Wednesday, 26 April 2017

वीडियो कैमरा - फंक्शन (Functions)

अधिकांश घरेलू कैमकोडर (Camcorder) स्वचालित रूप से काम करते हैं. आपको बस इतना करना है कि उन्हें चालू करें, दिशा दें और रिकॉर्ड बटन दबा दें. ज्यादातर स्थितियों में यह ठीक है, लेकिन स्वचालित कैमरों में कुछ सीमाएं भी हैं. अगर आप अपने कैमरा वर्क में सुधार लाना चाहते हैं, तो आपको अपने कैमरे का नियंत्रण में रखना सीखना होगा. इसका अर्थ अधिक से अधिक मैनुअल फ़ंक्शंस (Manual functions) का उपयोग करना है। वास्तव में, पेशेवर कैमरे के पास बहुत कम स्वचालित फ़ंक्शन होते हैं, और पेशेवर कैमरा ऑपरेटर्स कभी-कभी ऑटो फोकस या ऑटो-आईरिस (Auto Iris) का उपयोग करते हैं।

ऐसे में अधिकतर लोग पूछते हैं कि "क्यों नहीं”? मेरा ऑटो फोकस ठीक काम करता है, और मेरे चित्र ठीक दिखते हैं।" इसके दो जवाब हैं:

1. यद्यपि ऑटो-फंक्शंस आमतौर पर अच्छा काम करते हैं, पर कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिसमे वे सही परिणाम नहीं दे पाते हैं.
2. आपका कैमरा नहीं जान सकता कि आप क्या चाहते हैं सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए या एक कोई विशेष इफ़ेक्ट दिखाने के लिए अक्सर ऑटो फंक्शन की जगह मैनुअल फंक्शन पर काम करना आवश्यक होता है.

जैसे-जैसे आप कैमरे के फंक्शन के बारे में और अधिक जानेंगे वैसे-वैसे आप मैनुअल फ़ंक्शंस के बेहतर परिणाम की सराहना करना शुरू कर देंगे. 
सबसे जायदा उपयोग होने वाले कैमरा फंक्शन को निचे संक्षेप में समझाया गया है (इसका पूरा विवरण आगे के पोस्ट में दिया गया है) –

                    
                        प्रोफेशनल कैमकोडर                                                                       उपभोक्ता स्तरीय कैमकोडर   
                       (Professional Camcorder)                                                                                   (Consumer Level Camcorder)                                                                       
ज़ूम (Zoom) – यह वह फ़ंक्शन है, जो विषय को आपके दृष्टिकोण के करीब ले आता है, या उससे दूर ले जाता है। यह बिलकुल कैमरे को विषय के करीब या अधिक दूर ले जाने के समान है. पेशेवर कैमरे में आमतौर पर मैनुअल फोकस रिंग लेंस के सामने  होती है (दृश्य 1(a) में देखें)

ध्यान दें कि जब ज़ूम इन करते हैं, उस दौरान तब चित्र (फ्रेम-Frame) को स्थिर रखना अधिक कठिन होता है. ऐसे में आप कैमरे को विषय के करीब ले जा सकते हैं और फिर ज़ूम आउट कर सकते हैं जिससे फ्रेमिंग वही रहेगी. लंबे ज़ूम के लिए आपको ट्राईपोड का उपयोग करना चाहिए. 

ज़ूमिंग फ़ंक्शन से हर कोई प्यार करता है यह आसान है और आप इसके साथ बहुत कुछ कर सकते हैं, यही कारण है कि यह इतना अधिक उपयोग किया जाता है. पर हम आपको यही कहेंगे कि, ज़ूम का उपयोग कम से कम करें. यह मॉडरेशन में अच्छी तरह से काम करता है लेकिन दर्शकों के लिए बहुत अधिक ज़ूमिंग बोरिंग हो जाता है। 

फोकस (Focus) - ऑटो फ़ोकस सिर्फ नौसिखियों के लिए है. फोटोग्राफी को छोड़कर, एक प्रोफेशनल वीडियो कैमरा ऑपरेटर की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑटो फोकस बिलकुल सही नहीं है. बहुत से लोगों को मैनुअल फोकस मुश्किल लगता है, लेकिन यदि आप अच्छा कैमरावर्क सीखना चाहते हैं, तो फ़ोकस नियंत्रण आवश्यक है। 
पेशेवर कैमरे में आमतौर पर मैनुअल फोकस रिंग लेंस के सामने  होती है (दृश्य 1(a) में देखें)। करीब फ़ोकस के लिए रिंग को घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएं और दूर के फोकस के लिए घडी की विपरीत दिशा (anti-clockwise)  में घुमाएँ. सबसे अच्छा फोकस प्राप्त करने के लिए, जिस विषय को आप शूट करना चाहते हैं जितना करीब हो सके उस विषय को ज़ूम इन करें और फोकस रिंग को जब तक एडजस्ट करें जब तक विषय पूरा फोकस में नहीं आ जाता और फिर अपने फ्रेम पर वापस ज़ूम आउट करें.

आईरिस (Iris) – यह एक तरह से कैमरे के लेंस पर लगा एक दरवाज़ा है (aperture) जिससे कितनी संख्या में प्रकाश (amount of light) अन्दर आएगा यह तय होता है (इसको exposure भी कहते हैं). आप इसको जितना जायदा खोलेंगे तस्वीर उतनी जायदा उज्जवल (brighter) होगी.

कैमरे में आईरिस रिंग लेंस हुड पर होती है (दृश्य 1(a) में देखें) जिसे बंद करने के लिए उसे घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएँ और खोलने के लिए घडी की विपरीत दिशा (anti-clockwise)  में घुमाएँ. उपभोक्ता स्तर के कैमरे में आमतौर पर डायल या बटन का एक सेट उपयोग में लाया जाता है. आईरिस को नियंत्रण में रखने के लिए रूल ऑफ़ थम्ब (rule of thumb) है – विषय के लिए अपना एक्सपोज़र सेट करें. इससे तस्वीर के बाकी भाग कुछ उज्जवल या डार्क हो सकते हैं पर इससे विषय बिलकुल साफ़ दिखाई देगा. 





चित्र क्रमांक - 1(a)

वाइट बैलेंस (White Balance) – वाइट बैलेंस का मतलब कलर संतुलन (color balance) से है. यह एक ऐसा फंक्शन है जो कैमरा को सफ़ेद रंग की पहचान कराके बाकी सभी रंगों की सही जानकारी देता है. क्योंकि अगर कैमरे को यह पता चल गया की सफ़ेद रंग क्या होता है तो वह बाकी रंगों की भी सही पहचान कर सकता है.

यह फ़ंक्शन आमतौर पर उपभोक्ता स्तरीय कैमरों में स्वचालित रूप से काम करता है जबकि कई बार ऑपरेटर को इसके अस्तित्व के बारे में जानकारी भी नहीं होती. यह ज्यादातर स्थितियों में अच्छी तरह से काम करता है, पर कुछ परिस्थितियों में ऑटो वाइट बैलेंस सही काम नहीं कर पाता. इन स्थितियों में रंग गलत या अप्राकृतिक लगेंगे.

वाइट बैलेंस करने के लिए, कैमरे को (उसी लाइटिंग में जिस लाइटिंग में शूट करना है) एक सफ़ेद कागज (नॉन रीफलेक्टिव) पर केन्द्रित (फुल ज़ूम-इन) करके फ्रेम बनायें. अब एक्सपोज़र और फोकस सेट करें उसके बाद वाइट बैलेंस के बटन को दबाएँ. व्यूफाइंडर में सूचक होता है जो आपको बताता है कि वाइट बैलेंस पूरा हो गया है. वाइट बैलेंस को नियमित रूप से करना चाहिए, खासकर तब जब प्रकाश की स्थिति (Lighting condition) में परिवर्तन होता है (जैसे इंडोर से आउटडोर में शूट करने जाते हैं)

ऑडियो (Audio) – वैसे सभी उपभोक्ता स्तरीय कैमरे में माइक्रोफोन पहले से होता है, आमतौर पर यह सही काम करता है और यह जनरल रिकॉर्डिंग करने के लिए अच्छा होता है. 
पर वास्तव में बेहतर ऑडियो परिणाम पाना थोडा मुश्किल विषय है या यह कहें ये अपने आप में एक सम्पूर्ण विषय है. हम इसमें बहुत कुछ नहीं करेंगे – बस आपको यह जानना जरुरी है कि ऑडियो बहुत महत्वपूर्ण है और इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।  

यदि आप अच्छे ऑडियो परिणाम चाहते हैं, तो अपने कैमरे के "माइक्रो इनपुट" सॉकेट में एक बाहरी माइक्रोफ़ोन को प्लग करने का प्रयास करें (यदि इसमें ये है तो)। ऐसा करने के आपको पास दो कारण हैं:

1. आप एक एसा माइक उपयोग कर सकते हैं जो कैमरे के अंतर्निहित माइक (Internal Mic) की तुलना में आप के काम के प्रकार के लिए अधिक अनुकूल है.
2. आपको परिस्थिति और कैमरे एंगल के अनुसार अलग-अलग जगह पर माइक की आवश्यकता हो सकती है. उदाहरण के लिए, जब हम एक भाषण को कवर करते हैं, तो माइक हमें एक लंबी ऑडियो लीड के साथ पोडियम के ऊपर या आस पास चाहिए हो सकता है.

जिस स्तर (Audio Level) पर आपका ऑडियो रिकॉर्ड हुआ है वह महत्वपूर्ण है। अधिकांश कैमरों में "ऑटो-गेन कंट्रोल" होता है, जो स्वचालित रूप से ऑडियो स्तर को समायोजित (adjust) करता है. उपभोक्ता स्तर के कैमरों में यह आमतौर पर इसी तरह से सेट होता है, और यह अधिकांश स्थितियों में अच्छी तरह से काम करता है. पर अगर आपके पास मैन्युअल ऑडियो लेवल नियंत्रण का विकल्प है, तो इसका उपयोग करना बेहतर होगा. 

अगर हो सके तो बैकग्राउंड (एम्बिएंट – Ambient) को कम या जायदा पर रिकॉर्ड करें, इससे प्रोडक्शन के कार्य में लचीलापन आता है और कभी कभी कुछ शॉट्स के बाद अचानक एम्बिएंट साउंड की आवश्यकता एक इफ़ेक्ट के रूप में पड़ सकती है. 

लोग क्या कह रहे हैं, इसे सुनें और फिर वीडियो बनाएं। किसी को बात करते-करते में शॉट्स शुरू करने और खत्म करने की कोशिश न करें - वीडियो पूरा होने के बाद अगर ऑडियो कटा हुए मिले तो इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता है.

शूटिंग करते समय बैकग्राउंड संगीत का बहुत सावधान रखें - इसका परिणाम यह हो सकता है की जब-जब  शॉट बदलेगा बैकग्राउंड म्यूजिक भी बदलेगा, वो बिलकुल ऐसा लगेगा जैसे कि हम कोई खराब रिकॉर्डिंग को सुन रहे हों.

एक और बात ... हवा के शोर (wind noise) से सावधान रहें यहां तक कि थोड़ी सी भी हवा आपके ऑडियो को बर्बाद कर सकती है. कई कैमरों में "लो-कट फिल्टर" होता है, जिसे कभी-कभी "एयर नॉइज़ फिल्टर" या कुछ इसी तरह के रूप में संदर्भित किया जाता है. ये मदद करते हैं, लेकिन हवा के शोर को रोकना ही बेहतर समाधान है जिसके लिए आप किसी विंडस्क्रीन का उपयोग कर सकते हैं, या खुद इस तरह की कोई चीज़ बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

शटर (Shutter) - शुरुआती स्तर पर आपको वास्तव में शटर का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसका उल्लेख जरुरी है। इसमें कई अनुप्रयोग (Applications) हैं, जिसका उपयोग विशेष रूप से खेल या फास्ट-एक्शन फुटेज के लिए होता है. इसका मुख्य लाभ यह है कि तेज फ्रेम अच्छे में भी मोशन साफ़ दिखाई पड़ते हैं (जो स्लो मोशन रीपलेस -Replays के लिए जरुरी है). 

शटर का उपयोग एक्सपोज़र को नियंत्रण करने के लिए भी किया जा सकता है. जब तक आपको यह ना पता हो कि शटर प्रभावी ढंग से कैसे उपयोग करें, उसे बंद रखें.

इफेक्ट्स (Effects) - कई उपभोक्ता कैमरों में पहले से डिजिटल इफेक्ट्स चयन करने का विकल्प होते हैं जैसे डिजिटल, मिक्सिंग, स्ट्रोब, आदि.

वीडियो में इतनी सारी चीजें होती हैं जिसे समझना मुश्किल होता है ऐसे में  मॉडरेशन कुंजी है: यदि आपके पास उचित कारण है, तो इसका उपयोग करें, वरना ना करें.

आपको यहाँ यह पता होना चाहिए की कैमरे से किये गये लगभग सभी इफ़ेक्ट, एडिटिंग सॉफ्टवेयर में बेहतर तरीके से किये जा सकते हैं इसलिए हो सके तो हमेशा अपने फुटेज को "शुष्क" यानि (बिना इफ़ेक्ट) के शूट करें और बाद में इफ़ेक्ट जोड़ें.

Saturday, 22 April 2017

वीडियो कैमरा - योजना (Planning)

योजना (planning): यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है, और संभवत: निर्देशक के लिए सबसे मुश्किल काम है। यह वह कार्य जहां आपकी अधिकांश ऊर्जा आपको निर्देशित करती है। 

बड़े प्रोजेक्ट में कैमरा वर्क सिर्फ एक कौशल है- जिसका लक्ष्य आमतौर पर एक पूरा वीडियो, टीवी कार्यक्रम, या किसी तरह की प्रस्तुति का उत्पादन करने के लिए होता है. एक अच्छे कैमरा वर्क के लिए, आपके पास पूरी प्रक्रिया का स्पष्ट चित्र होना चाहिए या कम से कम एक स्पष्ट विचार होना चाहिए की जब यह वीडियो बन जाएगा तो कैसा दिखेगा और कैसा सुनाई देगा .

कोई एक चीज़ है जो पेशेवरों को शौकीनों से अलग करती है तो वह है शौक़ीन हमेशा “विषय और शूट” (point and shoot) करते हैं और पेशेवर हमेशा “योजना और शूट” (planning and shoot) करते हैं l जाहिर है कई बार ऐसी परिस्थिति होती है जब रिकॉर्डिंग से पहले तैयारी करने का समय नहीं मिलता है- कभी कभी कार्यवाही अप्रत्याशित होती है और आपको उसके लिए जाना होता है l इन मामलों में, जहाँ तक संभव हो आपको अपनी योजना के अनुसार चलना चाहिए – योजना सबकुछ है (Planning is everything).

सामान्य कैमरा वर्क के लिए आप योजना को दो भाग में विभाजित कर सकते हैं – “शूट प्लान” और “शॉट प्लान”.

शूट प्लान (Shoot Plan):
इस मामले में “शूट” शब्द एक शूटिंग सत्र को संदर्भित करता है. अगर आप रिकॉर्ड की गयी हर फुटेज को शूट का भाग समझते हैं और प्रत्येक शूट के लिए एक योजना बना रहे हैं, तो आप बेहतर संगठित फुटेज बनाने के रास्ते पर हैं।

सबसे पहले, प्रत्येक शूट के उद्देश्य के बारे में आप पूरी तरह से स्पष्ट होना चाहिए। सामान्यतः, आप जो कुछ भी करते हैं वह एक बड़ी योजना के लिए काम करने जैसा होना चाहिए. 
वास्तव में यह क्या है जो कई कारकों पर निर्भर करेगा-

यदि आप एक फीचर फिल्म बना रहे हैं, तो दीर्घकालिक योजना (long term planning) यह होनी चाहिए कि स्क्रिप्ट / स्टोरीबोर्ड के लिए आवश्यक सभी शॉट्स इकट्ठा करके रखें. 
अगर आप होम वीडियो बना रहे हैं, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक संग्रह बनाने की दीर्घकालिक योजना हो सकती है l 
यदि आप एक “ऑफ” प्रोजेक्ट (जैसे कि शादी का वीडियो) बना रहे हैं, तो भी आपको शूट के लिए दीर्घावधिक निहितार्थों (long term implications) को ध्यान में रखना होगा।

योजना का मतलब है कि एक ऐसा रवैया अपनाना जिसमे नियंत्रण आपके हाथ में हो. जब आप अपना वीडियो कैमरा निकालते हैं, तो यह सोचने के बजाय कि "यह वीडियो अच्छा लगेगा" और जो भी है उसे शूट करना शुरू कर दें, उससे पहले यह सोचें कि, "मैं यह वीडियो कैसे शूट करूँ जिससे यह वीडियो अच्छा लगे” ? फिर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वीडियो शूट करना शुरू करें (जरुरत पड़े तो डायरेक्शन भी करें).

शूट की अनुमानित लंबाई (approximate length) की योजना बनाएं: 
आपको कितना फुटेज शूट करने  करने की जरूरत है, और यह आपको लेने में कितना समय लगेगा? इसकी पूरी योजना शूट शुरू करने से पहले कर लें l इससे आपको उपकरण चुनने में भी मदद मिलती है. 

उपकरण की चेकलिस्ट रखें, जिसमें यह निम्न उपकरण शामिल हो सकते हैं : 
कैमरा, ट्राईपोड,  टेप (डिजिटल कार्ड), बैटरी, माइक्रोफोन, ऑडियो उपकरण, रोशनी के उपकरण, बिजली की आपूर्ति, लॉग शीट्स और अन्य पेपर वर्क.

सम्पादित करने की योजना (Planning to Edit): 
यह महत्वपूर्ण है, यदि आपको लगता है कि यह आपके लिए लागू नहीं होता है, तो आप गलत हैं. आपके द्वारा कैप्चर किए गए सभी शॉट्स को संपादन को ध्यान में रखकर शूट किये जाने चाहिए. 
संपादित करने के दो बुनियादी तरीके हैं: पोस्ट-प्रोडक्शन और इन-कैमरा

पोस्ट-प्रोडक्शन - संपादन का मतलब है कि आपके द्वारा रिकॉर्ड किए गए शॉट को किसी संपादन उपकरण का उपयोग करके उन्हें पुन: संयोजन (जोड़ा) किया जाना । पेशेवरों का काम करने का यही तरीका है – इस तरह से काम करने में शूटिंग के दौरान जायदा आसान हो जाती है और परिणाम भी बेहतर मिलते हैं .सरल पोस्ट संपादन करने के लिए, आपको केवल कैमरा, एक वीटीआर या कार्ड रीडर और कुछ कनेक्टिंग लीड्स जैसे फायरवायर केबल, की आवश्यकता है. आप शूटिंग योजना के अंतर्गत किसी भी क्रम में अपने शॉट्स एकत्र कर सकते हैं, और जितने चाहे उतने शॉट्स शूट कर सकते हैं l संपादन के दौरान आप अवांछित शॉट्स को हटा देते हैं और अच्छे शॉट्स को जैसे चाहे जोड़ सकते हैं l यह एक समय लेने वाला कार्य हो सकता है (खासकर यदि आपको संपादन का अधिक अनुभव नहीं है) लेकिन आमतौर पर इस प्रयास से अच्छे परिणाम मिलते हैं l  

इन-कैमरा – इन कैमरा संपादन का मतलब है कि जो भी आप शूट करते हैं वही आपको मिलता है – जहाँ कोई पोस्ट प्रोडक्शन ना हो l यहाँ मुख्य बिंदु यह है कि आप अभी भी संपादन कर रहे हैं , आप अब भी यह तय कर सकते हैं की कौन सा शॉट पहले जायेगा और कौन सा बाद में बस फर्क इतना है कि ये सारे फैसले आप तब लेते हैं जब आप शूट कर रहे होते हैं बजाय पोस्ट प्रोडक्शन के. यह आसान नहीं है और ना ही ये जरुरी है की हर बार ये सही होगा. 
इसमें नियोजन, दूरदर्शिता और अनुभव की आवश्यकता है

नोट: इसके अलावा एक अन्य ऐसी स्थिति है जिसका उल्लेख किया जाना चाहिए: लाइव मल्टी-कैमरा शूट l इसमें दो या उससे अधिक कैमरे विज़न मिक्सर से जुड़े होते हैं और डायरेक्टर उस कार्यक्रम का लाइव संपादन करवाता है (इसका उदहारण है लाइव क्रिकेट मैच) l इस मामले में, आप संपादन का काम कार्यक्रम के शूट के दौरान उसके वास्तविक समय में कर सकते हैं ।

शॉट प्लान (Shot Plan):
एक बार जब आप अपने शूटिंग सत्र की योजना बना लेते हैं, तो आप व्यक्तिगत शॉट्स की योजना बनाने के लिए तैयार हो जाते हैं । सबसे पहले, हर शॉट को लेने का कोई कारण तय कीजिये । अपने आप से पूछें "मैं इस शॉट के साथ क्या हासिल करने की कोशिश कर रहा हूं”.

क्या यह शॉट आवश्यक है? क्या मैंने पहले ऐसा शॉट लिया है जो अनिवार्यतः एक जैसा है? क्या मेरे दर्शक इस विषय को पसंद करेंगे ? 

एक बार जब आपको लगता है कि शॉट प्राप्त करने के लिए आपके पास एक अच्छा कारण है, तो इसे शूट करने के सर्वोत्तम तरीके के बारे में सोचें l उसके बाद विभिन्न एंगल, फ्रेमिंग के बारे में सोचें l अच्छी रचना को मास्टर स्टेज तक पहुँचाने में समय लगता है लेकिन लगातार अभ्यास के साथ आप वहां पहुंचेंगे।

अपने आप से यह पूछें कि आप इस शॉट के माध्यम से अपने दर्शकों को क्या जानकारी देना चाहते हैं, और यह सुनिश्चित कर लें कि आप शॉट को इस तरह से कैप्चर करें जिससे दर्शक इसे समझ जाएँ । प्रत्येक शॉट को लेने से पहले पूरा समय लें, खासकर तब जब वह शॉट महत्वपूर्ण है.
यदि आवश्यक हो (और यदि आप पोस्ट प्रोडक्शन में संपादन करने वाले हैं), तो शॉट के अलग-अलग एंगल से शूट करें ताकि आप बाद में सर्वश्रेष्ठ शॉट चुन सकें।

इसके अलावा, पोस्ट संपादन के लिए, प्रत्येक शॉट की शुरुआत और अंत में कम से कम 5 सेकंड के अतिरक्त विडियो शूट करें । यह संपादन उपकरणों के लिए आवश्यक है, और यह सुरक्षा बफर के रूप में भी कार्य करता है।

Friday, 21 April 2017

वीडियो कैमरा: शब्दावली (Terminology)

शॉट (Shot): सभी वीडियो अलग-अलग प्रकार के शॉट्स से बने होते हैं. एक शॉट मूल रूप से तब होता है जब आप कैमरे पर रिकॉर्डिंग बटन दबाते हैं और जब उस रिकॉर्डिंग को रोकते हैं यह एक शॉट कहलाता है. ये बिलकुल वैसा है जैसे हम एक फोटो एलबम बनाने के लिए कई व्यक्तिगत तस्वीरों को इकठ्ठा करते हैं, इसी तरह शॉट्स भी एक वीडियो बनाने के लिए इकट्ठा किये जाते हैं ।

फ्रेमिंग  और रचना (Framing & Composition): फ्रेम वह तस्वीर है जिसे आप व्यूफाइंडर पर (या मॉनिटर पर) देखते हैं। और संरचना (कम्पोजीशन) वह है जो एक तस्वीर फ्रेम के अंदर जो कुछ भी दिखता है उन सब विषयवस्तु के लेआउट को संदर्भित करता है - विषय क्या है, वह फ्रेम में कहाँ है, वह किस तरफ देख रहा है, पृष्ठभूमि (background), फॉरग्राउंड (foreground), प्रकाश (Lighting) आदि।

जब आप एक शॉट की फ्रेमिंग करते हैं, तो आप कैमरे की स्थिति और ज़ूम लेंस को समायोजित करते हैं, जब तक कि आपके शॉट में वांछित संरचना (desired composition) नहीं होती है।

वीडियो उद्योग में नियमों का एक सामान्य सेट है, जो बताता है कि विभिन्न प्रकार के कैमरा शॉट्स को कैसे फ़्रेम करें, जैसे नीचे दिए गए सचित्र में दिखाया गया है -

       क्लोज अप शॉट CU (Closeup Shot)
                                                            विषय की एक विशेषता दर्शाता है
                      (P.C.- CM Gurjar)



      वाइड शॉट WS (Wide Shot)
          पुरे विषय को दिखता है
              (P.C.- CM Gurjar)

       


      वैरी वाइड शॉट VWS (Very Wide shot)
             विषय के वातावरण को दिखता है
(P.C.- CM Gurjar)
ट्रांजीशन (Transition): एक बड़ी कहानी को बताने के लिए एक अनुक्रम में शॉट्स को जोड़ा (संपादित) जाता है । जिस तरह से किसी भी दो शॉट्स को एक साथ जोड़ जाता है, इसे ट्रांजीशन कहते हैं. आम तौर पर इसे कट (cut) ट्रांजीशन कहते हैं, जिसमें एक शॉट के तुरंत बाद दूसरा शॉट बदलता है. अधिक जटिल ट्रांजीशन में मिश्रण (mixing), वाइप (wipes), डीसोल्व (dissolve), फेड (fade) और डिजिटल इफ़ेक्ट (digital effects) शामिल हैं। एक मूविंग शॉट (जैसे पैन शॉट) को एक ट्रांजीशन के रूप में भी माना जा सकता है जिसमे एक शॉट से नए शॉट पर जाते हैं। कैमरा वर्क के काम में ट्रांजीशन बहुत महत्वपूर्ण है, आपको इस दौरान इसके बारे में लगातार सोचने की ज़रूरत है कि प्रत्येक शॉट अगले शॉट के पहले या उसके बाद में कैसे फिट होगा। 

जायदा जानकारी के लिए विडियो ट्रांजीशन पर क्लिक करें.

इसके अलावा कुछ जरुरी शब्दावली हैं जिसके बारे में आगे पूरी जानकारी दी जाएगी :

पैन (PAN):                    दायें से बाएं और बाएं से दायें कैमरा घुमाना.
टिल्ट (TILT):                 ऊपर और नीचे कैमरा घुमाना.
ज़ूम (ZOOM):                इन-एंड-आउट कैमरा घुमाना (यानी करीब और दूर.
आईरिस (एक्सपोजर):      आईरिस वह होता है जो कैमरे में प्रकाश को प्रवेश देता है.
Iris (Exposure)               जायदा आईरिस का मतलब जायदा प्रकाश और उज्जवल तस्वीर.
वाइट बैलेंस :                     व्हाइट बैलेंस करना यानी कि सबसे पहले आप कैमरा को बताते हैं कि
 (White Balance)              एक्चुअल व्हाइट क्या है और फिर आपका कैमरा बाक़ी सारे एडस्टमेंट
                                          ख़ुद ही कर लेता है।
 शटर (Shutter):  शटर का उपयोग स्टील कैमरा में होता है.
ऑडियो (Audio):             ध्वनि जो विडियो के साथ जाने के लिए दर्ज की जाती है. 

Thursday, 20 April 2017

वीडियो कैमरा : परिचय (Introduction)

वीडियो परिभाषा : दृश्य मल्टीमीडिया स्रोत जो चलती चित्र बनाने के लिए छवियों के क्रम को जोड़ती है वीडियो एक स्क्रीन पर एक संकेत प्रेषित करता है और उस क्रम को संसाधित करता है जिसमें स्क्रीन कैप्चर किया जाना चाहिए। वीडियो में आमतौर पर ऑडियो घटक होते हैं जो स्क्रीन पर दिखाए जाने वाले चित्रों के अनुरूप होते हैं

ये ट्यूटोरियल/ब्लॉग आपको अपने कैमरे के काम के हर पहलू को बेहतर बनाने के लिए ज्ञान और कौशल प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। वे पूर्ण नौसिखिया स्तर से शुरू करते हैं और पेशेवर कार्यों के माध्यम से काम करते हैं।


वे किसी भी प्रकार के कैमरे के काम पर भी लागू होते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या आप एक शौकिया फिल्म निर्माता या कैरियर कैमरा ऑपरेटर बनना चाहते हैं - वही बुनियादी सिद्धांत और तकनीकों को सभी पर लागू होता है।

इन ट्यूटोरियल का अधिकतम लाभ उठाने के लिए, आपको दो चीजें होनी चाहिए:

1. वीडियो कैमरा तक पहुंच:आपको यह पता होना चाहिए कि कैसे इसे चालू करें, टेप लोड करना, रिकॉर्ड दबाना, इत्यादि । आपको इन बुनियादी फ़ंक्शंस में परेशानी हो रही है, तो अपने कैमरा मैनुअल या सप्लायर देखें।

2. धीरज : कैमरे का काम एक ऐसा कौशल है जिसमें बहुत से सीखने और अभ्यास की आवश्यकता होती है l

शुरू में सचमुच कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आप किस प्रकार के कैमरे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अच्छे मैन्युअल फंक्शन के साथ एक अच्छी श्रेणी का कैमरा बेहतर है। आप बाद में अलग और बेहतर कैमरे के बारे में सोच सकते हैं ।

यद्यपि वास्तव में एकमात्र उपकरण की जरूरत है वो है कैमरा, अगर आप गंभीर हैं तो आप कुछ अतिरिक्त उपकरण खरीदने पर विचार कर सकते हैं सबसे अच्छा सहायक शुरू करने के लिए एक अच्छा ट्राईपोड है l

वीडियो कैमरा - फंक्शन (Functions)

अधिकांश घरेलू कैमकोडर ( Camcorder ) स्वचालित रूप से काम करते हैं. आपको बस इतना करना है कि उन्हें चालू करें, दिशा दें और रिकॉर्ड बटन दबा दे...