Thursday, 22 June 2017

वीडियो कैमरा – शूटिंग तकनीक (Shooting Technique)

अपनी और अपने कैमरे की सही स्थिति जानें - यदि आप ट्राईपोड का उपयोग कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह स्थिर और और तीनों तरफ से बराबर हो (जब तक आपके पास इसको टिल्ट (Tilt) करने का कोई कारण ना हो). यदि ट्राईपोड में स्पिरिट लेवल (Spirit Level) हो तो उसे बिलकुल मध्य में रखें. 

यदि आप कैमरे को पैन और/या टिल्ट करने जा रहे हैं, तो इतना जरुर सुनिश्चित करें कि पुरे मूवमेंट के दौरान आपकी पोजीशन आरामदायक हो. 

अगर ट्राईपोड के हेड (Tripod Head) में बाउल ना लगी हो (जो अधिकतर सस्ते ट्राईपोड में पाया जाता है) तो फ्रेमिंग बनाते समय उसका पैन लेवल (Pan Level) जरुर जांचें क्योंकि अगर एक ही दिशा में शूट करना है तो कोई जायदा फर्क नहीं पड़ता पर अगर कैमरे को दायें से बायें पैन करना हो तो उस स्तिथि में पैन लेवल सही होना जरुरी है वरना शॉट ख़राब हो जाएगा. चित्र क्रमांक - 6(a) में देखें.

यदि आप ट्राईपोड का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो आप अपने और अपने कैमरे को यथासंभव स्थिर कर सकते हैं। अपने हाथ और कोहनी को अपने शारीर के पास रखें. साँसों को काबू में रखें. स्थिर शॉट्स के लिए, अपने पैरों को कंधे की सीधी में रखें (यदि आप खड़े हैं तो), या किसी ठोस ऑब्जेक्ट (फर्नीचर, दीवार या कुछ भी) का सहारा लेने की कोशिश करें।


चित्र क्रमांक - 6(a)

शॉट को फ्रेम करें – उसके बाद कुछ चीजों को त्वरित चेक करें: वाइट बैलेंस, फोकस, आईरिस, फ्रेम (वर्टीकल और हॉरिजॉन्टल लाइन्स, बैकग्राउंड आदि).

अपने ऑडियो पर ध्यान दें - ऑडियो उतना ही महतवपूर्ण है जितना वीडियो, इसलिए इस पर भी उतना ही ध्यान दें.

अब रिकॉर्ड बटन दबाएँ. ध्यान रखें जब आप रिकॉर्डिंग कर रहे हों तो आप सिर्फ रिकॉर्डिंग कर रहे हों क्योंकि इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता की आपकी रिकॉर्डिंग पूरी हो जाए और उसके बाद आपको पता चले की कुछ भी रिकॉर्ड नहीं हुआ है चाहे कारण कुछ भी हो. कई कैमरों के पास "रोल-इन टाइम" टेप होता है, जिसका अर्थ है कि जब आप रिकॉर्ड बटन दबाते हैं और जब कैमरा रिकॉर्डिंग प्रारंभ होता है दोनों के बीच में थोड़ा डिले (Delay) होता है.

व्यूफाइंडर के डिस्प्ले में दिखने वाले सभी संकेतों को लगातार देखते रहें. डिस्प्ले में दिखने वाले सभी संकेत के मतलब को जानने की कोशिश करें - वे आपको बहुमूल्य जानकारी दे सकते हैं

दोनों आँखों का उपयोग करें एक प्रोफेशनल व्यक्ति का एक बड़ा कौशल होता है कि वह एक आंख का उपयोग व्यूफाइंडर देखने में करता है वहीं दूसरी आँख से आस-पास के वातावरण पर नज़र रखता है. इसे सीखने में थोडा समय लग सकता है पर शोल्डर शॉट लेते समय या चलते हुए शॉट लेते समय यह तकनीक काफी सहायक सिद्द होती है. 

पीछे की ओर चलना सीखें - किसी को अपनी पीठ के बीच में अपना हाथ रखकर मार्गदर्शन करने को कहें और फिर पीछे चलते हुए शूट करें, ये शॉट्स बहुत अच्छे लग सकते हैं. आपने कई बार न्यूज़ प्रेसेंटर को चलते हुए इंटरव्यू करते हुए देखा होगा उसमे कामेरापरसन इसी तकनीक का उपयोग करता है.

फ्रेम और ऑडियो के बारे में लगातार सोचें – शूटिंग के दौरान फ्रेम कम्पोजीशन और ऑडियो को लगातार चेक करते रहें. 

कैमरे को मूव करने से पहले "रिकॉर्ड या स्टॉप" बटन दबाएं – रिकॉर्डिंग समाप्त होने के एक या दो सेकंड बाद स्टॉप बटन दबाएँ और फिर कैमरा को मूव करें (जैसे की हम फोटोग्राफी में फोटो लेने के बाद करते हैं). 

कुछ और टिप्स जो आपकी शूटिंग में सहायक होगी

शूटिंग के दौरान डिप्लोमेटिक रहें – जिन लोगों को आप शूट कर रहे हैं उनके बारे में सोचें. याद रहे की अधिकाँश लोग कैमरे के सामने थोड़े नर्वस हो जाते हैं ऐसे में आप थोड़ा सख्त रहें पर साथ ही अन्य विकल्पों के बारे में भी सोचें. 

अच्छे शॉट के लिए कब शोर मचाना या गुस्सा होना सही है और कब नहीं ये फैसला लेना सीखना होगा. अगर कोई महतवपूर्ण शॉट है तो उसे बिलकुल सही तरीके से लेने में कुछ लोगों को असुविधा हो सकती है. पर शॉट के लिए अपना नुकसान करवा लेना गलत होगा, ऐसे में उसका विकल्प तलाशें. 

तिथि/समय स्टाम्प फीचर का उपयोग कब करें – यह फीचर लगातार उपयोग करना सही नहीं होगा, इससे शॉट लो क्वालिटी प्रतीत होता है. इसका उपयोग उतनी देर ही करें जितना जरुरी है बाकी समय इसको बंद रखें. आजकल के डिजिटल कैमरों में यह फीचर आसानी से उपयोग किया जा सकता है. 

प्रयोग करने के लिए तैयार रहें - उन कुछ चीजों के बारे में हमेशा सोचें जो आप करने की कोशिश करना चाहते हैं, फिर खली समय में वह चीज़ करने की कोशिश करें (यानी शादी की शूटिंग करते समय प्रयोग न करें) अधिकांश नई तकनीकों को आदत बनाने के लिए अभ्यास और प्रयोग की ज़रूरत होती है और अच्छे कैमरावर्क के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है। 

अगर आप अच्छा काम करना चाहते हैं तो आपको कुछ समय निवेश करना होगा.

Wednesday, 7 June 2017

वीडियो कैमरा – शॉट के प्रकार (Types of Shot)

शॉट का मतलब कम्पोजीशन (Shots are all about composition)

वीडियो उद्योग में एक संस्था है जो आम प्रकार के शॉट्स के नाम रखती है। शॉट्स के नाम और उनके सटीक अर्थ अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन निम्नलिखित उदाहरण मानक विवरणों के लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं। बिंदु यह है कि हमें शॉट के नामों को नहीं जानना है (हालांकि यह भी बहुत उपयोगी है), पर उससे जायदा जरुरी है उसके उद्देश्यों को समझना.

मूल शॉट्स को विषय के संदर्भ में संदर्भित किया जाता है। उदाहरण के लिए, "क्लोज अप शॉट" का मतलब कोई चीज़ करीब होना चाहिए. एक व्यक्ति के चहरे का क्लोजअप भी चेहरे का वाइड शॉट, या नाक के वैरी वाइड शॉट के रूप में वर्णित किया जा सकता है.
शॉट के प्रकार (Basic Shot types) - 
निम्न सभी शॉट्स में विषय एक लड़की है जो एक गार्डन में खड़ी है-



चित्र क्रमांक 5(a)  PC - C.M. Gurjar

एक्सट्रीम क्लोज अप शॉट (Extreme Close up shot) - इस शॉट में विषय के शारीर के किसी एक हिस्से के बारे में अत्यधिक विस्तार से बबताया जाता है. लोगों के लिए, ईसीयू का उपयोग भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किया जाता है. (चित्र क्रमांक 5(a) देखें)

चित्र क्रमांक 5(b)  PC - C.M. Gurjar

क्लोज अप शॉट (Close up shot) – इस शॉट में विषय की एक विशेष विशेषता या किसी भाग को पूरे फ्रेम में रखते हैं. किसी व्यक्ति के करीब होने का अर्थ आम तौर पर उसके चेहरे का करीब होना है. (चित्र क्रमांक 5(b) देखें)

चित्र क्रमांक 5(c)  PC - C.M. Gurjar

मिड क्लोज अप (Mid close up) – यह शॉट क्लोज अप और मिड शॉट के मीच का शॉट होता है यह शॉट चेहरे को और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाता है, बाकी शारीर भी सहज रूप से दीखता है. (चित्र क्रमांक 5(c) देखें).

चित्र क्रमांक 5(d)  PC - C.M. Gurjar

मिड शॉट (Mid Shot) – इसमें विषय के कुछ हिस्से को और अधिक विस्तार से दिखाया जाता है, जिससे दर्शकों को महसूस होता है कि वो जिस विषय को देख रहे हैं वह फ्रेम में पर्याप्त दिख रहा है. वास्तव में, यह एक धारणा है कि अगर आप एक सामान्य वार्तालाप कर रहे हैं तो आप "एक नज़र में" एक व्यक्ति को कैसे देखेंगे. आप उस व्यक्ति के निचले हिस्से पर कोई ध्यान नहीं दे रहे होंगे, इसलिए फ्रेम का वह भाग अनावश्यक है. (चित्र क्रमांक 5(d) देखें).

चित्र क्रमांक 5(e)  PC - C.M. Gurjar

वाइड शॉट (Wide Shot) – इस शॉट में फ्रेम में पूरा विषय दीखता है. व्यक्ति के पैर लगभग फ्रेम के नीचे होते हैं, और उसका सिर लगभग शीर्ष पर होता है. स्पष्ट रूप से इस शॉट में विषय फ्रेम में बहुत कम चौड़ाई कवर करता है, चूंकि फ्रेम विषय के जितने करीब होगा उतना जायदा उसके शारीर का हिस्सा फ्रेम को कवर करेगा. विषय के कुछ भाग ऊपर एवं कुछ भाग निचे को सेफ्टी रूम (हेड स्पेस और फूट स्पेस) कहा जाता है - आप सिर के ऊपर वाले भाग को काटना नहीं चाहेंगे. यह असहज भी दिखाई देगा, यदि फ्रेम में पैर और सीर के ऊपर बिलकुल भी जगह खाली ना हो. (चित्र क्रमांक 5(e) देखें).

चित्र क्रमांक 5(f)  PC - C.M. Gurjar

वैरी वाइड शॉट (Very Wide Shot) – वीडब्ल्यूएस शॉट में विषय दिखाई देता है, परन्तु असल में उसके आस-पास के वातावरण को दिखाने पर जोर दिया जाता है। यह एक स्थापित शॉट (Establish Shot) के रूप में भी काम करता है। (चित्र क्रमांक 5(f) देखें).

चित्र क्रमांक 5(g)  PC - C.M. Gurjar

एक्सट्रीम वाइड शॉट (Extreme Wide Shot) - ईडब्ल्यूएस में, फ्रेम इतनी दूर से दिखाया जाता है जिसमे विषय दिखाई भी नहीं देता है इस शॉट का उद्देश्य विषय के परिवेश को दिखाना होता है. ईडब्लूएस अक्सर एक स्थापित शॉट (Establish Shot) के रूप में उपयोग किया जाता है – इस शॉट को फिल्म के पहले शॉट के रूप में लिया जाता है, दर्शकों को यहाँ बताया जाता है कि आगे होने वाला एक्शन कहाँ पर हो रहा है. (चित्र क्रमांक 5(g) देखें).

चित्र क्रमांक 5(i-1) 

चित्र क्रमांक 5(i-2)

कटअवे शॉट (Cutaway Shot) और कट इन शॉट (Cut-In Shot) - एक कटवे शॉट वह होता है जो आमतौर पर मौजूदा फ्रेम से अलग कोई एक्शन होता है. यह एक अलग विषय हो सकता है या फ्रेम से सम्बंधित कोई एक्शन. वहीं कट इन शॉट फ्रेम के अन्दर के ही किसी भाग का क्लोजअप हो सकता है (जैसे हाथ का मूवमेंट).
(चित्र क्रमांक 5(i-1) देखें - ऊपर दिए गए लड़की के शॉट्स से हटकर ये बच्चे उसी गार्डन में खेल रहे हैं जो की कटअवे का काम करेंगे वहीं चित्र क्रमांक 5(i-2) में लड़की के हाथ का शॉट कट इन शॉट का काम करेगा).
कटअवे और कट इन शॉट को शॉट्स के बीच में “बफर” के रूप में उपयोग किया जाता है (जिससे एडिटिंग में साहयता मिलती है) और अतिरिक्त जानकारी देने या प्रोग्राम को थोड़ा और रोचक बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है.

चित्र क्रमांक 5(j)

टू शॉट (Two Shot) -  इस पर कुछ भिन्नताएं हैं, लेकिन मूल विचार यह है कि वह शॉट जिसमे दो लोग आरामदायक रूप से नज़र आयें. साक्षात्कार में इसका अक्सर प्रयोग किया जाता है, या जब दो प्रस्तुतकर्ता एक शो की मेजबानी कर रहे हैं  विषयों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए टू-शॉट अच्छे हैं. किसी भी इंटरव्यू या स्पोर्ट्स ब्रीफिंग के दौरान इसका उपयोग सबसे जायदा किया जाता है जिसमे दो लोग आपस में एक दूसरे से बात करते हैं , टू शॉट दो लोगों को पेश करने का एक स्वाभाविक तरीका है. (चित्र क्रमांक 5(i-1) और 5(j) देखें).

चित्र क्रमांक 5(k)


ओवर द शोल्डर शॉट (Over the shoulder shot) - यह शॉट उस व्यक्ति के पीछे से बनाया जाता है जो विषय को देख रहा है। इस शॉट में विषय का सामना करने वाले व्यक्ति (जिसके पीछे से शॉट बनाया जा रहा है) को आम तौर पर लगभग 1/3 फ्रेम पर कब्जा होना चाहिए। यह शॉट प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति को स्थापित करने में मदद करता है, और दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण से एक व्यक्ति को देखने का अनुभव मिलता है। दो लोगों की बातचीत के दौरान इन शॉट्स के बीच कट करना आम बात है (चित्र क्रमांक 5(k) में देखें).


चित्र क्रमांक 5(l-1)

चित्र क्रमांक 5(l-2)

पॉइंट ऑफ़ व्यू शॉट (Point of view shot) - यह शॉट विषय के दृष्टिकोण से एक दृश्य को दिखाता है. यह आमतौर पर इस तरह से संपादित किया जाता है जिससे यह स्पष्ट हो कि इसका पॉइंट ऑफ़ व्यू (POV) क्या है.
चित्र क्रमांक 5(l-1) एवं 5(l-2) में देखें.


चित्र क्रमांक 5(h) 

एरियल शॉट (Aerial Shot) - इस शॉट को किसी हवाई उपकरण जैसे ड्रोन या हवाई जहाज से लिया जाता है जिसमे पुरे एक शहर या ग्राउंड या घटनास्थान का चित्र काफी ऊपर से लिया जाता है जिससे उस जगह के और उसके आस पास के पूरे घटनाक्रम का पता चल सके. (चित्र क्रमांक 5(h) देखें).