Friday, 8 September 2017

वीडियो कैमरा – वाइट बैलेंस (White Balance)

सही कलर सेट करने के लिए वाइट बैलेंस कैसे करें

वाइट बैलेंस का मूल रूप से अर्थ कलर बैलेंस ही है. यह एक ऐसा फंक्शन है जो कैमरे को "ट्रू वाइट" का संदर्भ देता है - यह कैमरे को बताता है कि सफेद रंग किस तरह दिखता है, जिसके बाद ही कैमरा इसे सही ढंग से रिकॉर्ड कर पाता है. चूंकि सफेद रंग अन्य सभी रंगों का योग है, इसलिए कैमरा को एक बार सफ़ेद रंग की पहचान हो जाए तो कैमरा बाकी सभी रंगों को सही ढंग से प्रदर्शित/रिकॉर्ड कर सकेगा.

गलत वाइट बैलेंस नारंगी या नीले रंग के चित्रों के रूप में दिखाए देते हैं, जैसा कि निम्नलिखित उदाहरणों के द्वारा दिखाया गया है: चित्र क्रमांक - 12 (a) में देखें.

चित्र क्रमांक - 12 (a)

अधिकांश उपभोक्ता स्तरीय कैमकोर्डर में "ऑटो-व्हाइट बैलेंस" सुविधा होती है, इसमें कैमरा ऑपरेटर से किसी तरह का इनपुट लिए बिना कैमरा खुद ही वाइट बैलेंस कर लेता है। वास्तव में, बहुत कम होम-वीडियो उपयोगकर्ता इसकी मौजूदगी से अवगत हैं। दुर्भाग्य से, ऑटो-व्हाइट बैलेंस विशेष रूप से विश्वसनीय नहीं है और आमतौर पर यह फ़ंक्शन मैनुअल रूप से करने पर ही बेहतर रिजल्ट देता है.

मैनुअल व्हाइट बैलेंस कब और कैसे करें
आपको प्रत्येक शूटिंग की शुरुआत में इस प्रक्रिया को करना चाहिए और साथ ही जब भी प्रकाश की स्थिति बदलती है तब भी इसको करना आवश्यक है. जब आप घर के अंदर से शूट करने के बाद बाहर शूट के लिए निकलते हैं तब भी दोबारा वाइट बैलेंस करना चाहिए साथ ही एक कमरे से दुसरे कमरे में जाते समय भी अलग-अलग प्रकार की रोशनी होती है ऐसे में भी वाइट बैलेंस करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सुबह-सुबह और देर शाम के दौरान, डेलाइट अपना रंग जल्दी-जल्दी और महत्वपूर्ण रूप से बदलता है (हालांकि आपकी आंखें ध्यान नहीं देती हैं, पर आपका कैमरा देता है)। 

इन सभी लाइट की स्थिति बदले पर नियमित रूप से वाइट बैलेंस करें-

आपको मैनुअल वाइट बैलेंस फंक्शन वाले एक कैमरा की आवश्यकता होगी जिस पर एक "वाइट बैलेंस" बटन या स्विच होना आवश्यक है.

1. अगर आपके कैमरे में फिल्टर व्हील है (या यदि आप ऐड-ऑन फिल्टर का उपयोग करते हैं), तो सुनिश्चित करें कि आप प्रकाश की स्थिति के अनुसार सही फिल्टर का उपयोग कर रहे हैं.
2. अपने कैमरे को एक शुद्ध सफेद विषय या कागज़ पर इंगित करके उस पर इस तरह ज़ूम इन करें, ताकि आपको व्यूफाइंडर में सिर्फ सफेद रंग ही दिखाई दे. इस बात पर अलग-अलग राय हो सकती है कि फ्रेम में कितना सफेद रंग होना चाहिए - लेकिन हमने पाया है कि लगभग 50-80% फ़्रेम वाइट होना भी सही है (सोनी के अनुसार फ्रेम की चौड़ाई का 80% वाइट होना सही है). विषय नॉन रेफ्लेक्टिव होना चाहिए.
3. अब एक्स्पोसर सेट करें और फिर फोकस करें.
4. वाइट बैलेंस का बटन दबाकर या स्विच उठाकर उसे सक्रिय करें। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कैमरे में कुछ सेकंड लग सकते हैं, जिसके बाद आपको व्यूफाइंडर में इसके पूरा होने का एक मेसेज (या आइकन) प्राप्त होगा.

उम्मीद है कि यह आपको बताएगा कि वाइट बैलेंस सफल हुआ है - इस मामले में, कैमरा मौजूदा कलर बैलेंस को जब तक बनाए रखेगा जब तक फिर से वाइट बैलेंस की प्रक्रिया ना की जाये या प्रकाश की स्थिति ना बदले.

यदि व्यूफाइंडर में यह संदेश आता है कि वाइट बैलेंस विफल हो गया है, तो आपको यह पता लगाना होगा कि ऐसा क्यों हुआ. इसका एक कारण "कलर टेम्परेचर का बहुत अधिक" (जिस स्थिति में फ़िल्टर बदल जाता है) होना भी हो सकता है या आईरिस में कम या अधिक करने से भी हो सकता है.

Thursday, 7 September 2017

वीडियो कैमरा – ज़ूम (Zoom)

प्रभावी ज़ूमिंग की टिप्स और वही प्रभाव पाने के वैकल्पिक तरीके

ज़ूम एक ऐसा फ़ंक्शन होता है जो आपके विषय (Object) को आपके करीब, या दूर करता है, । इसका प्रभाव (Effect) बिलकुल वैसा ही है जैसे कैमरे को करीब या अधिक दूर ले जाते समय होता है. दो सबसे आम ज़ूम मैकेनिज्म (Mechanism) नीचे दिए गए हैं:

1. मैनुअल ज़ूम रिंग (Manual Zoom Ring) - यह ज़ूम रिंग वीडियो कैमरा के लेंस हाउसिंग पर होती है जिसे मैन्युअल रूप से घुमाया जाता है, विशेष रूप से बाएं अंगूठे (Thumb) और तर्जनी उंगली (Index Finger) द्वारा।

फायदे: गति (आप सुपर-फास्ट ज़ूम कर सकते हैं); इसमें पॉवर की आवश्यकता नहीं है (इससे कैमरे की बैटरी की बचत होती है)
नुकसान: नियंत्रण करना थोडा कठिन होता है; स्मूथ ज़ूम करना थोडा मुश्किल होता है.

2. सर्वो ज़ूम लीवर (Servo Zoom Lever) - यह एक लीवर है जो लेंस हाउसिंग पर लगा होता है. जब आप अपने दाहिने हाथ को पकड़ के बेल्ट में स्लाइड करते हैं, तो सर्वो ज़ूम को आप अपनी पहली दो उंगलियों से चला सकते हैं. लीवर के सामने के हिस्से को दबाकर ज़ूम इन करें, पीछे के हिस्से को दबाकर ज़ूम आउट करें। सस्ते कैमरे में आमतौर पर एक ज़ूम गति होती है, जबकि एक अच्छे कैमरे में सर्वो ज़ूम में गति बदली जा सकती है. लीवर को T (टेली) और W (वाइड) भी बोल सकते हैं. 
फायदे: अधिकांश स्थितियों में उपयोग करने में आसान; स्मूथ ज़ूम करने में आसन होता है. 
नुकसान: बैटरी पावर का उपयोग करता है; निश्चित गति तक सीमित हो सकता है.


चित्र क्रमांक - 11(a)

ज़ूम लेंस की एक महत्वपूर्ण विशेषता है जिससे आपको अवगत होना चाहिए: जितना जायदा आप ज़ूम-इन करते हैं उतना ही अधिक कठिन फ्रेम को स्थिर करना हो जाता है, इसलिए जायदा अधिक ज़ूम इन करते समय ट्राईपोड का उपयोग करना चाहिए. यदि आपको अपना शॉट स्थिर रखने में परेशानी हो रही है, तो अपने आप को विषय के करीब ले जाएँ और फिर ज़ूम आउट करें. इस तरह आपको वही फ्रेम मिलेगा पर उससे जायदा स्थिर होगा.

ज़ूम एक ऐसा फंक्शन है जिसे हर कोई उपयोग करता है और आप इसके साथ बहुत कुछ कर सकते हैं, यही कारण है कि प्रोडक्शन के दौरान इसका बहुत अधिक उपयोग किया जाता है पर ज़ूम का उपयोग करने पर हम जो सबसे आम सलाह देते हैं, वह यह है कि इसका उपयोग कम से कम करें.
यह वीडियो कैमरा का बहुत अच्छा फंक्शन है, लेकिन जब आपके अधिकतर शॉट्स में ज़ूमिंग इन और जूमिंग आउट होगा, तो आपके दर्शकों को मतभेद महसूस होगा.

एक नियम के अनुसार, जूम का उपयोग तब तक ना करें जब तक कि इसके लिए कोई कारण नहीं है। यदि आप एक ही शॉट में पुरे दृश्य का विवरण साथ ही कुछ क्लोज-अप विवरण भी दिखाना चाहते हैं, तो आपको ज़ूम इन करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, एक वाइड शॉट शूट करें, रिकॉर्डिंग बंद करें, क्लोज अप में ज़ूम करें, फिर से रिकॉर्डिंग शुरू करें । फिर इन दोनों शॉट को जोड़ के देखें, नतीजा यह भी वही शॉट होता है पर इसमें लगता है अधिक सफाई और जल्दी से दूसरे में कट जाता है, ज़ूम के रूप में यह भी वही जानकारी को चित्रित करता है, लेकिन अधिक कुशलता से.

Thursday, 24 August 2017

वीडियो कैमरा – शटर (Shutter)

शटर का उपयोग कैसे और कब किया जाए

“शटर” शब्द अभी भी फोटोग्राफी से आता है, जहां यह कैमरा लेंस और फिल्म के बीच एक “मैकेनिकल दरवाजा" का वर्णन करता है. जब कोई फोटो लिया जाता है, तो दरवाजा एक पल के लिए खुलता है और फिल्म उस रोशनी के सामने आती है। जिस गति पर शटर खुलता है और बंद होता है वह गति अलग-अलग हो सकती है. गति जितनी अधिक होगी, शटर के खुलने की अवधि उतनी ही कम होगी, और फिल्म पर कम प्रकाश कम समय के लिए पड़ेगा.

शटर गति को फ्रैक्शन ऑफ़ सेकंड में मापा जाता है। 1/60 सेकंड की गति अर्थ है कि शटर एक सेकंड के साठवें हिस्से के लिए खुला है. वहीँ 1/500 की गति तेज है, और 1/10000 की गति वास्तव में बहुत तेज है. चित्र क्रमांक - 10(a) में देखें 

वीडियो कैमरा शटर अभी भी फिल्म कैमरा शटर से काफी अलग काम करते हैं, लेकिन परिणाम मूल रूप से एक ही होता है (तकनीकी अंतर यह है कि यह मैकेनिकल डिवाइस का उपयोग करने के बजाय, शटर की गति इलेक्ट्रॉनिक रूप से सीसीडी को चार्ज करने में लगने वाले समय से बदली जाती है। अगर यह आपके लिए कुछ भी नहीं है, तो चिंता न करें, वास्तव में यह जानना जरुरी नहीं है कि 'शटर कैसे काम करता है, लेकिन उससे होने वाले असर के बारे में पता होना चाहिए. 


चित्र क्रमांक - 10(a)

वीडियो के प्रत्येक फ्रेम के लिए एक बार शटर "खुलता है" और "बंद होता है"; यही शटर, पाल फॉर्मेट में प्रति सेकंड 25 बार और एनटीएससी फॉर्मेट में प्रति सेकंड 30 बार खुलता है. इस प्रकार, अगर एक कैमरा के शटर को 1/60 पर सेट किया गया है, तो प्रत्येक फ्रेम 1/60 सेकंड के लिए खुल जाएगा यदि गति 1/120 है, तो प्रत्येक फ्रेम एक सेकंड के 1/120 हिस्से के लिए उजागर किया जाएगा. याद रखें, शटर गति कभी भी फ्रेम दर को प्रभावित नहीं करती है, यह दोनों पूरी तरह से अलग हैं.

अधिक शटर गति का मुख्य प्रभाव यह होता है कि हर फ्रेम मोशन ब्लर (Motion Blur) के कम होने से शार्प दिखाई देता है. मोशन ब्लर तब होता है जब शटर खुलने के दौरान विषय फ़्रेम के भीतर चलता है. मतलब जितने कम समय के लिए शटर खुली होगी (यानी जितनी शटर की गति तेज होगी), उतने ही देर के लिए शॉट कैप्चर होगा.

अधिक शटर स्पीड का उपयोग स्पोर्ट्स में जायदा किया जाता है. शटर प्रभाव को देखने के लिए किसी भी खेल के प्रसारण पर ध्यान दें कि धीमी गति वाले रिप्ले कैसे दिखते हैं, खासकर जब वे अंतिम फ्रेम स्थिर करते हैं.

Wednesday, 16 August 2017

वीडियो कैमरा – आईरिस (Iris)

सही एक्सपोजर सेट करने के लिए मैनुअल आईरिस का उपयोग कैसे करें

आईरिस (Iris) : आईरिस को हम एक ऐसे दरवाजे (Adjustable Aperture) के रूप में समझ सकते हैं , जो लेंस के माध्यम से कैमरा के अन्दर आने वाली रोशनी की मात्रा को नियंत्रित करता है (जिसको हम एक्सपोज़र (Exposure) भी कहते हैं). 

वीडियो कैमरा का आईरिस मूल रूप से एक फोटो कैमरा के आईरिस के समान काम करता है – जिसमे आप जितना आईरिस खोलते हैं उतना अधिक प्रकाश आता है और तस्वीर उज्ज्वल (Brighter) दिखती है अंतर यह है कि वीडियो कैमरे में जैसे-जैसे आईरिस को बदलेंगे वैसे-वैसे व्यूफाइंडर में तस्वीर की चमक (Brightness) बदलेगी. 

1. व्यावसायिक कैमरे में आईरिस रिंग लेंस हुड पर होता है, जिसको बंद करने के लिये घड़ी की दिशा में घुमाएँ और खोलने के लिये घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाएं. चित्र क्रमांक - 9(a) में देखें.
2. उपभोक्ता स्तर के कैमरे आमतौर पर डायल या बटन का एक सेट का उपयोग करते हैं आपको मेनू से मैनुअल आईरिस का चयन करना होगा (विवरण के लिए मैनुअल देखें).

चित्र क्रमांक - 9(a) 

सही एक्सपोज़र क्या है ?

अपने मैनुअल आईरिस का उपयोग करने से पहले, आपको यह जानना होगा कि आपके व्यूफ़ाइंडर में सही एक्सपोजर कैसा दिखता है (ध्यान दें: अगर आपके कैमरे में व्यूफ़ाइंडर सेटिंग्स को एडजस्ट करने का विकल्प है, तो आपको पहले यह करना होगा). एक अच्छी शुरूआत के लिये अपने कैमरे को ऑटो-आईरिस पर सेट करें फिर इवन लाइटिंग में शॉट को फ्रेम करें. अब ध्यान दें की आईरिस में तस्वीर कितनी उज्ज्वल है, फिर मैनुअल पर आईरिस को सेट करें। अधिकांश कैमरे ऑटो-फ़ंक्शन द्वारा निर्धारित उसी एक्सपोजर को बनाए रखेंगे.

हमेशा अपने आईरिस को सेट करें ताकि विषय ठीक से उजागर हो। इसका मतलब यह है कि चित्र में विषय को छोड़कर अन्य भाग में बहुत उजाला या बहुत अंधेरा हो सकता है, लेकिन विषय आम तौर पर अधिक महत्वपूर्ण है वो बिलकुल सही दिखना चाहिए.

व्यावसायिक कैमरों में एक अतिरिक्त सुविधा होती है जिसे ज़ेबरा स्ट्राईब्स (Zebra Stribes) कहा जाता है जो आपको ओवर एक्सपोज़र बताने में सहायता कर सकता है. इसके अलावा एन.डी. फ़िल्टर (Natural Density - ND Filter) से भी अधिक एक्सपोज़र का नियंत्रित किया जा सकता है. चित्र क्रमांक - 9(b) में देखें.


चित्र क्रमांक - 9(b)


एक्सपोज़र सही करने का एकमात्र तरीका अभ्यास है विभिन्न प्रकाश की स्थितियों में शॉट रिकॉर्ड करें, फिर उन शॉट्स को दोबारा चला के देखें तब पता चलेगा की शॉट में एक्सपोज़र सही है या नहीं । याद रखें, अगर आप मैनुअल आईरिस पर काम कर रहे हैं और आप एक्सपोज़र के बारे में निश्चित नहीं हैं, तो ऑटो आईरिस पर फ्लिक करें और देखें कि कैमरा क्या सोचता है, फिर मैनुअल आईरिस पर वापस जाएं। ऐसा करने से धीरे-धीरे आप मैनुअल आईरिस पर अधिक विश्वास करने लग जायेंगे.

Thursday, 6 July 2017

वीडियो कैमरा – फोकस (Focus)

मैन्युअल फ़ोकस का उपयोग कैसे करें

अपने वीडियो को मैन्युअल रूप से फ़ोकस करने की क्षमता एक महत्वपूर्ण कौशल है।मैनुअल फोकस काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश पेशेवर कैमरे में ऑटो फोकस की सुविधा भी नहीं होती है.

सबसे पहले फोकस से सम्बंधित शब्दावली को जाने –

सॉफ्ट (Soft) फोकस ना होना (Out of focus) 

शार्प (Sharp)फोकस होना (In focus)

डेप्थ ऑफ़ फील्ड (Depth of field) – लेंस से उतनी दूरी की सीमा जिस पर एक स्वीकार्य रूप से शार्प फोकस प्राप्त किया जा सकता है

पुल ऑफ़ फोकस (Pull of focus) - एक शॉट के दौरान फोकस को किसी अलग बिंदु पर एडजस्ट करना.

मैनुअल फोकस का उपयोग कैसे किया जाता है - सबसे पहले, फ़ोकस रिंग और (ऑटो / मैन्नुअल बटन  - AF/MF) कण्ट्रोल बटन को मैन्नुअल  पर सेट करे. व्यवसायिक कैमरे में आमतौर पर फोकस रिंग सबसे आगे होती है. उपभोक्ता स्तर के कैमरों में आमतौर पर एक छोटा डायल होता है (नोट: आपको मेनू से "मैनुअल फोकस" चुनने की आवश्यकता हो सकती है) चित्र क्रमांक - 8(a) में देखें.


चित्र क्रमांक - 8(a) 
फोटो सौजन्य - सोनी 

1. सबसे पहले यह तय करें की कैमरा मैनुअल फोकस मोड पर सेट है.

2. जिस विषय पर आप फोकस करना चाहते हैं उस विषय पर जितना ज़ूम-इन कर सकते हैं उतना ज़ूम करें.

3. अब फोकस रिंग को एडजस्ट (Adjust) करें जब तक कि तस्वीर शार्प (Sharp – In focus) न हो. विषय के जायदा पास के फोकस (Closer focus) के लिए रिंग को घड़ी की दिशा (clockwise direction) में घुमाएं और विषय से दूर के फोकस (Distant focus) के लिए रिंग को घड़ी की विपरीत दिशा (anticlockwise direction) में घुमाएँ.

4. अब जो फ्रेम बनाना है उस पर ज़ूम आउट करके सेट कर लें – अब फ्रेम बिलकुल साफ़ और शार्प दिखना चाहिए.

यदि आपको अपने कैमरे का फ़ोकस एडजस्ट करने की आवश्यकता है (उदाहरण के लिए, आप प्रधान मंत्री के भाषण की शूटिंग के बीच में हैं, उसी वक़्त आप महसूस करते हैं कि उनके चहरे का फोकस सॉफ्ट है), तो यह फोकस रिंग को बदलने का तरीका जानने में मदद करता है. यदि आप गलत तरीके से फोकस करते हैं तो और अधिक डीफोकस (D focus) होने की सम्भावना होती है.

Tuesday, 4 July 2017

वीडियो कैमरा - फ्रेमिंग (Framing) और कैमरा मूवमेंट (Camera Movement)



कैमरे को विषय की तरफ सिर्फ घुमाने की बजाय आपको विषय को कंपोज़ करना है. जैसे की पहले भी कहा फ्रेमिंग कम्पोजीशन को सर्जन करने की प्रक्रिया है (Framing is the process of creating composition). 
  • फ्रेमिंग तकनीक बहुत ही व्यक्तिपरक (Subjective) है. जो एक व्यक्ति को सृजनात्मक लगता है वही दुसरे व्यक्ति को व्यर्थ लग सकता है. जो कुछ हम यहाँ देख रहे हैं वह मीडिया इंडस्ट्री में स्वीकृत है इसलिए इसे आप रूल ऑफ़ थम्ब (Rule of Thumb) के रूप में उपयोग कर सकते हैं.
  • वीडियो फ्रेम बनाने के नियम अनिवार्य रूप से आज भी बिलकुल फोटोग्राफी के नियम जैसे ही हैं।
फ्रेमिंग के नियम (Some Rules of framing) –
  • रूल्स ऑफ़ थर्ड (Rule of Thirds) - यह नियम फ्रेम को नौ भाग में बांटता है, जैसा कि पहले चित्र क्रमांक 7(a) के फ्रेम में है. इस नियम में मानसिक रूप से आपकी छवि को 2 क्षैतिज रेखाओं (Horizontal Lines) और 2 ऊर्ध्वाधर रेखाओं (Vertical Lines) का उपयोग करके विभाजित किया गया है, जैसा कि नीचे दिखाया गया है. इसमें मुख्य विषय को बीच (Centre) में रखने के बजाय फ्रेम के 1/3 या 2/3 में भाग में रखा जाता है. इसका उपयोग कैसे करें – सबसे पहले यह तय करें की फ्रेम में सबसे महत्वपूर्ण तत्व क्या है और फिर उस तत्व को इन लाइन्स पर या यह लाइन्स जहाँ मिल रहीं है उसके पास या उसके उपर रखने की कोशिश करें. उदहारण के लिए चित्र क्रमांक - 7(b) में देखें.

चित्र क्रमांक - 7(a)


चित्र क्रमांक - 7(b)
  • "हेडरूम (Head Room)", "लूकिंग रूम (Looking Room)", और "लीडिंग रूम (Leading Room)". ये शब्द फ्रेम में खाली जगह का उल्लेख करते हैं जो जानबूझकर खाली छोड़ दिया जाता है। बच्चे जिस दिशा में क्रॉल कर रहा है उस दिशा में कुछ भाग लीडिंग रूम के रूप में छोड़ा गया है (चित्र क्रमांक - 7(c) में देखें), और वहीं अगले शॉट में  एक और बच्ची जिस दिशा में देख रही है उसे देखने के लिए उस दिशा में कुछ खाली भाग लूकिंग रूम के रूप में छोड़ा गया है (चित्र क्रमांक - 7(d) में देखें). इस खाली जगह के बिना, फ्रेम असुविधाजनक लगेगा. 

चित्र क्रमांक - 7(c)


चित्र क्रमांक - 7(d)
  • वहीं हेडरूम विषय के सबसे उपरी भाग और फ्रेम के सबसे उपरी भाग के बीच की जगह को कहा जाता है. शौकिया वीडियो में एक आम आदमी अधिकतर यही गलती करता है कि बहुत ज्यादा हेडरूम छोड़ देता है, जो अच्छा नहीं दिखता है और पिक्चर को बर्बाद कर देता है किसी भी "व्यक्ति” के क्लोजअप शॉट, एक्सट्रीम क्लोजअप शॉट में, बहुत कम हेडरूम होना चाहिए.
  • आपके फ्रेम में सब कुछ महत्वपूर्ण है, बल्कि न सिर्फ विषय। फ्रेम में पृष्ठभूमि (Background) कैसा है? प्रकाश की लाइटिंग (Lighting) सही है या नहीं? क्या फ्रेम में कुछ ऐसा तो नहीं जो फ्रेम को विचलित कर सकता है, या वीडियो की निरंतरता को बाधित कर सकता है? अपने फ्रेम के किनारों (Edges) पर ध्यान दें फ्रेम में किसी भी वस्तु को आधा दिखाने से बचें, विशेष रूप से किसी व्यक्ति को (किसी के चेहरे का आधा हिस्सा पिक्चर में दिखे तो इसे बहुत नापसंद किया जाता है) साथ ही फ्रेम में किसी व्यक्ति को उसके जोड़ों (Joints) से काटने से भी बचें, जैसे फ्रेम को व्यक्ति के पेट तक रखना ठीक है पर वहीं फ्रेम उसके घुटने तक रहेगा तो सही नहीं लगेगा.
जब आप यह समझ जाते हैं की क्या करना है और क्या नहीं (Do’s and Don’ts), तो आप अधिक रचनात्मक बन सकते हैं। शॉट के अर्थ को व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका सोचें. यदि कोई बच्चा फर्श पर क्रॉलिंग कर रहा है, तो पहले स्वयं फर्श पर उतरो और उस बच्चे के पॉइंट-ऑफ-व्यू (Ponit of View) से देखने की कोशिश करो. 
हमेशा दिलचस्प और असामान्य शॉट्स बनाने की सोच रखनी होगी. क्योंकि आप अगर ध्यान दें आपके अधिकतर शॉट्स किसी की भी नज़र में सामान्य होंगे जब तक उसमे कुछ मिश्रण करने का प्रयास ना हुआ हो जैसे विभिन्न कोण (Different Angles) और भिन्न कैमरा स्थिति (Different Camera Positions). उदहारण के तौर पर जब किसी शॉट को लो एंगल (Low Angel) से लेते हैं तो सीधे शॉट की तुलना में कहीं अधिक दिलचस्प हो जाता है.

इसलिए जायदा से जायदा टीवी और प्रोफेशनल वीडियो में लिए गए असाधारण शॉट्स को देखें और समझें. सारा खेल कैमरा पोजीशन और कैमरा कम्पोजीशन का है. अपने प्रोडक्शन में भी उसका उपयोग करें.

कैमरा मूवमेंट (Basic Camera Movement) - 

कैमरा फ्रेमिंग के साथ, मूल कैमरा मूवमेंट के लिए भी मानक विवरण होते हैं। जिसमे ये मुख्य हैं:

पैन (PAN) – कैमरा को बिना वर्टीकल मूवमेंट के दायें और बाएं तरफ घुमाना.

टिल्ट (Tilt) - कैमरा को बिना हॉरिजॉन्टल मूवमेंट के ऊपर और नीचे की तरफ घुमाना.

ज़ूम (Zoom) – इन और आउट, जिसमे कैमरा विषय के करीब या उससे दूर जाता है. (हालांकि ज़ूमिंग और कैमरे को विषय के करीब या उससे दूर ले जाना दो अलग चीज़ हैं. आगे की पोस्ट में इस पर विस्तृत जानकारी मिलेगी). जब ज़ूम इन करते हैं तो उसको फ्रेम टाइट “Tighter” करना कहते हैं और जब ज़ूम आउट करते हैं तो उसको फ्रेम लूस “Looser” करना कहते हैं.

चित्र क्रमांक - 7(e)

फॉलो (Follow) – किसी भी प्रकार का शॉट, जिसमे आप कैमरे को हाथ में पकड़ते हैं (या अपने कंधे पर कैमरे को रखते हैं) और फिर किसी चलते हुए एक्शन को शूट करते हैं उसे फॉलो शॉट कहते हैं. यह शॉट लेना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन जब अच्छी तरह से किया गया हो तो बहुत प्रभावी होता है. चित्र क्रमांक - 7(e) में देखें.
चित्र क्रमांक - 7(f)

डॉली (Dolly) और ट्रैकिंग (Tracking) - डॉली एक गाड़ी की तरह है जो ट्रैक के उपर चलती है या स्टूडियो में मूवमेंट शॉट को रिकॉर्ड किया जाता है. इसमें कैमरे को डॉली पर रखा जाता है और उसे ट्रैक पर चलाया जाता है और चलते हुए कैमरे पर शॉट को रिकॉर्ड किया जाता है. डॉली शॉट्स में कई अनुप्रयोग (Applications) हैं और बहुत अलग फुटेज प्रदान कर सकते हैं. चित्र क्रमांक - 7(f) में देखें


नोट: अधिकांश कैमरा मूवमेंट इन मूल कैमरा मूवमेंट के मिश्रण हैं उदाहरण के लिए, जब आप ज़ूमिंग कर रहे होते हैं, जब तक कि आपका विषय फ्रेम के सही केंद्र (Centre) में न हो, आपको उसी समय पैन और/या टिल्ट भी करना होगा जब तक आपका मनचाहा फ्रेम नहीं बन जाता. .

Thursday, 22 June 2017

वीडियो कैमरा – शूटिंग तकनीक (Shooting Technique)

अपनी और अपने कैमरे की सही स्थिति जानें - यदि आप ट्राईपोड का उपयोग कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह स्थिर और और तीनों तरफ से बराबर हो (जब तक आपके पास इसको टिल्ट (Tilt) करने का कोई कारण ना हो). यदि ट्राईपोड में स्पिरिट लेवल (Spirit Level) हो तो उसे बिलकुल मध्य में रखें. 

यदि आप कैमरे को पैन और/या टिल्ट करने जा रहे हैं, तो इतना जरुर सुनिश्चित करें कि पुरे मूवमेंट के दौरान आपकी पोजीशन आरामदायक हो. 

अगर ट्राईपोड के हेड (Tripod Head) में बाउल ना लगी हो (जो अधिकतर सस्ते ट्राईपोड में पाया जाता है) तो फ्रेमिंग बनाते समय उसका पैन लेवल (Pan Level) जरुर जांचें क्योंकि अगर एक ही दिशा में शूट करना है तो कोई जायदा फर्क नहीं पड़ता पर अगर कैमरे को दायें से बायें पैन करना हो तो उस स्तिथि में पैन लेवल सही होना जरुरी है वरना शॉट ख़राब हो जाएगा. चित्र क्रमांक - 6(a) में देखें.

यदि आप ट्राईपोड का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो आप अपने और अपने कैमरे को यथासंभव स्थिर कर सकते हैं। अपने हाथ और कोहनी को अपने शारीर के पास रखें. साँसों को काबू में रखें. स्थिर शॉट्स के लिए, अपने पैरों को कंधे की सीधी में रखें (यदि आप खड़े हैं तो), या किसी ठोस ऑब्जेक्ट (फर्नीचर, दीवार या कुछ भी) का सहारा लेने की कोशिश करें।


चित्र क्रमांक - 6(a)

शॉट को फ्रेम करें – उसके बाद कुछ चीजों को त्वरित चेक करें: वाइट बैलेंस, फोकस, आईरिस, फ्रेम (वर्टीकल और हॉरिजॉन्टल लाइन्स, बैकग्राउंड आदि).

अपने ऑडियो पर ध्यान दें - ऑडियो उतना ही महतवपूर्ण है जितना वीडियो, इसलिए इस पर भी उतना ही ध्यान दें.

अब रिकॉर्ड बटन दबाएँ. ध्यान रखें जब आप रिकॉर्डिंग कर रहे हों तो आप सिर्फ रिकॉर्डिंग कर रहे हों क्योंकि इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता की आपकी रिकॉर्डिंग पूरी हो जाए और उसके बाद आपको पता चले की कुछ भी रिकॉर्ड नहीं हुआ है चाहे कारण कुछ भी हो. कई कैमरों के पास "रोल-इन टाइम" टेप होता है, जिसका अर्थ है कि जब आप रिकॉर्ड बटन दबाते हैं और जब कैमरा रिकॉर्डिंग प्रारंभ होता है दोनों के बीच में थोड़ा डिले (Delay) होता है.

व्यूफाइंडर के डिस्प्ले में दिखने वाले सभी संकेतों को लगातार देखते रहें. डिस्प्ले में दिखने वाले सभी संकेत के मतलब को जानने की कोशिश करें - वे आपको बहुमूल्य जानकारी दे सकते हैं

दोनों आँखों का उपयोग करें एक प्रोफेशनल व्यक्ति का एक बड़ा कौशल होता है कि वह एक आंख का उपयोग व्यूफाइंडर देखने में करता है वहीं दूसरी आँख से आस-पास के वातावरण पर नज़र रखता है. इसे सीखने में थोडा समय लग सकता है पर शोल्डर शॉट लेते समय या चलते हुए शॉट लेते समय यह तकनीक काफी सहायक सिद्द होती है. 

पीछे की ओर चलना सीखें - किसी को अपनी पीठ के बीच में अपना हाथ रखकर मार्गदर्शन करने को कहें और फिर पीछे चलते हुए शूट करें, ये शॉट्स बहुत अच्छे लग सकते हैं. आपने कई बार न्यूज़ प्रेसेंटर को चलते हुए इंटरव्यू करते हुए देखा होगा उसमे कामेरापरसन इसी तकनीक का उपयोग करता है.

फ्रेम और ऑडियो के बारे में लगातार सोचें – शूटिंग के दौरान फ्रेम कम्पोजीशन और ऑडियो को लगातार चेक करते रहें. 

कैमरे को मूव करने से पहले "रिकॉर्ड या स्टॉप" बटन दबाएं – रिकॉर्डिंग समाप्त होने के एक या दो सेकंड बाद स्टॉप बटन दबाएँ और फिर कैमरा को मूव करें (जैसे की हम फोटोग्राफी में फोटो लेने के बाद करते हैं). 

कुछ और टिप्स जो आपकी शूटिंग में सहायक होगी

शूटिंग के दौरान डिप्लोमेटिक रहें – जिन लोगों को आप शूट कर रहे हैं उनके बारे में सोचें. याद रहे की अधिकाँश लोग कैमरे के सामने थोड़े नर्वस हो जाते हैं ऐसे में आप थोड़ा सख्त रहें पर साथ ही अन्य विकल्पों के बारे में भी सोचें. 

अच्छे शॉट के लिए कब शोर मचाना या गुस्सा होना सही है और कब नहीं ये फैसला लेना सीखना होगा. अगर कोई महतवपूर्ण शॉट है तो उसे बिलकुल सही तरीके से लेने में कुछ लोगों को असुविधा हो सकती है. पर शॉट के लिए अपना नुकसान करवा लेना गलत होगा, ऐसे में उसका विकल्प तलाशें. 

तिथि/समय स्टाम्प फीचर का उपयोग कब करें – यह फीचर लगातार उपयोग करना सही नहीं होगा, इससे शॉट लो क्वालिटी प्रतीत होता है. इसका उपयोग उतनी देर ही करें जितना जरुरी है बाकी समय इसको बंद रखें. आजकल के डिजिटल कैमरों में यह फीचर आसानी से उपयोग किया जा सकता है. 

प्रयोग करने के लिए तैयार रहें - उन कुछ चीजों के बारे में हमेशा सोचें जो आप करने की कोशिश करना चाहते हैं, फिर खली समय में वह चीज़ करने की कोशिश करें (यानी शादी की शूटिंग करते समय प्रयोग न करें) अधिकांश नई तकनीकों को आदत बनाने के लिए अभ्यास और प्रयोग की ज़रूरत होती है और अच्छे कैमरावर्क के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है। 

अगर आप अच्छा काम करना चाहते हैं तो आपको कुछ समय निवेश करना होगा.