Wednesday, 7 June 2017

वीडियो कैमरा – फ्रेमिंग (Framing)

शॉट का मतलब कम्पोजीशन (Shots are all about composition), कैमरे को विषय की तरफ सिर्फ घुमाने की बजाय आपको विषय को कंपोज़ करना है. जैसे की पहले भी कहा फ्रेमिंग कम्पोजीशन को सर्जन करने की प्रक्रिया है (Framing is the process of creating composition). 
  • फ्रेमिंग तकनीक बहुत ही व्यक्तिपरक (Subjective) है. जो एक व्यक्ति को सृजनात्मक लगता है वही दुसरे व्यक्ति को व्यर्थ लग सकता है. जो कुछ हम यहाँ देख रहे हैं वह मीडिया इंडस्ट्री में स्वीकृत है इसलिए इसे आप रूल ऑफ़ थम्ब (Rule of Thumb) के रूप में उपयोग कर सकते हैं.
  • वीडियो फ्रेम बनाने के नियम अनिवार्य रूप से आज भी बिलकुल फोटोग्राफी के नियम जैसे ही हैं।
शॉट के प्रकार (Basic Shot types) - 
वीडियो उद्योग में एक संस्था है जो आम प्रकार के शॉट्स के नाम रखती है। शॉट्स के नाम और उनके सटीक अर्थ अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन निम्नलिखित उदाहरण मानक विवरणों के लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं। बिंदु यह है कि हमें शॉट के नामों को नहीं जानना है (हालांकि यह भी बहुत उपयोगी है), पर उससे जायदा जरुरी है उसके उद्देश्यों को समझना. 

मूल शॉट्स को विषय के संदर्भ में संदर्भित किया जाता है। उदाहरण के लिए, "क्लोज अप शॉट" का मतलब कोई चीज़ करीब होना चाहिए. एक व्यक्ति के चहरे का क्लोजअप भी चेहरे का वाइड शॉट, या नाक के वैरी वाइड शॉट के रूप में वर्णित किया जा सकता है.
निम्न सभी शॉट्स में विषय एक लड़की है जो एक गार्डन में खड़ी है-



चित्र क्रमांक 5(a)  PC - C.M. Gurjar

एक्सट्रीम क्लोज अप शॉट (Extreme Close up shot) - इस शॉट में विषय के शारीर के किसी एक हिस्से के बारे में अत्यधिक विस्तार से बबताया जाता है. लोगों के लिए, ईसीयू का उपयोग भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किया जाता है. (चित्र क्रमांक 5(a) देखें)

चित्र क्रमांक 5(b)  PC - C.M. Gurjar

क्लोज अप शॉट (Close up shot) – इस शॉट में विषय की एक विशेष विशेषता या किसी भाग को पूरे फ्रेम में रखते हैं. किसी व्यक्ति के करीब होने का अर्थ आम तौर पर उसके चेहरे का करीब होना है. (चित्र क्रमांक 5(b) देखें)

चित्र क्रमांक 5(c)  PC - C.M. Gurjar

मिड क्लोज अप (Mid close up) – यह शॉट क्लोज अप और मिड शॉट के मीच का शॉट होता है यह शॉट चेहरे को और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाता है, बाकी शारीर भी सहज रूप से दीखता है. (चित्र क्रमांक 5(c) देखें).

चित्र क्रमांक 5(d)  PC - C.M. Gurjar

मिड शॉट (Mid Shot) – इसमें विषय के कुछ हिस्से को और अधिक विस्तार से दिखाया जाता है, जिससे दर्शकों को महसूस होता है कि वो जिस विषय को देख रहे हैं वह फ्रेम में पर्याप्त दिख रहा है. वास्तव में, यह एक धारणा है कि अगर आप एक सामान्य वार्तालाप कर रहे हैं तो आप "एक नज़र में" एक व्यक्ति को कैसे देखेंगे. आप उस व्यक्ति के निचले हिस्से पर कोई ध्यान नहीं दे रहे होंगे, इसलिए फ्रेम का वह भाग अनावश्यक है. (चित्र क्रमांक 5(d) देखें).

चित्र क्रमांक 5(e)  PC - C.M. Gurjar

वाइड शॉट (Wide Shot) – इस शॉट में फ्रेम में पूरा विषय दीखता है. व्यक्ति के पैर लगभग फ्रेम के नीचे होते हैं, और उसका सिर लगभग शीर्ष पर होता है. स्पष्ट रूप से इस शॉट में विषय फ्रेम में बहुत कम चौड़ाई कवर करता है, चूंकि फ्रेम विषय के जितने करीब होगा उतना जायदा उसके शारीर का हिस्सा फ्रेम को कवर करेगा. विषय के कुछ भाग ऊपर एवं कुछ भाग निचे को सेफ्टी रूम (हेड स्पेस और फूट स्पेस) कहा जाता है - आप सिर के ऊपर वाले भाग को काटना नहीं चाहेंगे. यह असहज भी दिखाई देगा, यदि फ्रेम में पैर और सीर के ऊपर बिलकुल भी जगह खाली ना हो. (चित्र क्रमांक 5(e) देखें).

चित्र क्रमांक 5(f)  PC - C.M. Gurjar

वैरी वाइड शॉट (Very Wide Shot) – वीडब्ल्यूएस शॉट में विषय दिखाई देता है, परन्तु असल में उसके आस-पास के वातावरण को दिखाने पर जोर दिया जाता है। यह एक स्थापित शॉट (Establish Shot) के रूप में भी काम करता है। (चित्र क्रमांक 5(f) देखें).

चित्र क्रमांक 5(g)  PC - C.M. Gurjar

एक्सट्रीम वाइड शॉट (Extreme Wide Shot) - ईडब्ल्यूएस में, फ्रेम इतनी दूर से दिखाया जाता है जिसमे विषय दिखाई भी नहीं देता है इस शॉट का उद्देश्य विषय के परिवेश को दिखाना होता है. ईडब्लूएस अक्सर एक स्थापित शॉट (Establish Shot) के रूप में उपयोग किया जाता है – इस शॉट को फिल्म के पहले शॉट के रूप में लिया जाता है, दर्शकों को यहाँ बताया जाता है कि आगे होने वाला एक्शन कहाँ पर हो रहा है. (चित्र क्रमांक 5(g) देखें).

चित्र क्रमांक 5(h) 

एरियल शॉट (Aerial Shot) - इस शॉट को किसी हवाई उपकरण जैसे ड्रोन या हवाई जहाज से लिया जाता है जिसमे पुरे एक शहर या ग्राउंड या घटनास्थान का चित्र काफी ऊपर से लिया जाता है जिससे उस जगह के और उसके आस पास के पूरे घटनाक्रम का पता चल सके. (चित्र क्रमांक 5(h) देखें).

चित्र क्रमांक 5(i) 

कटअवे शॉट (Cutaway Shot) - एक कटवे शॉट वह होता है जो आमतौर पर मौजूदा फ्रेम से अलग कोई एक्शन होता है. यह एक अलग विषय हो सकता है या विषय के शारीर के किसी भाग का क्लोजअप हो सकता है (जैसे हाथ का मूवमेंट) या फिर कुछ और. कटअवे शॉट को शॉट्स के बीच में “बफर” के रूप में उपयोग किया जाता है (जिससे एडिटिंग में साहयता मिलती है) और अतिरिक्त जानकारी देने या प्रोग्राम को थोड़ा और रोचक बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है. (चित्र क्रमांक 5(i) देखें - ऊपर दिए गए लड़की के शॉट्स से हटकर ये बच्चे उसी गार्डन में खेल रहे हैं जो की कटअवे का काम करेंगे).

फ्रेमिंग के नियम (Some Rules of framing) –
  • रूल्स ऑफ़ थर्ड (Rule of Thirds) - यह नियम फ्रेम को नौ भाग में बांटता है, जैसा कि पहले चित्र क्रमांक 5(j) के फ्रेम में है. इस नियम में मानसिक रूप से आपकी छवि को 2 क्षैतिज रेखाओं (Horizontal Lines) और 2 ऊर्ध्वाधर रेखाओं (Vertical Lines) का उपयोग करके विभाजित किया गया है, जैसा कि नीचे दिखाया गया है. इसमें मुख्य विषय को बीच (Centre) में रखने के बजाय फ्रेम के 1/3 या 2/3 में भाग में रखा जाता है. इसका उपयोग कैसे करें – सबसे पहले यह तय करें की फ्रेम में सबसे महत्वपूर्ण तत्व क्या है और फिर उस तत्व को इन लाइन्स पर या यह लाइन्स जहाँ मिल रहीं है उसके पास या उसके उपर रखने की कोशिश करें. उदहारण के लिए चित्र क्रमांक 5(k) देखें.

चित्र क्रमांक 5(j)


चित्र क्रमांक 5(k) 

  • "हेडरूम (Head Room)", "लूकिंग रूम (Looking Room)", और "लीडिंग रूम (Leading Room)". ये शब्द फ्रेम में खाली जगह का उल्लेख करते हैं जो जानबूझकर खाली छोड़ दिया जाता है। बच्चे जिस दिशा में क्रॉल कर रहा है उस दिशा में कुछ भाग लीडिंग रूम के रूप में छोड़ा गया है (चित्र क्रमांक 5(l) में देखें), और वहीं अगले शॉट में  एक और बच्ची जिस दिशा में देख रही है उसे देखने के लिए उस दिशा में कुछ खाली भाग लूकिंग रूम के रूप में छोड़ा गया है (चित्र क्रमांक 5(m) में देखें). इस खाली जगह के बिना, फ्रेम असुविधाजनक लगेगा. 




चित्र क्रमांक 5 (l)


चित्र क्रमांक 5 (m)
  • वहीं हेडरूम विषय के सबसे उपरी भाग और फ्रेम के सबसे उपरी भाग के बीच की जगह को कहा जाता है. शौकिया वीडियो में एक आम आदमी अधिकतर यही गलती करता है कि बहुत ज्यादा हेडरूम छोड़ देता है, जो अच्छा नहीं दिखता है और पिक्चर को बर्बाद कर देता है किसी भी "व्यक्ति” के क्लोजअप शॉट, एक्सट्रीम क्लोजअप शॉट में, बहुत कम हेडरूम होना चाहिए.
  • आपके फ्रेम में सब कुछ महत्वपूर्ण है, बल्कि न सिर्फ विषय। फ्रेम में पृष्ठभूमि (Background) कैसा है? प्रकाश की लाइटिंग (Lighting) सही है या नहीं? क्या फ्रेम में कुछ ऐसा तो नहीं जो फ्रेम को विचलित कर सकता है, या वीडियो की निरंतरता को बाधित कर सकता है? अपने फ्रेम के किनारों (Edges) पर ध्यान दें फ्रेम में किसी भी वस्तु को आधा दिखाने से बचें, विशेष रूप से किसी व्यक्ति को (किसी के चेहरे का आधा हिस्सा पिक्चर में दिखे तो इसे बहुत नापसंद किया जाता है) साथ ही फ्रेम में किसी व्यक्ति को उसके जोड़ों (Joints) से काटने से भी बचें, जैसे फ्रेम को व्यक्ति के पेट तक रखना ठीक है पर वहीं फ्रेम उसके घुटने तक रहेगा तो सही नहीं लगेगा.

जब आप यह समझ जाते हैं की क्या करना है और क्या नहीं (Do’s and Don’ts), तो आप अधिक रचनात्मक बन सकते हैं। शॉट के अर्थ को व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका सोचें. यदि कोई बच्चा फर्श पर क्रॉलिंग कर रहा है, तो पहले स्वयं फर्श पर उतरो और उस बच्चे के पॉइंट-ऑफ-व्यू (Ponit of View) से देखने की कोशिश करो. 
हमेशा दिलचस्प और असामान्य शॉट्स बनाने की सोच रखनी होगी. क्योंकि आप अगर ध्यान दें आपके अधिकतर शॉट्स किसी की भी नज़र में सामान्य होंगे जब तक उसमे कुछ मिश्रण करने का प्रयास ना हुआ हो जैसे विभिन्न कोण (Different Angles) और भिन्न कैमरा स्थिति (Different Camera Positions). उदहारण के तौर पर जब किसी शॉट को लो एंगल (Low Angel) से लेते हैं तो सीधे शॉट की तुलना में कहीं अधिक दिलचस्प हो जाता है.

इसलिए जायदा से जायदा टीवी और प्रोफेशनल वीडियो में लिए गए असाधारण शॉट्स को देखें और समझें. सारा खेल कैमरा पोजीशन और कैमरा कम्पोजीशन का है. अपने प्रोडक्शन में भी उसका उपयोग करें.

कैमरा मूवमेंट (Basic Camera Movement) - 

कैमरा फ्रेमिंग के साथ, मूल कैमरा मूवमेंट के लिए भी मानक विवरण होते हैं। जिसमे ये मुख्य हैं:

पैन (PAN) – कैमरा को बिना वर्टीकल मूवमेंट के दायें और बाएं तरफ घुमाना.

टिल्ट (Tilt) - कैमरा को बिना हॉरिजॉन्टल मूवमेंट के ऊपर और नीचे की तरफ घुमाना.

ज़ूम (Zoom) – इन और आउट, जिसमे कैमरा विषय के करीब या उससे दूर जाता है. (हालांकि ज़ूमिंग और कैमरे को विषय के करीब या उससे दूर ले जाना दो अलग चीज़ हैं. आगे की पोस्ट में इस पर विस्तृत जानकारी मिलेगी). जब ज़ूम इन करते हैं तो उसको फ्रेम टाइट “Tighter” करना कहते हैं और जब ज़ूम आउट करते हैं तो उसको फ्रेम लूस “Looser” करना कहते हैं.

फॉलो (Follow) – किसी भी प्रकार का शॉट, जिसमे आप कैमरे को हाथ में पकड़ते हैं (या अपने कंधे पर कैमरे को रखते हैं) और फिर किसी चलते हुए एक्शन को शूट करते हैं उसे फॉलो शॉट कहते हैं. यह शॉट लेना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन जब अच्छी तरह से किया गया हो तो बहुत प्रभावी होता है
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