपरीत तरफ से दिखाया जाएगा और इसलिए रिवर्स एंगल में दिखाया जाएगा। दर्शक पात्रों की स्थिति से भ्रमित न हों इसलिए कैमरा इस लाइन को पार नहीं करता है। (चित्र क्रमांक - 20(a) देखें)

चित्र क्रमांक - 20(a)

30-डिग्री नियम एक मूल फिल्म संपादन दिशानिर्देश है जिसमें कहा गया है कि एक ही विषय के दो लगातार शॉट के बीच के कैमरा एंगल में कम से कम 30 डिग्री का अंतर होना चाहिए. यदि कैमरा एंगल 30 डिग्री से कम होता है, तो शॉट्स के बीच ट्रांजीशन एक जंप कट की तरह दिख सकता है-जो दर्शकों को कहानी से बाहर ले जा सकता है। दर्शक कथा के बजाए फिल्म तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

3. संपादन अदृश्य बनाओ (Make the Edit invisible) – 
 दर्शक को कभी भी एडिटिंग का एहसास नहीं होना चाहिए, इसलिए शॉट्स या ट्रांजीशन का उपयोग इस प्रकार करना होता है जिससे जम्प कट का एहसास ना हो. निरंतरता यह सुनिश्चित करता है कि संपादन दिखाई नहीं दे रहा है जो शॉट को सुसंगत बनाता है जो सुनिश्चित करता है कि दर्शक भ्रमित नहीं हो रहा है। ऑय लाइन मैच तकनीक का उपयोग भी इसी का ही एक उदहारण है. इसमें पहले शॉट में एक चरित्र स्क्रीन की तरफ देखता है और फिर अगले शॉट में दिखया जाता है कि वह चरित्र क्या देख रहा है। इसका उपयोग कट ट्रांजीशन को आसान बनाने में मदद के लिए किया जाता है क्योंकि दर्शकों को कट होने की उम्मीद है और यह पता लगाने के लिए उत्सुक है कि अगला शॉट में क्या है। 

4. हमेशा एक निश्चित संदेश दें (Always deliver a certain message) - 
जब भी हम कुछ वीडियो फुटेज को इकठ्ठा करके उसमे संपादन करते हैं तो ये ध्यान रखना जरुरी है कि संपादन पूरा होने के बाद उससे कोई न कोई सन्देश दर्शकों तक जरुर जाए. इससे उस वीडियो की सार्थकता बनी रहती है. 

Tuesday, 11 September 2018

वीडियो एडिटिंग : परिचय (Introduction)

वीडियो एडिटिंग क्या है? 


वीडियो संपादन (Video Editing) वीडियो शॉट्स या फुटेज में कांटछांट करके और पुनर्व्यवस्थित करके एक नया और सार्थक वीडियो बनाने की प्रक्रिया है. (Video editing is the process of manipulating and rearranging video shots to create a new and meaningful video).

संपादन आमतौर पर पोस्ट प्रोडक्शन प्रक्रिया (Post production process) का सिर्फ एक हिस्सा माना जाता है - अन्य पोस्ट-प्रोडक्शन कार्यों में शीर्षक (Titling), रंग सुधार (Color correction), ध्वनि मिश्रण (Audio mixing) आदि शामिल हैं।

बहुत से लोग अपने सभी पोस्ट-प्रोडक्शन काम का वर्णन करने के लिए संपादन शब्द का उपयोग करते हैं, खासकर गैर पेशेवर परिस्थितियों में। इस ब्लॉग में हम निम्नलिखित में से किसी भी कार्य का अर्थ के रूप में संपादन शब्द का उपयोग करते हैं: 


- वीडियो क्लिप और/या ऑडियो क्लिप को पुन: व्यवस्थित करना, जोड़ना और/या हटा देना।
- रंग सुधार, फ़िल्टर और अन्य कोई इफ़ेक्ट लागू करना।
- दो क्लिप के बीच ट्रांजीशन लगाना ।

चित्र क्रमांक - 19 (a)




एडिटिंग के उद्देश्य – 

वीडियो संपादित करने के कई कारण हैं और आपका संपादन करने का तरीका और दृष्टिकोण से उसका वांछित परिणाम निर्भर करेगा। सबसे पहले आपको अपने संपादन के लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना होगा, जो इस प्रकार हैं: 

· अवांछित फुटेज निकालें (Remove unwanted footage) - संपादन में यह सबसे सरल और सबसे आम कार्य है। इसमें वह शॉट्स जो उपयोग करने लायक नहीं है सबसे पहले उन शॉट्स को हटा लेना चाहिए, पर ध्यान रहे कई वीडियो ऐसे होते हैं जिनको सुधार करके उनका उपयोग किया जा सकता है उनका उपयोग करें. 

· सबसे अच्छा फुटेज चुनें (Choose best footage) - प्रोडक्शन के दौरान आवश्यकता से कहीं अधिक और विभिन्न संस्करण फुटेज शूट करना आम बात है पर अंतिम संपादन के लिए केवल सर्वोत्तम वीडियो फुटेज का चयन करना एक महतवपूर्ण कार्य है.

· प्रवाह बनाएं (Create work flow)- अधिकांश वीडियो एक उद्देश्य बताते हैं जैसे कोई कहानी कहता है या जानकारी प्रदान करता है । संपादन में भी यह सुनिश्चित करना होता है कि अंतिम वीडियो भी कोई ना कोई उद्देश्य पूरा कर रहा है.

· इफेक्ट्स, ग्राफिक्स, संगीत, टाइटल आदि जोड़ें (Add effects, graphics, music, title etc.) - इन सभी तत्वों को जोड़कर आप वीडियो को अधिक आकर्षक बना सकते हैं। 

· वीडियो की शैली, गति या मूड बदलें (Alter the style, pace or mood of the video) - एक अच्छा संपादक वीडियो को सही गति और शैली देकर वीडियो का मूड बदलने में सक्षम होता है। इसी से तय होता है कि दर्शक सम्पादित वीडियो पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे। 

· वीडियो को एक विशेष "कोण" दें (Give the video a particular angle) - वीडियो को किसी विशेष दृष्टिकोण का समर्थन करने, संदेश देने या एजेंडा देने के लिए तैयार किया जा सकता है।

Friday, 23 February 2018

वीडियो और टेलीविज़न प्रोडक्शन – विज़न मिक्सर (Vision Mixer)

विज़न मिक्सर (वीडियो स्विचर)
एक विज़न मिक्सर (उर्फ वीडियो स्विचर या प्रोडक्शन स्विचर) का उपयोग कई वीडियो स्रोतों को एक या अधिक मास्टर आउटपुट में मिश्रण करने के लिए किया जाता है. (A device used to mix multiple video sources into one or more master outputs). 

उदाहरण के तौर पर न्यूज़ चैनल में चलने वाले लाइव डिबेट प्रोग्राम के दौरान देखा जा सकता है जब एक साथ कई जगह से कई अलग-अलग लोग बैठकर डिबेट करते हैं और वीडियो स्विचर ऑपरेटर कमांड के अनुसार लगातार ऑन एयर स्क्रीन पर वीडियो बदलते रहता है.

विज़न मिक्सर का आकार और कीमत उसके इनपुट चैनल की संख्या के अनुसार तय होती है. इसके अलावा जिस विज़न मिक्सर में वीडियो के साथ-साथ ऑडियो इनपुट भी उपलब्ध हो उसे हम मास्टर स्विचर कहते हैं. चित्र क्रमांक 16(a) देखें.

चित्र क्रमांक 16(a)

विज़न मिक्सर क्या करता है?
विज़न मिक्सर का मुख्य उद्देश्य लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग या प्रसारण के लिए एक मास्टर आउटपुट बनाना है. आमतौर पर विजन मिक्सर का उपयोग लाइव इवेंट्स, या किसी ऐसे इवेंट को कवर करना है, जहां कई स्रोतों को वास्तविक समय में मिश्रित करने और स्विचिंग करने की आवश्यकता होती है. 

विजन मिक्सर का उपयोग स्विचिंग के दौरान विभिन्न विसुअल इफेक्ट्स डालने के लिए भी किया जा सकता है (जिसमे कि सरल कट, मिक्स और वाइप से लेकर एडवांस कम्पोजिट इफ़ेक्ट भी रहते हैं).

विज़न मिक्सर काम कैसे करता है?
विजन मिक्सर मूलतः ऑडियो मिक्सर के समान होते हैं. यह कई इनपुट स्रोत लेते हैं, कोई भी इच्छित इफ़ेक्ट लागू करते हैं, और एक या अधिक आउटपुट प्रदान करते हैं. 

अधिकांश विज़न मिक्सर प्रोग्राम बस और प्रीव्यू बस की थ्योरी पर काम करते हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास अपना मॉनिटर होता है. (विज़न मिक्सर पैनल पर, बस कई बटन की एक पंक्ति को कहा जाता है). पुराने वीडियो मिक्सर में दो समकक्ष बसें थीं (जिसे ए और बी बस कहा जाता है, ऐसे मिक्सर को ए / बी मिक्सर (A/B Mixer) के रूप में जाना जाता है). इन दो बस का कार्य कुछ इस प्रकार है -

प्रोग्राम बस – यह मुख्य आउटपुट फीड होती है (मतलब वह वीडियो जो रिकॉर्ड या ब्रॉडकास्ट किया जाना है) जो भी वीडियो सोर्स प्रोग्राम बस पर होता है उसे ऑनलाइन कहते हैं. (वह वीडियो जो आपको टीवी पर दीखता है).
प्रीव्यू बस – प्रीव्यू बस उस स्रोत का चयन करने और प्रीव्यू करने के लिए उपयोग किया जाता है जो ऑनलाइन किया जाने वाला है. 

इसके अलावा एक तीसरी बस जिसे कंपोजिटिंग के लिए उपयोग किया जाता है उसे की-बस (Key bus) कहते हैं. एक मिक्सर में एक से अधिक की-बस हो सकती है, लेकिन अक्सर वे केवल एक ही बटन-सेट शेयर करते हैं

विज़न मिक्सर की एक और मुख्य विशेषता ट्रांजीशन लीवर है, जिसे टी-बार या फ़ेडर बार भी कहा जाता है। एक ऑडियो फेडर के समान यह लीवर, दो बसों के बीच ट्रांजीशन के लिए उपयोग किया जाता है।
डिजिटल वीडियो मिक्सर में एक स्क्रीन होती है जिसमे सभी बटन और कण्ट्रोल या फाइनल आउटपुट को देख सकते हैं. चित्र क्रमांक 16(b) देखें.

चित्र क्रमांक 16(b)

वीडियो स्विचर ऑपरेटर का कार्य – 
वीडियो स्विचर ऑपरेटर निर्देशक या प्रोड्यूसर से अपने निर्देश लेता है। असल में, निर्देशक यह तय करता है कि कब कौनसी वीडियो फीड ओन एयर (on air) जायेगी और स्विचर को यह करने के लिए कहता है। निर्देशों का एक विशिष्ट सेट इस तरह से हो सकता है:

Directors Instruction: Meaning:
“1 next” Preview Camera 1 and prepare to put it online 
“Take” Cut Camera 1 online
“2 next” Preview Camera 2 and prepare to put it online 
“Take” Mix Camera 2 online
etc.

Thursday, 7 September 2017

वीडियो कैमरा – ज़ूम (Zoom)

प्रभावी ज़ूमिंग की टिप्स और वही प्रभाव पाने के वैकल्पिक तरीके

ज़ूम एक ऐसा फ़ंक्शन होता है जो आपके विषय (Object) को आपके करीब, या दूर करता है, । इसका प्रभाव (Effect) बिलकुल वैसा ही है जैसे कैमरे को करीब या अधिक दूर ले जाते समय होता है. दो सबसे आम ज़ूम मैकेनिज्म (Mechanism) नीचे दिए गए हैं:

1. मैनुअल ज़ूम रिंग (Manual Zoom Ring) - यह ज़ूम रिंग वीडियो कैमरा के लेंस हाउसिंग पर होती है जिसे मैन्युअल रूप से घुमाया जाता है, विशेष रूप से बाएं अंगूठे (Thumb) और तर्जनी उंगली (Index Finger) द्वारा।

फायदे: गति (आप सुपर-फास्ट ज़ूम कर सकते हैं); इसमें पॉवर की आवश्यकता नहीं है (इससे कैमरे की बैटरी की बचत होती है)
नुकसान: नियंत्रण करना थोडा कठिन होता है; स्मूथ ज़ूम करना थोडा मुश्किल होता है.

2. सर्वो ज़ूम लीवर (Servo Zoom Lever) - यह एक लीवर है जो लेंस हाउसिंग पर लगा होता है. जब आप अपने दाहिने हाथ को पकड़ के बेल्ट में स्लाइड करते हैं, तो सर्वो ज़ूम को आप अपनी पहली दो उंगलियों से चला सकते हैं. लीवर के सामने के हिस्से को दबाकर ज़ूम इन करें, पीछे के हिस्से को दबाकर ज़ूम आउट करें। सस्ते कैमरे में आमतौर पर एक ज़ूम गति होती है, जबकि एक अच्छे कैमरे में सर्वो ज़ूम में गति बदली जा सकती है. लीवर को T (टेली) और W (वाइड) भी बोल सकते हैं. 
फायदे: अधिकांश स्थितियों में उपयोग करने में आसान; स्मूथ ज़ूम करने में आसन होता है. 
नुकसान: बैटरी पावर का उपयोग करता है; निश्चित गति तक सीमित हो सकता है.


चित्र क्रमांक - 11(a)

ज़ूम लेंस की एक महत्वपूर्ण विशेषता है जिससे आपको अवगत होना चाहिए: जितना जायदा आप ज़ूम-इन करते हैं उतना ही अधिक कठिन फ्रेम को स्थिर करना हो जाता है, इसलिए जायदा अधिक ज़ूम इन करते समय ट्राईपोड का उपयोग करना चाहिए. यदि आपको अपना शॉट स्थिर रखने में परेशानी हो रही है, तो अपने आप को विषय के करीब ले जाएँ और फिर ज़ूम आउट करें. इस तरह आपको वही फ्रेम मिलेगा पर उससे जायदा स्थिर होगा.

ज़ूम एक ऐसा फंक्शन है जिसे हर कोई उपयोग करता है और आप इसके साथ बहुत कुछ कर सकते हैं, यही कारण है कि प्रोडक्शन के दौरान इसका बहुत अधिक उपयोग किया जाता है पर ज़ूम का उपयोग करने पर हम जो सबसे आम सलाह देते हैं, वह यह है कि इसका उपयोग कम से कम करें.
यह वीडियो कैमरा का बहुत अच्छा फंक्शन है, लेकिन जब आपके अधिकतर शॉट्स में ज़ूमिंग इन और जूमिंग आउट होगा, तो आपके दर्शकों को मतभेद महसूस होगा.

एक नियम के अनुसार, जूम का उपयोग तब तक ना करें जब तक कि इसके लिए कोई कारण नहीं है। यदि आप एक ही शॉट में पुरे दृश्य का विवरण साथ ही कुछ क्लोज-अप विवरण भी दिखाना चाहते हैं, तो आपको ज़ूम इन करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, एक वाइड शॉट शूट करें, रिकॉर्डिंग बंद करें, क्लोज अप में ज़ूम करें, फिर से रिकॉर्डिंग शुरू करें । फिर इन दोनों शॉट को जोड़ के देखें, नतीजा यह भी वही शॉट होता है पर इसमें लगता है अधिक सफाई और जल्दी से दूसरे में कट जाता है, ज़ूम के रूप में यह भी वही जानकारी को चित्रित करता है, लेकिन अधिक कुशलता से.

Thursday, 22 June 2017

वीडियो कैमरा – शूटिंग तकनीक (Shooting Technique)

अपनी और अपने कैमरे की सही स्थिति जानें - यदि आप ट्राईपोड का उपयोग कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह स्थिर और और तीनों तरफ से बराबर हो (जब तक आपके पास इसको टिल्ट (Tilt) करने का कोई कारण ना हो). यदि ट्राईपोड में स्पिरिट लेवल (Spirit Level) हो तो उसे बिलकुल मध्य में रखें. 

यदि आप कैमरे को पैन और/या टिल्ट करने जा रहे हैं, तो इतना जरुर सुनिश्चित करें कि पुरे मूवमेंट के दौरान आपकी पोजीशन आरामदायक हो. 

अगर ट्राईपोड के हेड (Tripod Head) में बाउल ना लगी हो (जो अधिकतर सस्ते ट्राईपोड में पाया जाता है) तो फ्रेमिंग बनाते समय उसका पैन लेवल (Pan Level) जरुर जांचें क्योंकि अगर एक ही दिशा में शूट करना है तो कोई जायदा फर्क नहीं पड़ता पर अगर कैमरे को दायें से बायें पैन करना हो तो उस स्तिथि में पैन लेवल सही होना जरुरी है वरना शॉट ख़राब हो जाएगा. चित्र क्रमांक - 6(a) में देखें.

यदि आप ट्राईपोड का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो आप अपने और अपने कैमरे को यथासंभव स्थिर कर सकते हैं। अपने हाथ और कोहनी को अपने शारीर के पास रखें. साँसों को काबू में रखें. स्थिर शॉट्स के लिए, अपने पैरों को कंधे की सीधी में रखें (यदि आप खड़े हैं तो), या किसी ठोस ऑब्जेक्ट (फर्नीचर, दीवार या कुछ भी) का सहारा लेने की कोशिश करें।


चित्र क्रमांक - 6(a)

शॉट को फ्रेम करें – उसके बाद कुछ चीजों को त्वरित चेक करें: वाइट बैलेंस, फोकस, आईरिस, फ्रेम (वर्टीकल और हॉरिजॉन्टल लाइन्स, बैकग्राउंड आदि).

अपने ऑडियो पर ध्यान दें - ऑडियो उतना ही महतवपूर्ण है जितना वीडियो, इसलिए इस पर भी उतना ही ध्यान दें.

अब रिकॉर्ड बटन दबाएँ. ध्यान रखें जब आप रिकॉर्डिंग कर रहे हों तो आप सिर्फ रिकॉर्डिंग कर रहे हों क्योंकि इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता की आपकी रिकॉर्डिंग पूरी हो जाए और उसके बाद आपको पता चले की कुछ भी रिकॉर्ड नहीं हुआ है चाहे कारण कुछ भी हो. कई कैमरों के पास "रोल-इन टाइम" टेप होता है, जिसका अर्थ है कि जब आप रिकॉर्ड बटन दबाते हैं और जब कैमरा रिकॉर्डिंग प्रारंभ होता है दोनों के बीच में थोड़ा डिले (Delay) होता है.

व्यूफाइंडर के डिस्प्ले में दिखने वाले सभी संकेतों को लगातार देखते रहें. डिस्प्ले में दिखने वाले सभी संकेत के मतलब को जानने की कोशिश करें - वे आपको बहुमूल्य जानकारी दे सकते हैं

दोनों आँखों का उपयोग करें एक प्रोफेशनल व्यक्ति का एक बड़ा कौशल होता है कि वह एक आंख का उपयोग व्यूफाइंडर देखने में करता है वहीं दूसरी आँख से आस-पास के वातावरण पर नज़र रखता है. इसे सीखने में थोडा समय लग सकता है पर शोल्डर शॉट लेते समय या चलते हुए शॉट लेते समय यह तकनीक काफी सहायक सिद्द होती है. 

पीछे की ओर चलना सीखें - किसी को अपनी पीठ के बीच में अपना हाथ रखकर मार्गदर्शन करने को कहें और फिर पीछे चलते हुए शूट करें, ये शॉट्स बहुत अच्छे लग सकते हैं. आपने कई बार न्यूज़ प्रेसेंटर को चलते हुए इंटरव्यू करते हुए देखा होगा उसमे कामेरापरसन इसी तकनीक का उपयोग करता है.

फ्रेम और ऑडियो के बारे में लगातार सोचें – शूटिंग के दौरान फ्रेम कम्पोजीशन और ऑडियो को लगातार चेक करते रहें. 

कैमरे को मूव करने से पहले "रिकॉर्ड या स्टॉप" बटन दबाएं – रिकॉर्डिंग समाप्त होने के एक या दो सेकंड बाद स्टॉप बटन दबाएँ और फिर कैमरा को मूव करें (जैसे की हम फोटोग्राफी में फोटो लेने के बाद करते हैं). 

कुछ और टिप्स जो आपकी शूटिंग में सहायक होगी

शूटिंग के दौरान डिप्लोमेटिक रहें – जिन लोगों को आप शूट कर रहे हैं उनके बारे में सोचें. याद रहे की अधिकाँश लोग कैमरे के सामने थोड़े नर्वस हो जाते हैं ऐसे में आप थोड़ा सख्त रहें पर साथ ही अन्य विकल्पों के बारे में भी सोचें. 

अच्छे शॉट के लिए कब शोर मचाना या गुस्सा होना सही है और कब नहीं ये फैसला लेना सीखना होगा. अगर कोई महतवपूर्ण शॉट है तो उसे बिलकुल सही तरीके से लेने में कुछ लोगों को असुविधा हो सकती है. पर शॉट के लिए अपना नुकसान करवा लेना गलत होगा, ऐसे में उसका विकल्प तलाशें. 

तिथि/समय स्टाम्प फीचर का उपयोग कब करें – यह फीचर लगातार उपयोग करना सही नहीं होगा, इससे शॉट लो क्वालिटी प्रतीत होता है. इसका उपयोग उतनी देर ही करें जितना जरुरी है बाकी समय इसको बंद रखें. आजकल के डिजिटल कैमरों में यह फीचर आसानी से उपयोग किया जा सकता है. 

प्रयोग करने के लिए तैयार रहें - उन कुछ चीजों के बारे में हमेशा सोचें जो आप करने की कोशिश करना चाहते हैं, फिर खली समय में वह चीज़ करने की कोशिश करें (यानी शादी की शूटिंग करते समय प्रयोग न करें) अधिकांश नई तकनीकों को आदत बनाने के लिए अभ्यास और प्रयोग की ज़रूरत होती है और अच्छे कैमरावर्क के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है। 

अगर आप अच्छा काम करना चाहते हैं तो आपको कुछ समय निवेश करना होगा.

Saturday, 22 April 2017

वीडियो कैमरा - योजना (Planning)

योजना (planning): यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है, और संभवत: निर्देशक के लिए सबसे मुश्किल काम है। यह वह कार्य जहां आपकी अधिकांश ऊर्जा आपको निर्देशित करती है। 

बड़े प्रोजेक्ट में कैमरा वर्क सिर्फ एक कौशल है- जिसका लक्ष्य आमतौर पर एक पूरा वीडियो, टीवी कार्यक्रम, या किसी तरह की प्रस्तुति का उत्पादन करने के लिए होता है. एक अच्छे कैमरा वर्क के लिए, आपके पास पूरी प्रक्रिया का स्पष्ट चित्र होना चाहिए या कम से कम एक स्पष्ट विचार होना चाहिए की जब यह वीडियो बन जाएगा तो कैसा दिखेगा और कैसा सुनाई देगा .

कोई एक चीज़ है जो पेशेवरों को शौकीनों से अलग करती है तो वह है शौक़ीन हमेशा “विषय और शूट” (point and shoot) करते हैं और पेशेवर हमेशा “योजना और शूट” (planning and shoot) करते हैं l जाहिर है कई बार ऐसी परिस्थिति होती है जब रिकॉर्डिंग से पहले तैयारी करने का समय नहीं मिलता है- कभी कभी कार्यवाही अप्रत्याशित होती है और आपको उसके लिए जाना होता है l इन मामलों में, जहाँ तक संभव हो आपको अपनी योजना के अनुसार चलना चाहिए – योजना सबकुछ है (Planning is everything).

सामान्य कैमरा वर्क के लिए आप योजना को दो भाग में विभाजित कर सकते हैं – “शूट प्लान” और “शॉट प्लान”.

शूट प्लान (Shoot Plan):
इस मामले में “शूट” शब्द एक शूटिंग सत्र को संदर्भित करता है. अगर आप रिकॉर्ड की गयी हर फुटेज को शूट का भाग समझते हैं और प्रत्येक शूट के लिए एक योजना बना रहे हैं, तो आप बेहतर संगठित फुटेज बनाने के रास्ते पर हैं।

सबसे पहले, प्रत्येक शूट के उद्देश्य के बारे में आप पूरी तरह से स्पष्ट होना चाहिए। सामान्यतः, आप जो कुछ भी करते हैं वह एक बड़ी योजना के लिए काम करने जैसा होना चाहिए. 
वास्तव में यह क्या है जो कई कारकों पर निर्भर करेगा-

यदि आप एक फीचर फिल्म बना रहे हैं, तो दीर्घकालिक योजना (long term planning) यह होनी चाहिए कि स्क्रिप्ट / स्टोरीबोर्ड के लिए आवश्यक सभी शॉट्स इकट्ठा करके रखें. 
अगर आप होम वीडियो बना रहे हैं, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक संग्रह बनाने की दीर्घकालिक योजना हो सकती है l 
यदि आप एक “ऑफ” प्रोजेक्ट (जैसे कि शादी का वीडियो) बना रहे हैं, तो भी आपको शूट के लिए दीर्घावधिक निहितार्थों (long term implications) को ध्यान में रखना होगा।

योजना का मतलब है कि एक ऐसा रवैया अपनाना जिसमे नियंत्रण आपके हाथ में हो. जब आप अपना वीडियो कैमरा निकालते हैं, तो यह सोचने के बजाय कि "यह वीडियो अच्छा लगेगा" और जो भी है उसे शूट करना शुरू कर दें, उससे पहले यह सोचें कि, "मैं यह वीडियो कैसे शूट करूँ जिससे यह वीडियो अच्छा लगे” ? फिर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वीडियो शूट करना शुरू करें (जरुरत पड़े तो डायरेक्शन भी करें).

शूट की अनुमानित लंबाई (approximate length) की योजना बनाएं: 
आपको कितना फुटेज शूट करने  करने की जरूरत है, और यह आपको लेने में कितना समय लगेगा? इसकी पूरी योजना शूट शुरू करने से पहले कर लें l इससे आपको उपकरण चुनने में भी मदद मिलती है. 

उपकरण की चेकलिस्ट रखें, जिसमें यह निम्न उपकरण शामिल हो सकते हैं : 
कैमरा, ट्राईपोड,  टेप (डिजिटल कार्ड), बैटरी, माइक्रोफोन, ऑडियो उपकरण, रोशनी के उपकरण, बिजली की आपूर्ति, लॉग शीट्स और अन्य पेपर वर्क.

सम्पादित करने की योजना (Planning to Edit): 
यह महत्वपूर्ण है, यदि आपको लगता है कि यह आपके लिए लागू नहीं होता है, तो आप गलत हैं. आपके द्वारा कैप्चर किए गए सभी शॉट्स को संपादन को ध्यान में रखकर शूट किये जाने चाहिए. 
संपादित करने के दो बुनियादी तरीके हैं: पोस्ट-प्रोडक्शन और इन-कैमरा

पोस्ट-प्रोडक्शन - संपादन का मतलब है कि आपके द्वारा रिकॉर्ड किए गए शॉट को किसी संपादन उपकरण का उपयोग करके उन्हें पुन: संयोजन (जोड़ा) किया जाना । पेशेवरों का काम करने का यही तरीका है – इस तरह से काम करने में शूटिंग के दौरान जायदा आसान हो जाती है और परिणाम भी बेहतर मिलते हैं .सरल पोस्ट संपादन करने के लिए, आपको केवल कैमरा, एक वीटीआर या कार्ड रीडर और कुछ कनेक्टिंग लीड्स जैसे फायरवायर केबल, की आवश्यकता है. आप शूटिंग योजना के अंतर्गत किसी भी क्रम में अपने शॉट्स एकत्र कर सकते हैं, और जितने चाहे उतने शॉट्स शूट कर सकते हैं l संपादन के दौरान आप अवांछित शॉट्स को हटा देते हैं और अच्छे शॉट्स को जैसे चाहे जोड़ सकते हैं l यह एक समय लेने वाला कार्य हो सकता है (खासकर यदि आपको संपादन का अधिक अनुभव नहीं है) लेकिन आमतौर पर इस प्रयास से अच्छे परिणाम मिलते हैं l  

इन-कैमरा – इन कैमरा संपादन का मतलब है कि जो भी आप शूट करते हैं वही आपको मिलता है – जहाँ कोई पोस्ट प्रोडक्शन ना हो l यहाँ मुख्य बिंदु यह है कि आप अभी भी संपादन कर रहे हैं , आप अब भी यह तय कर सकते हैं की कौन सा शॉट पहले जायेगा और कौन सा बाद में बस फर्क इतना है कि ये सारे फैसले आप तब लेते हैं जब आप शूट कर रहे होते हैं बजाय पोस्ट प्रोडक्शन के. यह आसान नहीं है और ना ही ये जरुरी है की हर बार ये सही होगा. 
इसमें नियोजन, दूरदर्शिता और अनुभव की आवश्यकता है

नोट: इसके अलावा एक अन्य ऐसी स्थिति है जिसका उल्लेख किया जाना चाहिए: लाइव मल्टी-कैमरा शूट l इसमें दो या उससे अधिक कैमरे विज़न मिक्सर से जुड़े होते हैं और डायरेक्टर उस कार्यक्रम का लाइव संपादन करवाता है (इसका उदहारण है लाइव क्रिकेट मैच) l इस मामले में, आप संपादन का काम कार्यक्रम के शूट के दौरान उसके वास्तविक समय में कर सकते हैं ।

शॉट प्लान (Shot Plan):
एक बार जब आप अपने शूटिंग सत्र की योजना बना लेते हैं, तो आप व्यक्तिगत शॉट्स की योजना बनाने के लिए तैयार हो जाते हैं । सबसे पहले, हर शॉट को लेने का कोई कारण तय कीजिये । अपने आप से पूछें "मैं इस शॉट के साथ क्या हासिल करने की कोशिश कर रहा हूं”.

क्या यह शॉट आवश्यक है? क्या मैंने पहले ऐसा शॉट लिया है जो अनिवार्यतः एक जैसा है? क्या मेरे दर्शक इस विषय को पसंद करेंगे ? 

एक बार जब आपको लगता है कि शॉट प्राप्त करने के लिए आपके पास एक अच्छा कारण है, तो इसे शूट करने के सर्वोत्तम तरीके के बारे में सोचें l उसके बाद विभिन्न एंगल, फ्रेमिंग के बारे में सोचें l अच्छी रचना को मास्टर स्टेज तक पहुँचाने में समय लगता है लेकिन लगातार अभ्यास के साथ आप वहां पहुंचेंगे।

अपने आप से यह पूछें कि आप इस शॉट के माध्यम से अपने दर्शकों को क्या जानकारी देना चाहते हैं, और यह सुनिश्चित कर लें कि आप शॉट को इस तरह से कैप्चर करें जिससे दर्शक इसे समझ जाएँ । प्रत्येक शॉट को लेने से पहले पूरा समय लें, खासकर तब जब वह शॉट महत्वपूर्ण है.
यदि आवश्यक हो (और यदि आप पोस्ट प्रोडक्शन में संपादन करने वाले हैं), तो शॉट के अलग-अलग एंगल से शूट करें ताकि आप बाद में सर्वश्रेष्ठ शॉट चुन सकें।

इसके अलावा, पोस्ट संपादन के लिए, प्रत्येक शॉट की शुरुआत और अंत में कम से कम 5 सेकंड के अतिरक्त विडियो शूट करें । यह संपादन उपकरणों के लिए आवश्यक है, और यह सुरक्षा बफर के रूप में भी कार्य करता है।

Thursday, 20 April 2017

वीडियो कैमरा : परिचय (Introduction)

वीडियो परिभाषा : दृश्य मल्टीमीडिया स्रोत जो चलती चित्र बनाने के लिए छवियों के क्रम को जोड़ती है. वीडियो एक स्क्रीन पर एक संकेत प्रेषित करता है और उस क्रम को संसाधित करता है जिसमें स्क्रीन कैप्चर किया जाना चाहिए। वीडियो में आमतौर पर ऑडियो घटक होते हैं जो स्क्रीन पर दिखाए जाने वाले चित्रों के अनुरूप होते हैं.
(Visual Multimedia source that combines a sequences of images to form a moving picture. The video transmits a signal to a screen and processes the order in which the screen capture should be shown. Video usually have audio components that correspond with the picture being shown on the screen.)

ये ट्यूटोरियल/ब्लॉग आपको अपने कैमरे के काम के हर पहलू को बेहतर बनाने के लिए ज्ञान और कौशल प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. वे पूर्ण नौसिखिया स्तर से शुरू करते हैं और पेशेवर कार्यों के माध्यम से काम करते हैं.


वे किसी भी प्रकार के कैमरे के काम पर भी लागू होते हैं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या आप एक शौकिया फिल्म निर्माता या कैरियर कैमरा ऑपरेटर बनना चाहते हैं - वही बुनियादी सिद्धांत और तकनीकों को सभी पर लागू होता है.

इन ट्यूटोरियल का अधिकतम लाभ उठाने के लिए, आपको दो चीजें होनी चाहिए:

1. वीडियो कैमरा तक पहुंच:आपको यह पता होना चाहिए कि कैसे इसे चालू करें, टेप लोड करना, रिकॉर्ड दबाना, इत्यादि. आपको इन बुनियादी फ़ंक्शंस में परेशानी हो रही है, तो अपने कैमरा मैनुअल या सप्लायर देखे.

2. धीरज : कैमरे का काम एक ऐसा कौशल है जिसमें बहुत से सीखने और अभ्यास की आवश्यकता होती है.

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शुरू में सचमुच कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आप किस प्रकार के कैमरे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अच्छे मैन्युअल फंक्शन के साथ एक अच्छी श्रेणी का कैमरा बेहतर है। आप बाद में अलग और बेहतर कैमरे के बारे में सोच सकते हैं ।

यद्यपि वास्तव में एकमात्र उपकरण की जरूरत है वो है कैमरा, अगर आप गंभीर हैं तो आप कुछ अतिरिक्त उपकरण खरीदने पर विचार कर सकते हैं सबसे अच्छा सहायक शुरू करने के लिए एक अच्छा ट्राईपोड है.