Monday, 7 May 2018

वीडियो और टेलीविज़न प्रोडक्शन – रिज़ॉल्यूशन (Resolution)


डिजिटल वीडियो में, रिज़ॉल्यूशन का मतलब स्क्रीन पर प्रदर्शित पिक्सल की संख्या है (In digital video, resolution means the number of pixels displayed on screen). तकनीकी रूप दो प्रकार के रिज़ॉल्यूशन उपलब्ध हैं –

1. स्थानिक रिज़ॉल्यूशन (Spatial Resolution) – इसका मतलब है कि फ्रेम की चौड़ाई और ऊंचाई, जिसको पिक्सेल में मापा जाता है। दूसरे शब्दों में, प्रत्येक व्यक्तिगत फ्रेम में निहित पिक्सेल की कुल संख्या.
2. अस्थायी संकल्प (Temporal Resolution) – इसका मतलब है फ्रेम दर (यानी प्रति सेकंड दिखाए गए फ्रेम की संख्या), यानी "रिज़ॉल्यूशन ओवर टाइम".

नोट: वैसे जब तक अन्यथा ना कहा जाए तब तक स्थानिक रिज़ॉल्यूशन (Spatial Resolution) को ही रिज़ॉल्यूशन का मूल मतलब समझा जाता है.

कॉमन रिज़ॉल्यूशन –
वीडियो, टेलीविजन और सिनेमा में कई अलग-अलग रिज़ॉल्यूशन उपलब्ध हैं - नीचे दी गई तालिका उनमें से कुछ को दिखाती है-

Name
Pixels
Aspect Ratio
Standard
Standard Definition (SD)
480p/480i
720x480 (or 704x480)
4:3 (Approx)
NTSC
576p/576i
720x576 (or 704x576)
4:3 (Approx)
PAL
High Definition (HDTV)
720p
1280x720
16:9
 
1080p/1080i
1920x1080
16:9
 
Ultra High Definition (UHDTV)
4K (2160p)
3840x2160
16:9
Exactly 4 x 1080p
8k (4320p)
7680x4320
16:9
Exactly 16 x 1080p
8640p
15360x8640
16:9
Exactly 32 x 1080p
Digital Cinema (DCI)
2k
2048x1080
1:90:1
1st generation of Digital 
Cinema projectors
4k
4096x2160
1:90:1
2nd Generation 
digital cinema


वीडियो और टेलीविज़न प्रोडक्शन – आस्पेक्ट रेश्यो (Aspect Ratio)

आस्पेक्ट रेश्यो (Aspect Ratio) शब्द चित्र (या स्क्रीन) की ऊंचाई के रेश्यो (अनुपात) में उसकी चौड़ाई को संदर्भित करता है (The term Aspect Ratio refers to the width of a picture (or screen) in relation to its height). यह रेश्यो "चौड़ाई x ऊँचाई" (Height x Width) के रूप में व्यक्त किया जाता है. उदाहरण के लिए, एक 4x3 रेश्यो का मतलब है कि तस्वीर की चौड़ाई 4 यूनिट है और ऊंचाई 3 यूनिट है. वैकल्पिक रूप इसको कोलन (Colon) का उपयोग करके भी लिखा जा सकता है (उदाहरण- 4: 3 या 16: 9) या 1 नंबर के रेश्यो का उपयोग करके भी लिखा जा सकता है (उदाहरण के लिए 1.33: 1 या 1.78: 1).

ध्यान दें कि तस्वीर का वास्तविक भौतिक आकार अप्रासंगिक (irrelevant) है – आस्पेक्ट रेश्यो केवल चौड़ाई और ऊंचाई के बीच संबंधों को संदर्भित करता है।

तीन सबसे आम आस्पेक्ट रेश्यो नीचे दिखाए गए हैं। इनके अलावा भी कई आस्पेक्ट रेश्यो उपलब्ध हैं लेकिन अधिकांश वीडियो और फिल्म निर्माण इन प्रारूपों में से ही एक का उपयोग करता है (चित्र क्रमांक 17(a) देखें) –

4:3 (4x3) - 
यह काफी पुराना टेलीविज़न फॉर्मेट है. यह लगभग 20 वीं सदी के मध्य से उपयोग किया जाने वाला क्लासिक टेलीविजन फॉर्मेट है। कभी-कभी 12x 9 के रूप में जाना जाता है.

16:9 (16x9) – 

इस प्रारूप ने वाइडस्क्रीन (Widescreen) टीवी, डीवीडी और हाई डेफिनिशन वीडियो के लिए नए मानक के रूप में स्वीकृति प्राप्त की है.

21:9 (21x9) – 

फिल्मों के लिए उपयोग किया जाने वाला एक बहुत व्यापक स्क्रीन फॉर्मेट है. इसे सिनेमास्कोप (Cinemascope) भी कहते हैं. 

चित्र क्रमांक - 17(a)

Friday, 23 February 2018

वीडियो और टेलीविज़न प्रोडक्शन – विज़न मिक्सर (Vision Mixer)

विज़न मिक्सर (वीडियो स्विचर)
एक विज़न मिक्सर (उर्फ वीडियो स्विचर या प्रोडक्शन स्विचर) का उपयोग कई वीडियो स्रोतों को एक या अधिक मास्टर आउटपुट में मिश्रण करने के लिए किया जाता है. (A device used to mix multiple video sources into one or more master outputs). 

उदाहरण के तौर पर न्यूज़ चैनल में चलने वाले लाइव डिबेट प्रोग्राम के दौरान देखा जा सकता है जब एक साथ कई जगह से कई अलग-अलग लोग बैठकर डिबेट करते हैं और वीडियो स्विचर ऑपरेटर कमांड के अनुसार लगातार ऑन एयर स्क्रीन पर वीडियो बदलते रहता है.

विज़न मिक्सर का आकार और कीमत उसके इनपुट चैनल की संख्या के अनुसार तय होती है. इसके अलावा जिस विज़न मिक्सर में वीडियो के साथ-साथ ऑडियो इनपुट भी उपलब्ध हो उसे हम मास्टर स्विचर कहते हैं. चित्र क्रमांक 16(a) देखें.

चित्र क्रमांक 16(a)

विज़न मिक्सर क्या करता है?
विज़न मिक्सर का मुख्य उद्देश्य लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग या प्रसारण के लिए एक मास्टर आउटपुट बनाना है. आमतौर पर विजन मिक्सर का उपयोग लाइव इवेंट्स, या किसी ऐसे इवेंट को कवर करना है, जहां कई स्रोतों को वास्तविक समय में मिश्रित करने और स्विचिंग करने की आवश्यकता होती है. 

विजन मिक्सर का उपयोग स्विचिंग के दौरान विभिन्न विसुअल इफेक्ट्स डालने के लिए भी किया जा सकता है (जिसमे कि सरल कट, मिक्स और वाइप से लेकर एडवांस कम्पोजिट इफ़ेक्ट भी रहते हैं).

विज़न मिक्सर काम कैसे करता है?
विजन मिक्सर मूलतः ऑडियो मिक्सर के समान होते हैं. यह कई इनपुट स्रोत लेते हैं, कोई भी इच्छित इफ़ेक्ट लागू करते हैं, और एक या अधिक आउटपुट प्रदान करते हैं. 

अधिकांश विज़न मिक्सर प्रोग्राम बस और प्रीव्यू बस की थ्योरी पर काम करते हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास अपना मॉनिटर होता है. (विज़न मिक्सर पैनल पर, बस कई बटन की एक पंक्ति को कहा जाता है). पुराने वीडियो मिक्सर में दो समकक्ष बसें थीं (जिसे ए और बी बस कहा जाता है, ऐसे मिक्सर को ए / बी मिक्सर (A/B Mixer) के रूप में जाना जाता है). इन दो बस का कार्य कुछ इस प्रकार है -

प्रोग्राम बस – यह मुख्य आउटपुट फीड होती है (मतलब वह वीडियो जो रिकॉर्ड या ब्रॉडकास्ट किया जाना है) जो भी वीडियो सोर्स प्रोग्राम बस पर होता है उसे ऑनलाइन कहते हैं. (वह वीडियो जो आपको टीवी पर दीखता है).
प्रीव्यू बस – प्रीव्यू बस उस स्रोत का चयन करने और प्रीव्यू करने के लिए उपयोग किया जाता है जो ऑनलाइन किया जाने वाला है. 

इसके अलावा एक तीसरी बस जिसे कंपोजिटिंग के लिए उपयोग किया जाता है उसे की-बस (Key bus) कहते हैं. एक मिक्सर में एक से अधिक की-बस हो सकती है, लेकिन अक्सर वे केवल एक ही बटन-सेट शेयर करते हैं

विज़न मिक्सर की एक और मुख्य विशेषता ट्रांजीशन लीवर है, जिसे टी-बार या फ़ेडर बार भी कहा जाता है। एक ऑडियो फेडर के समान यह लीवर, दो बसों के बीच ट्रांजीशन के लिए उपयोग किया जाता है।
डिजिटल वीडियो मिक्सर में एक स्क्रीन होती है जिसमे सभी बटन और कण्ट्रोल या फाइनल आउटपुट को देख सकते हैं. चित्र क्रमांक 16(b) देखें.

चित्र क्रमांक 16(b)

वीडियो स्विचर ऑपरेटर का कार्य – 
वीडियो स्विचर ऑपरेटर निर्देशक या प्रोड्यूसर से अपने निर्देश लेता है। असल में, निर्देशक यह तय करता है कि कब कौनसी वीडियो फीड ओन एयर (on air) जायेगी और स्विचर को यह करने के लिए कहता है। निर्देशों का एक विशिष्ट सेट इस तरह से हो सकता है:

Directors Instruction: Meaning:
“1 next” Preview Camera 1 and prepare to put it online 
“Take” Cut Camera 1 online
“2 next” Preview Camera 2 and prepare to put it online 
“Take” Mix Camera 2 online
etc.

Friday, 22 December 2017

वीडियो और टेलीविज़न प्रोडक्शन – कैमरा कण्ट्रोल यूनिट (Camera Control Unit)


सीसीयू (कैमरा कंट्रोल यूनिट) - प्रत्येक स्टूडियो कैमरा के पास अपना स्वयं का सीसीयू (कैमरा कंट्रोल यूनिट) होता है. सीसीयू दो मुख्य कार्य करता है: सेटअप और नियंत्रण
सेटअप के दौरान प्रत्येक कैमरा को सही रंग प्रस्तुति के लिए एडजस्ट किया जाता है- सफेद संतुलन, जिसमे एक दृश्य के सबसे उजले भाग और अंधेरे वाले भाग के बीच उचित कंट्रास्ट समन्वयन किया जाता है ।

सीसीयू वीडियो / टेलीविज़न कैमरे के कार्यों के रिमोट कंट्रोल से जुड़े कई उपकरणों और कार्यों को संदर्भित करता है. इसमें आंशिक या पूर्ण कैमरा नियंत्रण शामिल हो सकते हैं. सीसीयू संचालन कई प्रकार के टेलीविजन उत्पादन में एक महत्वपूर्ण घटक है, विशेष रूप से मल्टी कैमरा प्रस्तुतियों में सीसीयू का संचालन करने वाला व्यक्ति सीसीयू ऑपरेटर या वीडियो ऑपरेटर (VO), विज़न नियंत्रक (VC) या (कुछ मामलों में) तकनीकी निदेशक (TD) के रूप में जाना जाता है.

कलर सिग्नल चेक करने के लिए सीसीयू ऑपरेटर के पास दो उपकरण होते हैं -

1. वेवफॉर्म मॉनिटर (Waveform Monitor) – इसको oscilloscope भी कहते हैं. यह ल्युमिनेंस (Luminance) यानी ब्राइटनेस की जानकारी देता है. 

2. वेक्टर स्कोप (Vector Scope)यह क्रोमिनेंस (Chrominance) यानि कलर की जानकारी देता है.

आंशिक सीसीयू कण्ट्रोल (Partial CCU Control) - टेलीविजन उत्पादन में कैमरे के कार्यों को नियंत्रित करने के लिए यह एक सामान्य विधि है। यह एक पेशेवर दृष्टिकोण है, जो अधिकतम नियंत्रण और गुणवत्ता के लिए अनुमति देता है।

अधिकांश कैमरा फ़ंक्शंस (फ़्रेमिंग, फ़ोकस, आदि) आम तौर पर एक कैमरा ऑपरेटर द्वारा नियंत्रित होते हैं, जबकि कुछ फ़ंक्शन (रंग संतुलन, शटर गति, आदि) सीसीयू ऑपरेटर द्वारा दूर से रिमोट द्वारा नियंत्रित होते हैं। इससे कैमरा ऑपरेटर तकनीकी मुद्दों से विचलित हुए बिना फ्रेम और कम्पोजीशन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उसी समय सीसीयू ऑपरेटर, जो तकनीकी मुद्दों में अधिक विशेषज्ञ है, चित्रों की गुणवत्ता और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर सकता है. मल्टी-कैमरा प्रोडक्शन में सीसीयू ऑपरेटर आमतौर पर एक से अधिक कैमरे के लिए जिम्मेदार होता है (2-3 कैमरे सामान्य हैं, लेकिन 10 तक संभव है)। जाहिर है एक बड़े प्रोडक्शन में कई सीसीयू ऑपरेटरों की आवश्यकता हो सकती है। उदाहरण के लिए, एक 20-कैमरे के प्रसारण में 5 सीसीयू ऑपरेटर हो सकते हैं, प्रत्येक को 4 कैमरों को नियंत्रित करना पड़ सकता है.

नीचे दी गई तस्वीर (चित्र क्रमांक 15 (a) देखें) सीसीयू ऑपरेटर के सामने डेस्क कार्यक्षेत्र में एम्बेडेड चार सीसीयू नियंत्रकों के एक बैंक को दिखाती है। ऑपरेटर के सामने प्रत्येक कैमरे से चित्र दिखाने वाले चार मॉनिटर हैं। ये नियंत्रण अपेक्षाकृत उन्नत हैं और सीसीयू ऑपरेटर को निम्नलिखित की अनुमति देते हैं:
  • आईरिस, शटर गति, ब्लैक लेवल, गेन, आदि को नियंत्रित करें 
  • रंग संतुलन (Color Balance) एडजस्ट करें 
  • तकनीकी मापदंडों की एक विस्तृत श्रृंखला को एडजस्ट और मॉनिटर करें 
  • कैमरा ऑपरेटर को सिग्नल भेजें 
चित्र क्रमांक 15 (a) 
पूर्ण रिमोट कैमरा नियंत्रण (Complete remote camera control) - उच्च-प्रदर्शन वाले रिमोट-नियंत्रित कैमरों के आगमन के बाद से, सीसीयू में भी कैमरा यूनिट उपलब्ध है जो सीसीयू ऑपरेटर द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित होते हैं. ऐसे नियंत्रकों में पैन / टिल्ट व, ज़ूम और फोकस नियंत्रणों के अलावा, ऊपर उल्लिखित किसी भी सुविधा शामिल हो सकती है। 

Saturday, 18 November 2017

वीडियो कैमरा – व्यूफाइंडर (Viewfinder)

कैमरे के व्यूफाइंडर को कैसे सेट अप और उपयोग करना है

यह पोस्ट काले और सफेद (Black and White) इलेक्ट्रॉनिक व्यूफाइंडर (ईवीएफ) से संबंधित है, हालांकि रंगीन व्यूफाइंडर (Color Viewfinder) मूल रूप से उसी तरह काम करते हैं। (चित्र क्रमांक 14(a) देखें). 

विभिन्न कैमरों में ईवीएफ को एडजस्ट करने के लिए कई विकल्प हैं। उपभोक्ता कैमकोर्डर (Consumer Camcorder) आमतौर पर फोकस / शार्पनेस एडजस्ट करने तक सीमित है, जबकि पेशेवर कैमरों में कई विकल्प हैं निम्नलिखित प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्य करें, उन कार्यों की अनदेखी करें जो आपके कैमरे पर उपलब्ध नहीं हैं। 

चित्र क्रमांक 14(a) 
व्यूफाइंडर के ब्राइटनेस और कंट्रास्ट सेट करने के लिए - 
1. कैमरा को कलर बार (Color Bar) विकल्प में स्विच करें.
2. व्यूफाइंडर की ब्राइटनेस और कंट्रास्ट को तब तक एडजस्ट करें जब तक कि स्मूथ ग्रेस्केल नहीं देखते हैं सफेद रंग से काले रंग तक । इसके अलावा आपको प्रत्येक कलर बार के बीच में एक विभाजन रेखा (dividing line) दिखाई देनी चाहिए।
3. अब कैमरा को वापस पिक्चर पर स्विच करें.
4. एक प्रोफेशनल मॉनिटर पर अपने एक्सपोजर की जांच करें, या तो कैमरे के आउटपुट से केबल को कनेक्ट करके या एक टेस्ट रिकॉर्ड करके.

इलेक्ट्रॉनिक व्यूफाइंडर पर कुछ नोट्स -
1. पेशेवर कैमकॉर्डर (Professional Camcorder) में आम तौर पर काले और सफेद EVFs का उपयोग करते हैं उपभोक्ता कैमकोर्डर के साथ रंगीन ईवीएफ अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं
2. ईवीएफ अधिकतर WYSIWYG (What you see is what you get) की तर्ज पर काम करता है । इसका मतलब यह है कि अगर व्यूफाइंडर में दिख रही इमेज की ब्राइटनेस बदलती है, तो रिकॉर्ड किए गए सिग्नल में भी ब्राइटनेस बदलती है. एक बार आपके व्यूफाइंडर को सही ढंग से सेट-अप करने के बाद, आप अपनी तस्वीर की गुणवत्ता को सिर्फ देखकर ही न्याय कर सकते हैं (यानी यह कि आपका एक्सपोजर सही है या नहीं, यह देखने के लिए एफ-स्टॉप सूचक का उपयोग करने की आवश्यक नहीं है)।
3. व्यूफाइंडर में दिखाई देने वाले संदेश आपको बहुमूल्य जानकारी देते हैं. इन सभी का मतलब क्या है यह समझने की कोशिश करें.
4. यदि आपका व्यूफाइंडर फॉगिंग कर रहा है, तो अपनी आंख को आई-पिस (Eye piece) से थोड़ा दूर रखें। साथ ही, आपके तरल पदार्थों के सेवन को सीमित करें - यह पसीने को कम करता है, जो कि फॉगिंग का मुख्य कारण होता है.
5. कई व्यूफाइंडर आइपीस को खोला या फ़्लिप किया जा सकता है, जिससे आप कैमरे से थोडा दूर खड़े हो सकते हैं। यह और जायदा उपयोगी हो सकता है जब अगर आपके पास कैमरा ट्राईपोड पर रखा हो, या अगर एक से अधिक व्यक्ति व्यूफाइंडर को देखना चाहते हैं. यह आंखों की थकान को कम करने में भी मदद कर सकता है।

ज़ेबरा स्ट्राइप्स – 
ज़ेबरा स्ट्राइप्स या ज़ेबरा, पेशेवर कैमरों की एक विशेषता है जो एक्सपोजर स्तरों (Exposure Level) का संकेत देते हैं। जब यह सक्रिय होता है, तब विकर्ण लाइन (Diagonal Line) चित्र के किसी भी हिस्से में प्रकट होती है जो ओवर-एक्सपोजर का सन्देश देती है. चित्र क्रमांक 14(b) में देखें.
ये लाइन्स केवल व्यूफाइंडर में दिखाई देती हैं- वे कैमरे से आउटपुट लेने पर या रिकॉर्ड करने पर दिखाई नहीं देतीं. 

चित्र क्रमांक 14(b) 
ज़ेबरा स्ट्रिप्स को सेट करने के लिए-
ज़ेबरा स्ट्राइप्स को चालू करने के लिए "ज़ेबरा स्ट्रिप्स" लेबल वाला स्विच को चालू कीजिये. 
अगर कैमरा में विभिन्न ज़ेबरा सेटिंग्स (जैसे 75% या 100%) के बीच बदलने का विकल्प है, तो आपको पता होना चाहिए कि आप किस सेटिंग का उपयोग कर रहे हैं, और उसके परिणाम क्या होंगे.



Tuesday, 31 October 2017

वीडियो कैमरा – ट्राईपोड (Tripod)

कैसे सही ट्राईपोड का चयन करें और इसे प्रभावी रूप से उपयोग करें

ट्राईपोड (Tripod) क्या है - ट्राईपोड सभी प्रकार के फील्डवर्क के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है भले ही आप एक स्टूडियो कैमरे के समर्थन के लिए भारी ट्राईपोड का उपयोग करें या फ़ील्ड कैमरा या कैमकॉर्डर के लिए हल्के ट्राईपोड का उपयोग करें, यह सभी ट्राईपोड एक ही प्रिंसिपल पर काम करते हैं: उनके पास तीन पैर (पोड) होते हैं जिन्हें अलग-अलग ऊपर या नीचे किया जा सकता है. जिससे कैमरा लेवल में रहे चाहे फिर वह एक अनियमित सतह पर हो जैसे कि एक उबड़-खाबड़ मार्ग, पहाड़ या सीढ़ियां. (चित्र क्रमांक 13(a) देखें). 

चित्र क्रमांक 13(a)

इसके अलावा इन तीन पॉड्स से एक हेड (Head) जुड़ा होता है. ट्राईपोड का हेड वह हिस्सा है जो कैमरे से बेस-प्लेट (Base Plate) के माध्यम से जुड़ता है और कैमरे को मूवमेंट प्रदान करता है. हेड की गुणवत्ता निर्धारित करती है कि आपका वीडियो कितना अच्छा होगा और कैमरा मूवमेंट्स कितने स्मूथ होंगें. इसके पैरों के निचले भाग में स्पाइक (Spike) और/या रबर कैप (Rubber Cap) लगा होता है जिससे ट्राइपोड फिसलता नहीं है.

ट्राईपोड (Tripod) का उपयोग कब करें - जब आप एक कैमकॉर्डर का इस्तेमाल किसी न्यूज़ रिपोर्ट या किसी घरेलु वीडियो के लिए करते हैं तब आप अधिकतर इसे अपने हाथों से या अपने कंधे पर रख कर शूट करते होंगे, पर जब अधिक सटीक और गंभीर काम की आवश्यकता होती है, तब आपको ट्राईपोड (Tripod) का उपयोग करना चाहिए. चाहे क्यों ना आपका कैमरा छोटा और हल्का हो पर जब भी मुमकिन हो कैमरा को ट्राईपोड पर रखकर ही शूटिंग करें.

अब सवाल यह है की जब हम हाथ से और कंधे पर रखकर हर तरह के मूवमेंट के साथ (चाहे वो टिल्ट हो या पैन) सारे शॉट बना सकते हैं तो फिर ट्राईपोड की क्या आवश्यकता है, तो इसको समझने के लिए ट्राईपोड के कुछ फायदे इस प्रकार हैं– 

1. एक ट्राईपोड के साथ शूट करने पर आप जितनी देर चाहे बिना थके कैमरे का संचालन करने में सक्षम होंगे क्योंकि कई बार हाथ से शूट करने पर एक छोटा सा कैमकॉर्डर भी कुछ देर की शूटिंग करने के बाद बेहद भारी लगने लगता है.
2. ट्राईपोड का उपयोग करने से अनचाहे मूवमेंट्स (जो हाथ के हिलने या कहीं ठोकर लगने से आ सकते हैं) से बचाव होगा और आपके शॉट जायदा स्थिर और प्रभावी बनेंगे.
3. अगर आप हाथ से शूट करने में माहिर भी हैं तब भी ट्राईपोड आपके शॉट को जायदा स्थिर बनाने में मदद करता है.

ट्राईपोड पार्ट्स – 

ट्राईपोड सभी प्रकार के फील्डवर्क के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। स्टूडियो कैमरा के लिए भारी ट्राईपोड का उपयोग होता है वहीं फिल्ड वर्क के लिए हल्के ट्राईपोड का प्रयोग किया जाता है. यह सभी ट्राईपोड एक ही प्रिंसिप्ल पर काम करते हैं – जिसमे एक ट्राईपोड हेड (Tripod Head) और तीन पोड (Three legs/pods) का एक सेट शामिल है. आम तौर पर ये अलग-अलग घटक होते हैं, हालांकि उपभोक्ता स्तर के ट्राईपोड में आमतौर पर हेड और पैर एक साथ जुड़े होते हैं. सही हेड चुनना और समझना कि यह कैसे काम करता है यह बहुत महत्वपूर्ण है.

सही ट्राईपोड का चुनाव कैसे करें - 

ट्राईपोड चुनते समय किसी भी तरह से उसकी गुणवत्ता से समझौता ना करें क्योंकि कई मामलों में एक अच्छा ट्राईपोड आपके कैमरे की गुणवत्ता को बड़ा देता है – 

अच्छे ट्राईपोड में तीन पैर या पॉड्स लगे होते हैं साथ ही एक हेड भी अलग से जुड़ा होता है. उपभोक्ता स्तर के ट्राईपोड में यह दोनों एक ही यूनिट होते हैं वहीँ व्यसायिक स्तर के कैमरा में यह दोनों अलग-अलग मिलते हैं जिससे इसको एडजस्ट करने में जायदा मदद मिलती है और कई परिस्थितियों में पॉड्स को हेड से पहले बदलने की आवश्यकता होती है. 

चित्र क्रमांक 13(b)
ट्राईपोड हेड - 

अधिकांश हेड फ्लूइड हेड (Fluid Head) होते हैं जो इंटरनल फ्लूइड या तरल पदार्थ का काम करते हैं जिससे हेड में चिकनाहट बनी रहती है और कैमरा मूवमेंट में आसानी होती है. सस्ते हेड में ड्रैग करने की क्षमता ना के बराबर होती है. अच्छे हेड में ड्रैग करने के बेहतर नियंत्रण होते हैं और आपको कैमरा मूवमेंट जैसे टिल्ट और पैनिंग के लिए अलग-अलग विकल्प मिलते हैं.  (चित्र क्रमांक 13(b) देखें)
हेड को चलाके जरुर देखें. जब कैमरा मूवमेंट करें तो यह ध्यान रखें हेड का मूवमेंट भी आसानी से होना चाहिए बिना किसी रुकावट के.

इसके अलावा अच्छे ट्राईपोड में काउंटर बैलेंस (Counterbalance system) होता है जो कैमरे को संतुलित रखने में मदद करता है. यदि आपके पास बड़े या असंतुलित कैमरा हैं तो यह आपके कैमरे को आगे या पीछे करने के बेहतर विकल्प भी देता है जिससे शूटिंग के दौरान कैमरा का संतुलन बनाये रखने में भी मदद करता है. 



लेग्स या पॉड्स –

चित्र क्रमांक 13(c)
स्पष्ट रूप से कैमरे के वजन को रखने के लिए पैरों को काफी मजबूत होना चाहिए। यदि ऐसा कोई मौका आता है जहाँ आपको बाद में अपने कैमरे में (जैसे ऑडियो उपकरण, बड़े लेंस, आदि) किसी भी बाह्य उपकरणों को जोड़ना चाहते हैं तो ट्राईपोड उन्हें भी समायोजित करने में सक्षम होना चाहिए. (चित्र क्रमांक 13(c)देखें.)

ऊंचाई रेंज – ट्राईपोड सबसे कम और सबसे ऊपर वाले पॉइंट की जांच करें, जहाँ ट्राईपोड को निर्धारित किया जा सकता है। एक ट्राईपोड जो कम से कम अपने सामान्य आँख के स्तर से थोड़ा अधिक जा सकते हैं तो वह अच्छा है।

वजन महत्वपूर्ण है अगर आप चारों ओर घूमने की योजना बनाते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले लेग्स आम तौर पर भारी होते हैं, लेकिन आधुनिक ट्राईपोड अक्सर वजन कम करने के लिए कार्बन फाइबर जैसे समग्र सामग्रियों का उपयोग करते हैं।

अंत में, जांच करें कि जो ट्राईपोड आप ले रहे हैं उसे सेट करना आसान है या नहीं? आप जल्दी से सेट और पैकअप करने में सक्षम होना चाहिए.


ट्राईपोड को सेट करना – 

चित्र क्रमांक 13(d)
ट्राईपोड के पैरों का खोलें और स्प्रेडर को एडजस्ट करें और पैरों पर लगे हुक को खोलकर इच्छित ऊंचाई तक लेके जाएँ. यदि आप तेज हवाओं में काम कर रहे हैं, तो आप पैरों या स्प्रेडर पर रेत के बैग आदि डालकर ट्राईपोड को स्थिर कर सकते हैं। यदि स्प्रेडर आपके सेटअप में बाधा डाल रहे हैं, तो आप उन्हें हटा भी सकते हैं.

पेशेवर कैमरे और ट्राईपोड हेड दोनों एक प्लेट के साथ आते हैं जिसे बेस प्लेट (Base Plate) कहते हैं जो कैमरे के निचले भाग में लगती है. इस बेस प्लेट को ट्राई पोड हेड पर जोड़ा जाता है, इस प्रकार कैमरे को ट्राईपोड से जोड़ा जाता है. (चित्र क्रमांक 13(d) देखें)

ट्राईपोड के पैन / टिल्ट नॉब को एडजस्ट करें. ट्राईपोड के हैंडल को आम तौर पर दाहिने हाथ से संचालित किया जाता है, जबकि बाएं हाथ कैमरे के फंक्शन (फ़ोकस, आईरिस, आदि) को संचालित किया जाता है. अगर आप कैमरे में सहायक उपकरण जैसे रिमोट ज़ूम या फ़ोकस नियंत्रण को जोड़ना चाहते हैं तो यह जरुर सोचिये की ट्राईपोड की पोजीशन कहाँ रखनी है क्योंकि ऐसा करने पर आप कैमरे को तुरंत रिलीज़ नहीं कर सकेंगे.

ट्राईपोड के हेड के नीचे एक नॉब होता है जिसको ढीला करने से हेड के स्तर को एडजस्ट कर सकते हैं. यदि हेड में स्पिरिट लेवल (Spirit Level) का विकल्प है, तो आप इसे एक गाइड के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

Friday, 8 September 2017

वीडियो कैमरा – वाइट बैलेंस (White Balance)

सही कलर सेट करने के लिए वाइट बैलेंस कैसे करें

वाइट बैलेंस का मूल रूप से अर्थ कलर बैलेंस ही है. यह एक ऐसा फंक्शन है जो कैमरे को "ट्रू वाइट" का संदर्भ देता है - यह कैमरे को बताता है कि सफेद रंग किस तरह दिखता है, जिसके बाद ही कैमरा इसे सही ढंग से रिकॉर्ड कर पाता है. चूंकि सफेद रंग अन्य सभी रंगों का योग है, इसलिए कैमरा को एक बार सफ़ेद रंग की पहचान हो जाए तो कैमरा बाकी सभी रंगों को सही ढंग से प्रदर्शित/रिकॉर्ड कर सकेगा.

गलत वाइट बैलेंस नारंगी या नीले रंग के चित्रों के रूप में दिखाए देते हैं, जैसा कि निम्नलिखित उदाहरणों के द्वारा दिखाया गया है: चित्र क्रमांक - 12 (a) में देखें.

चित्र क्रमांक - 12 (a)

अधिकांश उपभोक्ता स्तरीय कैमकोर्डर में "ऑटो-व्हाइट बैलेंस" सुविधा होती है, इसमें कैमरा ऑपरेटर से किसी तरह का इनपुट लिए बिना कैमरा खुद ही वाइट बैलेंस कर लेता है। वास्तव में, बहुत कम होम-वीडियो उपयोगकर्ता इसकी मौजूदगी से अवगत हैं। दुर्भाग्य से, ऑटो-व्हाइट बैलेंस विशेष रूप से विश्वसनीय नहीं है और आमतौर पर यह फ़ंक्शन मैनुअल रूप से करने पर ही बेहतर रिजल्ट देता है.

मैनुअल व्हाइट बैलेंस कब और कैसे करें
आपको प्रत्येक शूटिंग की शुरुआत में इस प्रक्रिया को करना चाहिए और साथ ही जब भी प्रकाश की स्थिति बदलती है तब भी इसको करना आवश्यक है. जब आप घर के अंदर से शूट करने के बाद बाहर शूट के लिए निकलते हैं तब भी दोबारा वाइट बैलेंस करना चाहिए साथ ही एक कमरे से दुसरे कमरे में जाते समय भी अलग-अलग प्रकार की रोशनी होती है ऐसे में भी वाइट बैलेंस करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सुबह-सुबह और देर शाम के दौरान, डेलाइट अपना रंग जल्दी-जल्दी और महत्वपूर्ण रूप से बदलता है (हालांकि आपकी आंखें ध्यान नहीं देती हैं, पर आपका कैमरा देता है)। 

इन सभी लाइट की स्थिति बदले पर नियमित रूप से वाइट बैलेंस करें-

आपको मैनुअल वाइट बैलेंस फंक्शन वाले एक कैमरा की आवश्यकता होगी जिस पर एक "वाइट बैलेंस" बटन या स्विच होना आवश्यक है.

1. अगर आपके कैमरे में फिल्टर व्हील है (या यदि आप ऐड-ऑन फिल्टर का उपयोग करते हैं), तो सुनिश्चित करें कि आप प्रकाश की स्थिति के अनुसार सही फिल्टर का उपयोग कर रहे हैं.
2. अपने कैमरे को एक शुद्ध सफेद विषय या कागज़ पर इंगित करके उस पर इस तरह ज़ूम इन करें, ताकि आपको व्यूफाइंडर में सिर्फ सफेद रंग ही दिखाई दे. इस बात पर अलग-अलग राय हो सकती है कि फ्रेम में कितना सफेद रंग होना चाहिए - लेकिन हमने पाया है कि लगभग 50-80% फ़्रेम वाइट होना भी सही है (सोनी के अनुसार फ्रेम की चौड़ाई का 80% वाइट होना सही है). विषय नॉन रेफ्लेक्टिव होना चाहिए.
3. अब एक्स्पोसर सेट करें और फिर फोकस करें.
4. वाइट बैलेंस का बटन दबाकर या स्विच उठाकर उसे सक्रिय करें। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कैमरे में कुछ सेकंड लग सकते हैं, जिसके बाद आपको व्यूफाइंडर में इसके पूरा होने का एक मेसेज (या आइकन) प्राप्त होगा.

उम्मीद है कि यह आपको बताएगा कि वाइट बैलेंस सफल हुआ है - इस मामले में, कैमरा मौजूदा कलर बैलेंस को जब तक बनाए रखेगा जब तक फिर से वाइट बैलेंस की प्रक्रिया ना की जाये या प्रकाश की स्थिति ना बदले.

यदि व्यूफाइंडर में यह संदेश आता है कि वाइट बैलेंस विफल हो गया है, तो आपको यह पता लगाना होगा कि ऐसा क्यों हुआ. इसका एक कारण "कलर टेम्परेचर का बहुत अधिक" (जिस स्थिति में फ़िल्टर बदल जाता है) होना भी हो सकता है या आईरिस में कम या अधिक करने से भी हो सकता है.